भूपेन हजारिका को आज दिया जाएगा भारत रत्न

भूपेन दा (Bhupen Hazarika) कवि, गीतकार, गायक, अभिनेता, पत्रकार, लेखक, फिल्मकार यानी विभिन्न विधाओं का समुच्च्य थे. उन्होंने असम की समृद्ध लोक धरोहर को अपने गानों के माध्यम से सुंदरतापूर्वक व्याख्यायित करके दुनिया के सामने पेश किया.

भाषा
Updated: August 8, 2019, 11:03 AM IST
भूपेन हजारिका को आज दिया जाएगा भारत रत्न
भुपेन हजारिका को आज भारत रत्न मिलेगा.
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Updated: August 8, 2019, 11:03 AM IST
भूपेन हजारिका  (Bhupen Hazarika) के पुत्र तेज हजारिका का कहना है कि उनके पिता दुनिया के लिए भारत का उपहार हैं और मरणोपरांत उन्हें ‘भारत रत्न’ (Bharat Ratna) प्रदान किया जाना उनकी असाधारण प्रतिभा की सशक्त राजकीय पहचान है . अपनी इसी मेधा से उन्होंने हर वर्ग के भारतीयों को शिक्षित और प्रेरित किया था.

अमेरिका में रह रहे तेज हजारिका भूपेन दा को बृहस्पतिवार को प्रदान किये जाने वाले देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान को ग्रहण करने के लिए यहां आये हुए हैं. भूपेन हजारिका भूपेन दा नाम से लोकप्रिय थे.

भूपेन दा कवि, गीतकार, गायक, अभिनेता, पत्रकार, लेखक, फिल्मकार यानी विभिन्न विधाओं का समुच्चय थे. उन्होंने असम की समृद्ध लोक धरोहर को अपने गानों के माध्यम से सुंदरतापूर्वक व्याख्यायित करके दुनिया के सामने पेश किया.

तेज ने एक साक्षात्कार में पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘ यह सम्मान, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक प्रशासन के चुनौतीपूर्ण लेकिन व्यावहारिक मार्ग के जरिए, देश की जनता का कल्याण करने की सुविचारित भावना पर आम जन की मोहर है.’’

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यह देश की सामूहिक संपदा को उसके व्यापक वैविध्य, समाज के सभी वर्गों तक उचित वितरण की अनुमति देती है और अपने आप में जश्न मनाने का अहम कारक भी है. ’’

सरकार ने 25 जनवरी को घोषणा की थी कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मखर्जी, भारतीय जनसंघ के नेता नानाजी देशमुख (मरणोपरांत) और हजारिका को भारत रत्न प्रदान किया जाएगा. ये पुरस्कार बृहस्पतिवार को दिये जाएंगे.
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तेज ने कहा कि उनके पिता को भारत रत्न प्रदान करना ऐतिहासिक मील का पत्थर है . भारत जान गया है कि उसकी विविधता उसकी विशिष्टता और ताकत है.

वर्ष 1926 में सादिया में एक शिक्षक के परिवार में जन्मे भूपेन दा ने 1942 में गुवाहाटी से मूलभूत शिक्षा हासिल की. उन्होंने 1944 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से बीए और 1946 में राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया. उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय से जनसंचार में पीएचडी की. उन्हें अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय से लिस्ले फेलोशिप भी मिली.

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अमेरिका में वह महान अश्वेत गायक पॉल रॉबसन से मिले जिनके प्रसिद्ध गाने ‘ओल्ड मैन रिवर’ का ‘बिस्तरनो पैरोल’’ (हिंदी-ओ गंगा बहती है) में रूपांतरित किया गया.

तेज के अनुसार ब्रह्मपुत्र के इस गायक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि उनके गाने प्राथमिक कक्षाओं से लेकर स्नातक तक शिक्षण संस्थानों में पढ़ाये जाएं. उनके गानों को मजबूत तथा प्रबुद्ध भावी भारत के लिए एकीकरण और सद्भाव की भाषा के रूप में लिया जाए.

तेज ने अपने पिता की विरासत को आगे ले जाने के लिए कुछ साल पहले हजारिका फाउंडेशन शुरू किया था.
First published: August 8, 2019, 6:57 AM IST
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