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Madan Mohan Birth Anniversary: सैनिक से संगीतकार बनने वाले मदन मोहन ने फिल्मों में दी हैं यादगार गजलें

मदन मोहन हिंदी सिनेमा के चमत्कारी संगीतकार थे.

मदन मोहन हिंदी सिनेमा के चमत्कारी संगीतकार थे.

बगदाद में जन्में मदन मोहन (Madan Mohan) अपने पिता के साथ मुंबई आ गए थे. मदन ने संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी. 11 साल की उम्र में ऑल इंडिया रेडियो पर बच्चों के लिए प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लेना शुरु कर दिया था.

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मदन मोहन (Madan Mohan) हिंदी सिनेमा के एक ऐसे प्रसिद्ध संगीतकार थे जो अपनी गजलों के लिए प्रसिद्ध थे. 25 जून 1924 में जन्में मदन मोहन का पूरा नाम मदन मोहन कोहली था. युवा अवस्था में एक सैनिक के रुप में सेवा देने वाले मदन का संगीत के प्रति झुकाव उन्हें ऑल इंडिया रेडियो ले आया. 50 से लेकर 70 के दशक में मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर रहे मदन मोहन ने हिंदी फिल्मों में कई मशहूर गजलों को कंपोज किया था. संगीतकार की जयंती पर आपको सुनाते हैं उनके मशहूर 5 गाने.

तलत महमूद और लता मंगेशकर की आवाज में मदन मोहन मे कई यादगार गजलें कंपोज किए थे. 1962 में आई फिल्म ‘अनपढ़’ आपको भले ही याद ना हो लेकिन ‘आपकी नजरों ने समझा’ गीत को आज भी बेहद पसंद किया जाता है. चलिए आपको सुनाते हैं-

मोहम्मद रफी को बेहद पसंद करते थे मदन मोहन

मदन मोहन यूं तो सभी से सिंगर्स को पसंद करते थे लेकिन उनके सबसे पसंदीदा सिंगर मोहम्मद रफी थे. कहते हैं कि जब ऋषि कपूर स्टारर फिल्म ‘लैला मजनू’  बन रही थी तो सिंगर के लिए किशोर कुमार को नाम आगे किया गया था लेकिन मदन मोहन ने साफ-साफ कह दिया था कि पर्दे पर मजनूं की आवाज को रफी साहब की ही होगी. गाया भी रफी साहब ने और फिल्म एक बड़ी म्यूजिकल हिट साबित हुई.

‘लग जा गले’ को संगीत से मदन मोहन ने सजाया था

मदन मोहन के संगीत से सजा गाना ‘लग जा गले’ जितना मशहूर उस दौर में था, उससे कम आज भी नहीं है.

‘ढूंढता है दिल’ की सफलता नहीं देख पाए मदन मोहन

1975 में आई फिल्म ‘मौसम’ के गाने ‘ढूंढता है दिल’ को लिखा गुलजार ने था और कंपोज मदन मोहन ने किया था. हालांकि इसकी सफलता देखने के लिए दुनिया में नहीं रहें.

 मदन मोहन के निधन के 29 साल बाद कंपोज हुए उनके धुन

शानदार संगीतमय सफर तय करते हुए मदन मोहन 14 जुलाई 1975 में दुनिया से चले गए लेकिन उनकी धुनों का ही कमाल था कि साल 2004 में आई फिल्म ‘वीर जारा’ में इस्तेमाल हुआ. दरअसल, मदन मोहन ने ये धुन जावेद अख्तर को सुनाई थी और इसी धुन के लिए जावेद अख्तर मे फिल्म का गीत ‘तेरे लिए’ लिखा.

मदन मोहन भले ही दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपने चमत्कारी सुरीले धुनों की वजह से संगीत प्रेमियों के दिलों में आज भी जिंदा हैं और हमेशा रहेंगे.

Tags: Bollywood, Mohammad Rafi, Music

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