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गूगल डूडल: इन्होंने बनाई चार्ली चैप्लिन की फेवरेट फिल्म

जन्मदिन पर व्ही शांताराम की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से

जन्मदिन पर व्ही शांताराम की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से

जन्मदिन पर व्ही शांताराम की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से

    चार्ली चैप्लिन जब अपनी पसंदीदा फिल्म का जिक्र करते थे, तो उनका नाम लेते थे. शाहरुख खान ने अगर बेटे आर्यन को खासतौर पर कोई हिंदी फिल्म देखने की नसीहत दी है, तो वो इनकी बनाई फिल्म है.

    ये वो हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को पूरी तरह बदल दिया. असल में तो इनका नाम 'शांताराम राजाराम वंकूंद्रे' थोड़ा मुश्किल है, लेकिन प्यार से इन्हें वी. शांताराम के नाम से याद किया जाता है. आज यानी 18 नवंबर को इनका जन्मदिन है. गूगल ने भी डूडल बनाकर इन्हें याद किया है.

    एक सिनेमा प्रेमी के लिए अगर कुछ लोगों को जानना बहुत जरूरी है, तो वी. शांताराम वो जरूरी नाम हैं. उन्होंने फिल्में बनाईं और वो फिल्में सिर्फ चली नहीं, बल्कि हमेशा के लिए अमर हो गईं.

    आप चाहें दो आंखें बारह हाथ जैसी क्लासिक की बात करें या डॉ. कोटनिस की अमर कहानी, नवरंग और झनक-झनक पायल बाजे की सभी फिल्मों में एक फिल्मकार का जुनून नजर आता है.

    फिर शांताराम को सिर्फ एक फिल्मकार भी नहीं कहा जा सकता, वह सिनेमा की एक जीती-जागती संस्था थे, जिसे डायरेक्शन-प्रोडक्शन से लेकर एक्टिंग, एडिटिंग, फोटोग्राफी से लेकर राइटिंग तक सब कुछ बखूबी आता था.

    1927 में उनकी पहली फिल्म आई थी नेताजी पाल्कर. 1929 में उन्होंने प्रभात फिल्म कंपनी बनाई. इसके बाद फिल्मों का जो सिलसिला शुरू हुआ, वो आखिर तक जारी रहा है. उन्होंने मराठी और हिंदी दोनों भाषाओं में फिल्में बनाईं.

    उनके सिनेमा और जिंदगी के सफर उनकी बेटी मधुरा पंडित जसराज ने एक किताब भी लिखी है. द मैन हू चेंज्ड द इंडियन सिनेमा नाम की इस किताब में शांताराम से जुड़े कई किस्से हैं.

    दादा साहब फाल्के ने मांगा था शांताराम से उधार
    किताब में बताया गया है कि भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले दादा साहब फाल्के ने शांताराम को मिलने का बुलावा भेजा था. शांताराम ये न्यौता पाकर बेहद हैरान थे, क्योंकि इतने बड़े आदमी का एक युवा फिल्मकार को मिलने के लिए बुलाना सामान्य घटना नहीं थी.

    इससे भी ज्यादा हैरानी शांताराम को तब हुई, जब वो फाल्के से मिलने पहुंचे. उन्होंने देखा कि फाल्के एक फटी हुई चादर पर लेटे हैं और उनके घर की हालत भी जर्जर है. फाल्के ने शांताराम से कहा था कि उनके पास उनके इलाज और खाने-पीने तक के पैसे नहीं हैं.

    उन्होंने शांताराम से कुछ पैसे उधार देने के लिए कहा था. किताब की मानें, तो उस मुलाकात के बाद से शांताराम ने हर महीने दादा साहब फाल्के को एक निश्चित धनराशि भेजना शुरू कर दिया था.

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    चार्ली चैप्लिन की फेवरेट फिल्म थी मनूस
    चार्ली चैप्लिन का नाम किसी भी सिनेमा लवर के लिए नया नहीं होगा. कहा जा सकता है कि उनकी फिल्में देख-देखकर कई लोगों ने मुस्कुराना सीखा होगा.

    दुनिया के सबसे मशहूर हास्य अभिनेता चैप्लिन को जो गिनी-चुनी भारतीय फिल्में पसंद थीं, उनमें से एक थी मराठी फिल्म मनूस. इस फिल्म को बनाने वाले भी कोई और नहीं वी. शांताराम ही थे.

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    शाहरुख ने आर्यन को दी दो आंखें बारह हाथ
    बीते दिनों खबर आई थी किंग खान शाहरुख के बेट आर्यन खान न्यूयॉर्क में सिनेमा की पढ़ाई कर रहे हैं. इस पर जब शाहरुख से पूछा गया कि वो अपनी तरफ से आर्यन को क्या टिप्स दे रहे हैं? इस पर उन्होंने कहा था कि उन्होंने आर्यन को कुछ फिल्में देखने के लिए कहा है.

    उन्होंने कहा, मैंने आर्यन को दो आंखे बारह हाथ जैसी हिंदी फिल्मों के फोल्डर बनाकर दिए हैं और कहा कि वो इन फिल्मों को जरूर देखें. दो आंखें बारह हाथ शांताराम की कल्ट क्लासिक फिल्मों में शामिल है.

    दो आंखें बारह हाथ
    1957 में शांताराम की बनाई कई फिल्मों में से एक दो आंखें बारह हाथ कल्ट क्लासिक साबित हुई थी. ये कहानी थी छह अपराधियों की, जिन्हें एक आदर्शवादी जेलर की निगरानी में रखा गया था.

    इस जेलर का रोल भी शांताराम ने खुद ही निभाया था. इस फिल्म का गाना ऐ मालिक तेरे बंदे हम आज भी कई स्कूलों की मॉर्निंग प्रेयर का हिस्सा है. इसे वसंत देसाई ने कंपोज किया था और लता मंगेशकर ने गाया था.

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