काला हिरण शिकार केस: सलमान खान को राहत, आर्म्‍स एक्‍ट मामले में सरकार की याचिका खारिज

आर्म्स एक्ट के मामले में गलत हलफनामा देने के मामले में सलमान खान को राहत मिल गई है. (Photo: Viral Bhayani)

आर्म्स एक्ट के मामले में गलत हलफनामा देने के मामले में सलमान खान को राहत मिल गई है. (Photo: Viral Bhayani)

जोधपुर जिला और सत्र न्यायालय ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दी है. इस याचिका में आर्म्स एक्ट के मामले में गलत हलफनामा देने पर सलमान खान (Salman Khan) को सजा देने की मांग की गई थी. इससे पहले निचली अदालत ने भी सरकार की इस याचिका को खारिज कर दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 11, 2021, 8:54 PM IST
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जोधपुर. राजस्थान के जोधपुर जिला और सत्र न्यायालय ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आर्म्स एक्ट के मामले में गलत हलफनामा देने पर सलमान खान (Salman Khan) को सजा देने की मांग की गई थी. इससे पहले निचली अदालत ने भी सरकार की इस याचिका को खारिज कर दिया था. इससे सलमान खान को बड़ी राहत मिल गई है.

जोधपुर के कांकाणी वन क्षेत्र में काला हिरण शिकार केस (Blackbuck Hunting Case) में जब पुलिस अधिकारी सलमान खान के हथियारों की तलाश कर रहे थे, तब सलमान खान ने कोर्ट को एक शपथ पत्र देकर कहा था कि उनका हथियारों का लाईसेंस खो गया है. इतना ही नहीं तब सलमान ने मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन में हथियार के गुम होने की गुमसुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करवा दी थी, लेकिन जांच के दौरान सामने आया कि सलमान की पिस्टल खोई नहीं थी बल्कि उनके पिस्टल के लाईसेंस की अवधि पार हो गयी थी.

सलमान खान ने 18 साल बाद जोधपुर सेशन कोर्ट मे दो दिन पहले स्वीकार किया कि शपथ पत्र झूठ था, यह उनकी भूल थी. हथियार खोये नहीं थे. सलमान के वकीलों ने कोर्ट से माफी देने की गुजारिश की थी. गुरुवार को कोर्ट में आरोपी के वकीलों का तर्क स्वीकार कर राजस्थान सरकार की सलमान खान को झूठा शपथ पत्र देने पर दंडित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी.

सलमान खान के अधिवक्ता ने बताया कि शपथ पत्र देने के पीछे उनका कोई गलत मकसद नहीं था. भूलवश यह शपथ पत्र दिया गया था, जबकि आर्म्स एक्ट का लाइसेंस पुलिस कार्यालय में जमा था. अगर जानबूझकर शपथ पत्र दिया जाता तो उसका नुकसान उन्हीं के पक्ष को होता. साथ ही सलमान खान के वकीलों ने इस मामले में कई नजीरें पेश कीं.
गलती स्वीकार करने पर मिली है माफी 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों में किसी व्यक्ति द्वारा कोर्ट में विचाराधीन मामले में किसी प्रकार का लाभ नहीं लेने के उद्देश्य से गलती से बोले गए झूठ या गलत पेश किए गए साक्ष्य के बाद में स्वयं की गलती को स्वीकार कर लेने पर आरोपियों को दोषमुक्त किया गया है.
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