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सामाजिक मुद्दों पर बनी इन 12 फिल्मों के जरिए बॉलीवुड स्टार्स ने लोगों को दिया बड़ा संदेश

इस कड़ी में 'न्यूटन' और 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' फिल्मों का नाम भी शामिल है.
इस कड़ी में 'न्यूटन' और 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' फिल्मों का नाम भी शामिल है.

पिछले कुछ समय से समाज सुधार के लिए जागरुकता फैलाने वाली फिल्में खूब बनाई जा रही हैं और इसमें बॉलीवुड के बड़े सितारे भी हिस्सा ले रहे है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 25, 2021, 6:04 PM IST
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नई दिल्ली. एक समय था जब ज्यादातर हिंदी फिल्में महज पैसा कमाने को ध्यान में रखकर बनाई जा रही थी. उन्हें किसी फार्मूले की तलाश रहती थी, जो बॉक्स आफिस (BOX OFFICE ) पर किसी तरह क्लिक कर जाए और अच्छा पैसा कमा कर दे दे, लेकिन पिछले कुछ समय से समाज सुधार के लिए जागरुकता फैलाने वाली फिल्में खूब बनाई जा रही हैं और इसमें बॉलीवुड के बड़े सितारे भी हिस्सा ले रहे है. फिर चाहे वह थिएटर हो या ओटीटी प्लेटफॉर्म . कुछ फिल्में साथ में कमर्शियल एंटरटेनर भी हैं, इनके माध्यम से लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए सामाजिक मुद्दों को उठाया जा रहा है. देखिए ऐसी फिल्मों की लिस्ट, जो सामाजिक मुद्दों पर रोशनी डालने के साथ-साथ हल्की-फुल्की कॉमेडी से मनोरंजन भी करेगी.

अनपॉस्ड
ओटीटी पर रिलीज हुई 'अनपॉस्ड' पांच शॉर्ट फिल्मों को मिलाकर बनाई गई है. 'अनपॉस्ड' कोरोनावायरस की थीम पर आधारित है. जो सीखाती है कि जिंदगी मे हर परेशानी का हल निकाला जा सकता है, चाहे वह कोरोना जैसी महामारी ही क्यों ना हो. फिल्म को राज और डीके, निखिल आडवानी, तनिष्ठा चटर्जी, अविनाश अरुण और नित्या मेहरा ने डायरेक्ट किया है. अनपॉस्ड में आपको सुमित व्यास, ऋचा चड्ढा और अभिषेक बनर्जी जैसे स्टार्स देखने को मिलेंगे.

ब्लैक विडोज
ब्लैक विडोज में मोना सिंह, स्वस्तिका मुखर्जी और शमिता शेट्टी (SHAMITA SHETTY) की ज़बरदस्त एक्टिंग देखने को मिलेगी. फिल्म घरेलु हिंसा से बाहर आकर अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरू करने के लिए जागरुक कर रही है. ब्लैक विडोज एक फिनिश शो पर आधारित है जिसमें घरेलू हिंसा की शिकार यह तीनों महिलाएं कैसे अपनी ज़िन्दगी अपने अनुसार जीना शुरू कर देती हैं यह दिखाया गया है.



दुर्गामति
दुर्गामति एक बॉलीवुड हॉरर थ्रिलर-ड्रामा है, जो डायरेक्टर अशोक द्वारा, अभिनीत है. इस फिल्म में भूमि पेडनेकर मुख्य भूमिका में हैं, जो बता रही हैं कि कैसे सरकारी तंत्र मे फैले भ्रष्टाचार को कम किया जा सकता है. ये फिल्म तेलुगु तमिल फिल्म 'भागमती' की रीमेक फिल्म है. जिसमें एक महिला सरकारी अफसर इमानदारी की मिसाल बनती है और भ्रष्टाचारी नेता को सबके सामने लाती है.

शुभ मंगल सावधान
फिल्म आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर अभिनीत एक ऐसे जोड़े की कहानी है, जिन्हें पता लगता है कि लड़का इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ईडी) से पीड़ित है, जो एक आम बीमारी है. लेकिन अभी भी सोसाइटी में इसे टैबू माना जाता है, जिसे दूर करना बेहद जरूरी है.

न्यूटन
फिल्म न्यूटन समाज में बहुत ही प्रासंगिक संदेश छोड़ती है. मतदान हमारे देश का ज्वलंत मुद्दा रहा है. इस फिल्म में भी मतदान के दौरान होने वाली हेराफेरी को दिखाया गया है. राजकुमार राव ने हिेदी सिनेमा में अपनी एक्टिंग से एक अलग पहचान बनाई है. जब उन्हें फिल्म 'न्यूटन' में देखा गया तो फिल्म आलोचकों ने भी उनके अभिनय का लोहा माना. साथ ही वोटिंग जैसे मुद्दे पर बनाई फिल्म की काफी तारीफ हुई.

टॉयलेट एक प्रेमकथा
शौचालय पर आधारित इस फिल्म में स्वच्छ भारत अभियान की झलक साफ देखने को मिलती है. देश के कई हिस्सो में आज भी महिलाएं खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं क्योंकि सरकारी अधिकारियों, बाबुओं की गड़बड़ी के चलते शौचालय का निर्माण अधर में लटक जाता है. ऐसे में फिल्म के मुख्य अभिनेता अक्षय कुमार पर जब इस कुरीति की मार पड़ती है तो वह गांव में शौचालय बनवाने के लिए नये-नये तरीके अपनाते हैं। फिल्म खुलेतौर पर महिलाओं को ही नहीं बल्कि पुरुषों को भी ये नसीहत देती हैं कि वह खुले में शौच करने की से बचे ताकि हेल्थ अच्छी रह सके.

सुई-धागा
फिल्म 'सुई-धागा' 'मेक इन इडिया' अभियान को दर्शाती है. फिल्म के जरिए लोगों तक मेक इन इंडिया के संदेश को पहुंचाने की कोशिश की गई. फिल्म में अभिनेता वरुण धवन पत्नी अनुष्का शर्मा संग दिन-रात मेहनत कर खुद का बनाया हुआ उत्पाद बाजार में लाते है. शरत कटारिया निर्देशित फिल्म में मेड इन चाइना उत्पादों पर करारा तंज कसने की भी कोशिश की गई है.

पैडमैन
फिल्म पैडमैन बहुत ही संवेदनशील विषय पर बनी फिल्म है.फिल्म अरुणाचलम मुरुगुनांथम नामक व्यक्ति की असल कहानी पर आधारित है. निर्देशन आर बाल्की की फिल्म में अक्षय कुमार ने इस व्यक्ति का किरदार बखूबी निभाया है, जो गांव-कस्बे की लड़कियों और महिलाओं के लिए सस्ते सेनेटरी नैपकिन तैयार कर उन्हें इसके इस्तेमाल और फायदे बताने की कोशिश करता है. साथ ही इसके ना इस्तेमाल करने से होने वाले नुकसान भी इस फिल्म में बताए गए.

माय ब्रदर निखिल
2005 में रिलीज हुई इस फ़िल्म के डायरेक्टर ओनिर ने इस फ़िल्म ने होमोसेक्शुऐलिटी और HIV/AIDS जैसे टॉपिक को बेहद खूबसूरती से दिखाया. हिंदी इंडस्ट्री के दर्शकों के लिए ये पहली बार था जब इन दोनों विषयों को इस अंदाज में पर्दे पर लाया गया. कैसे एक लड़के को HIV पॉजिटिव पाए जाने पर है, घर से निकाल दिया जाता है.  उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है. लोगों की सोच में बदलाव लाने के लिए फिल्म में संजय सूरी, जूही चावला और पूरब कोहली के जरीए अच्छी कोशिश की गई.

क्या कहना
टीन प्रेगनेंसी एक ऐसा विषय है जो आज भी समाज में एक टैबू है. लेकिन फिल्म क्या कहना ने एक टीनएजर के रोमांस प्यार मानसिक स्थिति और सामाजिक शर्म को खुलकर दिखाया था. पहली बार इस विषय पर किसी ने समाज का ये आईना दिखाने की कोशिश की थी. फिल्म के निर्देशक कुंदन चाहत है और मुख्य भूमिका में प्रीति जिंटा और सैफ अली खान थे.

मातृभूमि
2003 में आई मातृभूमि फिल्म ऐसे समाज की कल्पना थी जहां औरतों की संख्या कम होते होते ना के बराबर बची थी. ऐसे में आदमियों को शादी और परिवार के लिए लड़कियां नहीं मिल रही थी. जिससे बढ़ते अपराधों को इस फिल्म में दिखाए गया है. मनीष झा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में लड़कियों को भ्रूण में ही मार देने की वजह से पैदा हुई ये स्थिति रोंगटे खड़े करने वाली है

फिलहाल
आज की तारीख में बच्चे को जन्म देने के लिए सरोगेसी आम तरीका है, लेकिन साल 2002 में जब मेघना गुलजार की फिल्म फिलहाल रिलीज हुई थी, तब यह बड़ी बात हुआ करती थी. ये कहानी एक ऐसी औरत की है जो प्राकृतिक रूप से मां नहीं बन सकती, इसलिए वह अपने दोस्त को अपने लिए सरोगेट करने के लिए मनाती है. तब्बू, सुष्मिता सेन, पलाश सेन और संजय सूरी की यह फिल्म एक इमोशनल और खुशनुमा व्यूइंग एक्सपीरियंस है.
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