कितना खोखला हो चुका है बॉलीवुड, नकल के सहारे 10 सालों से चल रही है इंडस्ट्री

फिल्म से लेकर संगीत तक के लिए बॉलीवुड नकल पर निर्भर होने लगा है. यही स्थिति रही तो जल्द ही दूसरी फिल्म इंडस्ट्री भारत की मुख्य धारा में आ जाएंगी.

News18Hindi
Updated: July 27, 2019, 9:16 PM IST
कितना खोखला हो चुका है बॉलीवुड, नकल के सहारे 10 सालों से चल रही है इंडस्ट्री
बॉलीवुड की इन दिनों ज्यादातर सफल फिल्में कहीं ना कहीं से नकल की गई हैं.
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Updated: July 27, 2019, 9:16 PM IST
दक्षिण भारतीय फिल्म अर्जुन रेड्डी की हिन्दी रीमेक कबीर सिंह साल 2019 की सबसे सफल बॉलीवुड फिल्म है. लेकिन थोड़ा गौर से नजर डाले तो बीते 10 सालों में हिन्दी सिनेमा में एक बदलावा आया है. यह बदलाव है रीमेक का. कहानियों के रीमेक का, दृश्यों के रीमेक का, गानों और उनकी धुनों के रीमेक का. बीते पांच सालों से ऐसी स्थिति उपजी है, जिनमें बॉलीवुड ने मौलिकता खो दिया है. इस वक्त बॉलीवुड का पूरा ध्यान नकल करने में लगा है.

एक झलक देखिए, वांटेड, गजनी, दृश्यम, सिंघम, सिम्बा, ओके जानू, फोर्स, बॉडीगार्ड, भूल भुलैया, गरम मसाला, सन ऑफ सरदार, किक, मैं तेरा हीरो, तेवर, हे बेबी, पार्टनर, द ट्रेन, यू मी और हम, एक अजनबी, नो एंट्री, हाउसफुल, कबीर सिंह जैसी बॉलीवुड में बेहद सफल फिल्में नकल की गई हैं.

बॉलीवुड के गानों को देखिए, साकी (बाटला हाउस), छम्मा- छम्मा (फ्रॉड सैंया), कोका कोला (लुका छिपी), आंख मारे (सिंबा), बॉम डिगी डिगी (सोनू के टीटू की स्वीटी), उर्वशी (यो यो हनी सिंह), चीज बड़ी (मशीन), काला चश्मा (बार बार देखो), हाई रेटिड गबरू (नवाबजादे), लैला (रईस), छोटे- छोटे पेग (सोनू के टीटू की स्वीटी), मैं तेरा ब्वॉयफ्रेंड (राबता), द हम्मा सॉन्ग (ओके जानू), तम्मा तम्मा (बद्रीनाथ की दुल्हनिया), पटोला (ब्लैकमेल), पोस्टर लगवा दो (लुका छिपी), मैंने तुझको देखा (गोलमाल अगेन), बन जा रानी (तुम्हारी सुलु) जैसे गाने रीमेक हैं.

आइए जानते हैं कैसे कभी तुच्छ माना जाने वाला रीमेक इन दिनों मुख्य धारा के सिनेमा की सबसे सफल विधा बन गई है.



बॉलीवुड की पहली 100 करोड़ी क्लब फिल्म थी रीमेक
किसी बॉलीवुड फिल्म के 100 करोड़ रुपये कमा लेना हिन्दी सिनेमा के इतिहास के करीब 90 साल बीतने के बाद संभव नहीं हो पाया था. तभी बॉलीवुड के शातिर माने जाने वाले अभिनेता आमिर खान की नजर साल 2005 की तमिल फिल्म 'गजनी' पर पड़ी. उन्होंने इसके निर्देशक एआर मुरुगदास से बात की. क्लाइमेक्स में थोड़े बदलाव के लिए खुद लिखा और इसे लेकर मैदान में उतरे. फिल्म ने इतिहास रच दिया. इसे बॉलीवुड की पहली 100 करोड़ी क्लब में शामिल होने वाली फिल्म माना जाता है. हालांकि तमिल फिल्म भी हॉलीवुड फिल्म 'मोमेंटो' से प्रेरित थी.
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डूब चुके सलमान खान को नंबर वन बनाया रीमेक ने
इस वक्त सलमान खान फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सफलतम अभिनेता हैं. बीते कई सालों से उनकी फिल्मों का व्यापार सातवें आसमान पर है. लेकिन 21वीं सदी के शुरुआती सालों में ही सलमान खान का करियर डमगमाने लगा था. उन्हें लगातार मल्टीस्टार फिल्में ऑफर होने लगी थीं. इस दौर में उन्होंने 'नो एंट्री', 'पार्टनर' में ही सफलता का मुंह देखा अन्यथा ज्यादातर फिल्में फ्लॉप रहीं. लेकिन साल 2008 में युवराज के बुरी तरह से फ्लॉफ होने के बाद से यह स्कोप खत्म माना जाने लगा था.

salman khan

तभी उनकी जिंदगी में प्रभुदेवा तेलगु एक्‍शन फिल्म पोकिरी की हिन्दी रीमेक लेकर आए. इस फिल्म ने सलमान खान के लिए नया आकाश खोल दिया. इसके बाद सलमान ने रेडी, बॉडीगार्ड, किक जैसी साउथ फिल्मों की हिन्दी रीमेक में काम किया. एक दौर ऐसा आया था सलमान ने अपना सबकुछ लगातार मौलिक फिल्म 'वीर' बनाई थी, लेकिन यह भी बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी थी. इसके बाद से उन्होंने मौलिक फिल्मों से ध्यान हटाया और रीमेक के हीरो बन गए.

अजय देवगन के करियर को रीमेक का सहारा
अजय देवगन अपनी पहली पारी खेल चुके थे. उन्होंने कंपनी, गंगाजल और वंस अपान टाइम ऑफ मुंबई अपने अभिनय का सर्वोच्च देकर कॉमेडी का रुख कर लिया था. उनकी दूसरी पारी मल्टीस्टारर फिल्में बचीं थी. क्योंकि एक समय के बाद वे रोमांटिक हीरो के फ्रेम में नहीं बैठ पा रहे थे. एक्‍शन में उनको कोई ऐसी कहानी नहीं मिल रही थी, जो स्‍थापित करती. उस दौर में उनके जिंदगी में साल 2011 में तमिल फिल्म 'सिंघम' के रीमेक लेकर आए और बॉलीवुड के सिंघम बन गए. इसके बाद मलयालम फिल्म दृश्यम की हिन्दी रीमेक ने अजय देवगन के लिए एक और अध्याय लिख दिया. उनकी हालिया सफल फिल्म 'दे देना दन' भी एक द‌क्षिण भारतीय फिल्म की रीमेक है.



कब से शुरू हुआ रीमेक का दौर
शुरआती दौर में रीमेक का रूप दूसरे तरह का था. पहले भी दक्षिण भारतीय फिल्मों के रीमेक बने. लेकिन उनकी तुलना में मौलिक फिल्में इतनी अधिक बनी कि रीमेक इनमें छिपी रहीं. अन्यथा साल 1967 में आई 'राम और श्याम' तेलुगु फिल्म रमुडू बीमडू (1964) की हिंदी रीमेक थी. इसमें दिलीप कुमार ने काम किया था. इसके अलावा दक्षिण भारतीय निर्देशक एस शंकर ने अपनी ज्यादातर फिल्मों को तलिम-तेलगू के साथ हिन्दी में बनाया. इनमें अपरिचित, आई, रोबोट, हिन्दुस्तानी जैसी फिल्में हैं. कमल हसन हिन्दी भी बोल बाते हैं, इसलिए निर्देशकों ने उनके साथ सदमा, चाची 420 जैसी फिल्‍में रीमेक कीं. इसी तरह नायक, विरासत जैसी फिल्में भी हिन्दी में रीमेक की गई थीं. लेकिन इनपर निर्भरता नहीं थी.



आने वाली रीमेक फिल्मों पर एक नजर
अब बॉलीवुड के जानीमानी हस्तियां अपने बेटे-बेट‌ियों के रीमेक के लिए अच्छे रीमक ढूंढ़ रहे हैं. आने वाले दिनों में सुनील शेट्टी के बेटे अहान तेलुगू फिल्म 'आर.एक्स 100' के रीमेक से डेब्यू करेंगे. जबकि अक्षय कुमार 'लक्ष्मी बम' भी तमिल फिल्म 'मुनी 2: कांचणा' की हिन्दी रीमेक होगी.
First published: July 27, 2019, 9:04 PM IST
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