जब पाकिस्तान में चिल्लाए थे धर्मेन्द्र -कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊंगा!

सोचिए कि कैसा वो माहौल कैसा रहा होगा जब पाकिस्तानियों के सामने धर्मेन्द्र चिल्ला रहे होंगे 'कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊंगा', या फिर 'तुम अगर एक मारोगे तो हम चार मारेंगे

News18Hindi
Updated: December 8, 2018, 8:24 AM IST
जब पाकिस्तान में चिल्लाए थे धर्मेन्द्र -कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊंगा!
फिल्म 'शोले' में अभिनेता धर्मेन्द्र
News18Hindi
Updated: December 8, 2018, 8:24 AM IST
अभिनेता धर्मेन्द्र सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी अपना गुस्सा दिखा चुके हैं. अब ऐसे में सोचिए कि कैसा वो माहौल कैसा रहा होगा जब पाकिस्तानियों के सामने धर्मेन्द्र चिल्ला रहे होंगे 'कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊंगा', या फिर 'तुम अगर एक मारोगे तो हम चार मारेंगे, चौंक गए न? दरअसल हम बात कर रहे हैं धर्मेन्द्र और अमिताभ बच्चन की सिनेमा की सबसे दमदार फिल्म 'शोले' की. जो कि भारत में अपनी रिलीज के 40 साल के बाद साल 2015 में पाकिस्तान में रिलीज हुई थी.

धर्मेन्द्र और अमिताभ के अलावा गब्बर के किरदार में अमज़द खान ने भी पाकिस्तान में अपना टेरर कायम कर दिया और 40 साल बाद वहां भी ये डायलॉग फेमस हुआ कि 'सो जा बेटा वरना गब्बर आ जाएगा'. भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्म 'शोले' ने भारत में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की, मुंबई के मिनर्वा टॉकीज में फिल्म ने लगातार पांच साल चलकर कीर्तिमान स्थापित कर दिया था.

जब राजनीति से परेशान होकर धर्मेंद्र ने कहा- अभिनेताओं को राजनीति से दूर ही रहना चाहिए!

ऐसे में जब पाकिस्तान में फिल्म रिलीज की खबर सामने आई तो वहां मौजूद धर्मेन्द्र और अमिताभ के फैन की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. हालांकि इस फिल्म को रिलीज होने में काफी टाइम भी लग गया, लेकिन साल 1975 में रिलीज हुई ये फिल्म अपने 40 साल पूरे करने के बाद पाकिस्तान में भी धूम मचाने पहुंच गई थी.



अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र स्टारर ये फिल्म पाकिस्तान में 17 अप्रैल 2015 को शुक्रवार के दिन रिलीज की गई थी. पूरी तामझाम के साथ कराची के एक मल्टीप्लेक्स में फिल्म को रिलीज किया गया. इस दौरान कई बड़ी हस्तियां वहां मौजूद थी.

फिल्म को जियो फिल्म्स और मांडवीवल्ला एंटरटेनमेंट ने रिलीज किया था. जिसके बाद फिल्म समीक्षक उमैर अल्वी का कहना था कि पाकिस्तान में 'शोले' के प्रशंसकों की कमी नहीं है. उन्होंने बताया कि प्रशंसकों में वह पीढ़ी भी शामिल है जो उस दौर में वीसीआर पर हिंदी सिनेमा देख-देख कर बड़ी हुई है, जब पाकिस्तान में भारतीय सिनेमा का प्रसारण गैरकानूनी हुआ करता था.
Loading...

सड़क से कपड़े खरीदती हैं काजोल, बचे हुए पैसों का करती हैं ये काम
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर