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जब बापू ने देखी अपनी जिंदगी की पहली और आखिरी फिल्म, दिया ये रिएक्शन

राम राज्य फिल्म का एक दृश्य.
राम राज्य फिल्म का एक दृश्य.

अपने जीवन में महात्मा गांधी ने जो एकमात्र फिल्म देखी वो थी 'राम राज्य' (1943). गांधी भारत में राम राज्य की बातें किया करते थे और उनसे प्रभावित होकर ही निर्देशक विजय भट्ट ने ये फिल्म बनाई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2018, 4:38 PM IST
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 2 अक्टूबर को जयंती है. वैसे तो महात्मा गांधी के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर कई फिल्में बन चुकी हैं, जिन्हें हर उम्र के लोगों ने पसंद भी किया है. फिर चाहे वो संजय दत्त की 'लगे रहो मुन्नाभाई' या फिल्म 'गांधी'. ये फिल्में सिल्वर स्क्रीन पर छाई रहीं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि महात्मा गांधी खुद फिल्मों के बड़े फैन नहीं थे. उन्होंने अपनी जिंदगी में सिर्फ एक फिल्म देखी, जो उनकी आखिरी फिल्म भी थी.

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जिस समय भारत में पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' का प्रीमियर हो रहा था, उस समय मोहनदास करमचंद गांधी वतन से दूर दक्षिण अफ्रीका में अपने अंतिम राजनीतिक फैसले ले रहे थे. वो भारत आने की तैयारी में थे. ये संयोग ही था कि गांधी की वतन वापसी और भारत में फ़िल्म इंडस्ट्री का उदय लगभग एक ही समय पर हुआ.



फिल्मों ने भले ही गांधी से बहुत कुछ लिया हो, लेकिन गांधी को फिल्मों से ज्यादा लगाव नहीं था. कई फिल्मकारों ने महात्मा गांधी को फिल्मों की ताकत और समाज पर होने वाले इसके सकारात्मक प्रभाव के बारे में समझाने की कोशिश की, लेकिन गांधी फिल्मों के प्रति उदासीन रहें.

अपने जीवन में गांधी ने जो एकमात्र फिल्म देखी वो थी 'राम राज्य' (1943). गांधी भारत में राम राज्य की बातें किया करते थे और उनसे प्रभावित होकर ही निर्देशक विजय भट्ट ने ये फिल्म बनाई. फिल्म में राम-रावण के युद्ध के बाद की कहानी है. इस फिल्म की कहानी मुख्य किरदार राम (प्रेम अदीब) और सीता (शोभना समर्थ) के जीवन और उनके द्वारा समाज के निर्माण के इर्द-गिर्द घूमती है.

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'राम राज्य' फिल्म को साल 1944 में खास महात्मा गांधी को दिखाने के लिए चुना गया. कई निर्माताओं को उम्मीद थी कि इस फिल्म के बाद उनका फिल्मों के प्रति नजरिया बदलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. गांधी इस फिल्म को बीच में ही छोड़कर चले गए. इसके बाद उन्होंने कभी कोई फिल्म नहीं देखी.

ये पूरी फिल्म Youtube पर शेमारू द्वारा उपलब्ध करवाई गई है. आप इसे नीचे क्लिक कर देख सकते हैं.



जाने-माने पत्रकार और लेखक रशीद किदवई अपनी किताब में लिखते हैं कि जब 1927 में भारतीय सिनेमा के 25 साल पूरे होने के अवसर पर महात्मा गांधी से उनकी शुभकामना संदेश के लिए पत्र भेजा गया, तो महात्मा गांधी जी के सचिव महादेव देसाई ने लिखित जवाब दिया कि महात्मा गांधी को फिल्मों में रुचि नहीं है. उनसे इस मामले में कोई राय नहीं मांगी जानी चाहिए.
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