ये है देश के सिनेमा का गणित, सिनेमाघर बंद होने से होता है कितना नुकसान

सिनेमा हॉल (फोटो क्रेडिट-AFP)
सिनेमा हॉल (फोटो क्रेडिट-AFP)

दक्षिण भारत की 22 फीसदी आबादी सिनेमाघरों में जाकर फिल्म देखती है, इसलिए सिनेमाघरों में फिल्म देखने वाले 44 फीसदी लोग इन्हीं राज्यों से आते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 12:24 AM IST
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मुंबई. देश भर में 15 अक्तूबर से फिल्म थियेटर और मल्टीप्लेक्स आधी क्षमता के साथ खुल जाएंगे. मगर कोरोना संक्रमण के मौजूदा हालात को देखते हुए उम्मीद कम है कि थियेटरों को खास दर्शक मिलें, ऐसे में जानना दिलचस्प होगा कि कोरोनाकाल से पहले देश में कितने लोग थियेटर जाकर फिल्में देखते रहे हैं. इसका खुलासा किया है मीडिया कंसल्टिंग फर्म ऑरमैक्स मीडिया ने अपनी रिपोर्ट साइजिंग सिनेमा में.

जनवरी से मार्च 2020 के दौरान 5600 लोगों पर किए गए इस सर्वे से पता चला है कि साल 2019 में देश की करीब 10 फीसदी यानी 14.6 करोड़ आबादी कम से कम एक बार फिल्म देखने थियेटर पहुंची, जिनका फुटफॉल सौ करोड़ से अधिक आंका गया है. यानी एक व्यक्ति साल में 7.1 फिल्म देखने पहुंचा.

दक्षिण भारत की 22 फीसदी आबादी सिनेमाघरों में जाकर फिल्म देखती है, इसलिए सिनेमाघरों में फिल्म देखने वाले 44 फीसदी लोग इन्हीं राज्यों से आते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में थियेटर गए लोगों में 58 फीसदी लोग शहरी क्षेत्र के रहे, जबकि देश की कुल आबादी में 69 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के दर्शक 42 प्रतिशत ही रहे. फिल्म देखने गए लोगों में सर्वाधिक 52 फीसदी युवा रहे, जिनकी औसत आयु 27.5 वर्ष रही.



भाषा के आधार पर बीते साल थियेटर में सर्वाधिक 51 फीसदी फिल्में हिन्दी भाषी देखी गईं, दूसरे पायदान पर 21 फीसदी के साथ तेलुगु और 19 प्रतिशत हिस्सेदारी तमिल फिल्मों की रही हैं. हॉलीवुड में डब वर्जन के दर्शक 15 प्रतिशत हैं.
रिपोर्ट के आधार पर ऑरमैक्स के सीईओ शैलेश कपूर कहते हैं कि इतनी बड़ी आबादी में महज 14.6 लोगों का थियेटर जाना उत्साहजनक नतीजा नहीं है. बहुभाषी देश में भारतीय थियेटर और मल्टीप्लेक्स इससे कहीं अधिक डिजर्व करते हैं. ऐसे में मेकर्स को अपने कंटेंट और प्रेजेंटेशन में सुधार कर इस फुटफॉल को बढ़ाकर सिनेमा उद्योग को आगे ले जाना चाहिए.
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