न्यायालय ने सुशांत राजपूत की ‘अस्वाभाविक मृत्यु’ की सीबीआई जांच कराने को सही ठहराया

न्यायालय ने सुशांत राजपूत की ‘अस्वाभाविक मृत्यु’ की सीबीआई जांच कराने को सही ठहराया
सुशांत सिंह राजपूत

शीर्ष अदालत ने सीबीआई की जांच को विधिसम्मत बताते हुये कहा कि एक निष्पक्ष, सक्षम और स्वतंत्र जांच ‘‘समय की मांग’’ है.

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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को ‘प्रतिभाशाली’ अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की ‘अस्वाभाविक मृत्यु’ के सिलसिले में अभिनेत्री रिया चक्रवती के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में चल रही सीबीआई जांच को ‘मंजूरी देते’ हुये कहा कि इस मामले में दर्ज किसी भी अन्य प्रकरण की जांच भी यही एजेन्सी करेगी.

शीर्ष अदालत ने सीबीआई की जांच को विधिसम्मत बताते हुये कहा कि एक निष्पक्ष, सक्षम और स्वतंत्र जांच ‘‘समय की मांग’’ है. न्यायालय ने यह भी कहा कि बिहार सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सहमति देने में सक्षम थी.

सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जांच को लेकर उसके पक्ष और विरोध में चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर विराम लगाते हुये न्यायालय ने कहा कि इस अभिनेता के पिता की शिकायत पर रिया चक्रवती और छह अन्य के खिलाफ शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करके पटना पुलिस ने कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया है. राजपूत के पिता ने इन सभी पर अपने 34 साल के बेटे को आत्महत्या के लिये बाध्य करने का आरोप लगाया है.



राजपूत की मौत का रहस्य सुलझाने के लिये लगातार सीबीआई से जांच कराने की मांग हो रही थी. राजपूत 14 जून को मुंबई के उपनगर बांद्रा में अपने अपार्टमेन्ट में छत से लटके मिले थे और तभी से मुंबई पुलिस विभिन्न पहलुओं से इस मामले की जांच कर रही है.
न्यायमूर्ति ऋषिकेष रॉय की एकल पीठ ने अपने 35 पेज के फैसले में कहा कि बिहार और महाराष्ट्र दोनों ही एक दूसरे पर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगा रहे हैं, ऐसी स्थिति में जांच की वैधता ही सवालों में घिर गयी है. इसलिए ऐसी स्थिति में यह आशंका है कि सत्य इसका शिकार बन रहा है और न्यााय पीड़ित हो रहा है.

न्यायालय ने रिया चक्रवती की याचिका पर यह फैसला सुनाया. रिया ने पटना में उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी मुंबई स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था.

संविधान के अनुच्छेद 142 में प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल करते हुये न्यायमूर्ति रॉय ने अपने फैसले में कहा, ‘‘सीबीआई की चल रही जांच को मंजूरी देते हुये,अगर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत और उससे जुड़ी परिस्थितियों को लेकर कोई अन्य मामला दर्ज होता है तो सीबीआई को निर्देश दिया जाता है कि वह नये मामले की भी जांच करे. ’’

न्यायालय ने कहा कि मुंबई पुलिस द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 174, जो अस्वाभाविक मौत के कारण का पता लगाने की जांच के बारे में है, के तहत की गयी जांच सीमित मकसद के लिये है लेकिन यह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 157 के तहत अपराध की जांच नहीं है.

न्यायालय ने कहा, ’’अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मुंबई की फिल्मी दुनिया में एक प्रतिभाशाली अभिनेता थे और पूरी क्षमताओं का प्रदर्शन होने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गयी. उनका परिवार, मित्र और प्रशंसक जांच के नतीजों का बेसब्री से इतजार कर रहे हैं ताकि इस मामले में लगाई जा रही तमाम अटकलों पर विराम लग सके.’’

न्यायालय ने चक्रवर्ती की याचिका पर 11 अगस्त को सुनवाई पूरी की थी. इस दौरान न्यायालय ने रिया चक्रवर्ती के साथ ही महाराष्ट्र और बिहार सरकार, केन्द्र सरकार और राजपूत के पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलों को सुना था.

इस मामले की सुनवाई के दौरान केन्द्र ने न्यायालय को सूचित किया था कि उसने पटना के राजीव नगर थाने में राजपूत के पिता द्वारा दर्ज कराये गये मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की बिहार सरकार की सिफारिश स्वीकार कर ली है और इस संबंध में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने आवश्यक अधिसूचना जारी कर दी है.

बिहार सरकार ने इस मामले में शीर्ष अदालत से कहा था कि ‘राजनीतिक प्रभाव’ की वजह से मुंबई पुलिस ने अभिनेता राजपूत के मामले में प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की है.

दूसरी ओर, महाराष्ट्र सरकार की दलील थी कि इस मामले में बिहार सरकार को किसी प्रकार का अधिकार नहीं है.

रिया चक्रवर्ती के वकील का कहना था कि मुंबई पुलिस की जांच इस मामले में काफी आगे बढ़ चुकी है और उसने 56 व्यक्तियों के बयान दर्ज किये हैं. उनका कहना था कि राजपूत के पिता द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी का पटना में किसी अपराध से कोई संबंध नहीं है और इसे दर्ज कराने में 38 दिन का विलंब हुआ है.

राजपूत के पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह का कहना था कि उनका महाराष्ट्र पुलिस में भरोसा नहीं है.

बिहार सरकार का दावा था कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु को लेकर पटना में दर्ज करायी गयी प्राथमिकी विधि सम्मत और वैध है.

राज्य सरकार ने यह भी दावा किया था कि मुंबई पुलिस ने उसे न तो सुशांत सिंह राजपूत की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध करायी और न ही उसने अभी तक इस मामले में कोई प्राथमिकी ही दर्ज की है.

केन्द्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि इस मामले में सिर्फ एक प्राथमिकी दर्ज हुयी है जो पटना में करायी गयी है और इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू कर दी है.
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