...जब राज कपूर ने पूछा था कितना बड़ा है तुम्हारा बंगला? धर्मेंद्र ने कहा- 50 खाटें तो बिछ ही जाएंगी!

...जब राज कपूर ने पूछा था कितना बड़ा है तुम्हारा बंगला? धर्मेंद्र ने कहा- 50 खाटें तो बिछ ही जाएंगी!
कई दशक तक बॉलीवुड पर राज करने वाले धर्मेंद्र ने एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्में दीं, लेकिन उन्हें भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड आखिर अब तक को क्यों नहीं मिला?

कई दशक तक बॉलीवुड पर राज करने वाले धर्मेंद्र ने एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्में दीं, लेकिन उन्हें भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड आखिर अब तक को क्यों नहीं मिला?

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नई दिल्ली। बॉलीवुड के ही मैन धर्मेंद्र का आज 81वां जन्मदिन है। कई दशक तक बॉलीवुड पर राज करने वाले धर्मेंद्र ने एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्में दीं, लेकिन उन्हें भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड आखिर अब तक को क्यों नहीं मिला? धर्मेंद्र के जन्मदिन के मौके पर न्यूज 18 इंडिया डॉट कॉम ने मशहूर फिल्म समीक्षक जयप्रकाश चौकसे से खास बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश।

जयप्रकाश चौकसे ने बताया कि धर्मेंद्र उन अभिनेताओं में से हैं, जो इतना स्टारडम मिलने के बावजूद भी मिट्टी से जुड़े हुए हैं। पंजाब के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले धर्मेंद्र बॉलीवुड में कई दशक बिताने के बाद भी अपनी गांव को नहीं भूले। वो इकलौते ऐसे अभिनेता हैं जो शुरुआत से लेकर आजतक वैसे ही हैं, जैसे स्टार बनने से पहले थे।

धर्मेंद्र के बारे में एक घटना का जिक्र करते हुए चौकसे ने बताया कि धर्मेंद्र इतने सीधे हैं कि एक बार जब उन्होंने अपना बंगला खरीदा था तो सभी फिल्मी हस्तियों को घर पर बुलाया। शो मैन राजकपूर ने जब धर्मेंद्र से पूछा कि आपका बंगला कितना बड़ा है, तो उन्होंने बड़े भोलेपन से कहा कि साहब 50 खाटें तो बिछ ही जाएंगी, इस पर राजकपूर हंस पड़े।



इतने बड़े स्टार होने के बाद धर्मेंद्र को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड नहीं मिलने पर चौकसे ने बताया कि धर्मेंद्र को वैसे तो ये अवॉर्ड बहुत पहले ही मिल जाना चाहिए था, लेकिन दिक्कत ये है कि ये सब अवॉर्ड पाने के लिए लॉबिंग करनी पड़ती है और धर्मेंद्र ठहरे सीधे -सादे इंसान, उनको ये सब राजनीति नहीं आती।
चौकसे ने बताया कि धर्मेंद्र ऐसे इंसान हैं जो अपना ज्यादा प्रचार भी नहीं करते हैं। वो सीधी-सादी जिंदगी जीते हैं और लोगों के साथ भी सामान्य व्यवहार करते हैं, उनके लिए कोई बड़ा नहीं है, कोई छोटा नहीं है। शायद इसीलिए आज तक उन्हें दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड नहीं मिला।
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