दिलीप कुमार, राज कपूर के घर राष्ट्रीय धरोहर घोषित; खरीदने को 2.35 करोड़ रुपए मंजूर

दिलीप कुमार और राज कपूर. (Photo: Twitter)

दिलीप कुमार और राज कपूर. (Photo: Twitter)

खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने शहर के बीचोंबीच स्थित बॉलीवुड अभिनेताओं दिलीप कुमार (Dilip Kumar) तथा राज कपूर (Raj Kapoor) के पैतृक घरों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर दिया. सरकार ने दोनों अभिनेताओं के पैतृक घरों की खरीद के लिए 2.35 करोड़ रुपए जारी किए जाने की मंजूरी दे दी.

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पेशावर. पाकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने शहर के बीचोंबीच स्थित बॉलीवुड अभिनेताओं दिलीप कुमार (Dilip Kumar) तथा राज कपूर (Raj Kapoor) के पैतृक घरों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर दिया. प्रांतीय सरकार ने शनिवार को दोनों अभिनेताओं के पैतृक घरों की खरीद के लिए 2.35 करोड़ रुपए जारी किए जाने की मंजूरी दे दी.

खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री महमूद खान ने औपचारिक रूप से प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए संबंधित अधिकारियों को इन पैतृक हवेलियों को खरीदने की मंजूरी दे दी. इन हवेलियों को उस दर पर खरीदने की अनुमति दी गई है जो खैबर पख्तूनख्वा के संचार और निर्माण विभाग ने कुछ सप्ताह पहले तय की थी.

पेशावर के उपायुक्त मुहम्मद अली असगर ने विभाग की एक रिपोर्ट के बाद दिलीप कुमार के 101 वर्ग मीटर के घर की कीमत 80.56 लाख रुपए, वहीं राज कपूर के 151.75 वर्ग मीटर के बंगले की कीमत 1.50 करोड़ रुपए तय की गई है. खरीदने के बाद दोनों हवेलियों को खैबर पख्तूनख्वा का पुरातत्व विभाग संग्रहालय में तब्दील करेगा.

पुरातत्व विभाग ने दोनों ऐतिहासिक इमारतों को खरीदने के लिए 2 करोड़ रुपए से अधिक की मंजूरी के लिए प्रांतीय सरकार से औपचारिक रूप से रिक्वेस्ट की थी, जहां भारतीय सिनेमा के दो महानायक पैदा हुए थे और भारत के बंटवारे से पहले यहां अपने शुरुआती दिन यहां बिताए थे.
राज कपूर का पैतृक घर, जिसे कपूर हवेली के नाम से जाना जाता है, क़िस्सा ख्वानी बाज़ार में स्थित है. इसका निर्माण 1918 और 1922 के बीच दिग्गज अभिनेता के दादा बाष्नेश्वरनाथ कपूर द्वारा किया गया था. राज कपूर और उनके चाचा त्रिलोक कपूर इमारत में पैदा हुए थे. प्रांतीय सरकार द्वारा इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया गया है. दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का 100 साल पुराना पुश्तैनी घर भी उसी इलाके में स्थित है.

यह घर जर्जर है और 2014 में तत्कालीन नवाज शरीफ सरकार द्वारा राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया गया था. दोनों भवनों के मालिकों ने अपने प्रमुख स्थान को ध्यान में रखते हुए वाणिज्यिक प्लाजा के निर्माण के लिए उन्हें ध्वस्त करने के लिए अतीत में कई प्रयास किए. भवन मालिकों के ऐसे सभी कदम रोक दिए गए क्योंकि पुरातत्व विभाग उनके ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए उन्हें संरक्षित करना चाहता था.

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