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गुल मकई के बाद मक्का की मस्जिद अल हराम पर आतंकी हमले पर फिल्म की तैयारी: अमजद खान

भाषा
Updated: December 1, 2019, 4:01 PM IST
गुल मकई के बाद मक्का की मस्जिद अल हराम पर आतंकी हमले पर फिल्म की तैयारी: अमजद खान
निर्देशक अमजद खान ने अपनी फिल्‍मों पर की बात.

फिल्म निर्देशक एच ई अमजद खान (H E Amjad Khan) ने कहा, 'मेरा मानना है कि आतंक (Terrorism) की शुरुआत मक्का से हुई थी, जब वर्ष 1979 में उसके मस्जिद अल हराम पर आतंकी हमला हुआ था.'

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नई दिल्ली: नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई (Malala Yousafzai) के जीवन पर आधारित फिल्म ‘गुल मकई’ (Gul Makai) नए साल के आखिरी सप्ताह में रिलीज होने के बाद फिल्म के निर्देशक की अगली फिल्म ‘द ब्लैक डे’ (The Black Day) की शूटिंग शुरू करने की योजना है जो मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर आतंकी हमले पर आधारित है.

फिल्म निर्देशक एच ई अमजद खान ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘मेरा मानना है कि आतंक की शुरुआत मक्का से हुई थी जब वर्ष 1979 में उसके मस्जिद अल हराम पर आतंकी हमला हुआ था और मस्जिद को कब्जे में लेने के बाद वहां गये करीब 10,000 जायरीन को मस्जिद के भीतर ही बंद कर दिया गया.’’

उन्होंने बताया कि बाद में सऊदी सेना ने अन्य देशों की सेनाओं की मदद से दो हफ्तों के खूनी संघर्ष के बाद मस्जिद को आतंकियों के कब्जे से मुक्त कराया तथा जिहादियों की अगुवाई करने वाले जुहेमन अल ओतयबी और उनके साले तथाकथित आखिरी पैंगबर (मेहदी) मुहम्मद अब्दुल्ला उल कहतानी को मार गिराया. अमजद खान का मानना है कि इस वारदात से अंतत: अलकायदा की बुनियाद पड़ी.

दिसंबर अंत में रिलीज होने जा रही फिल्म ‘गुल मकई’ भी महिला अधिकार विशेषकर उनके शिक्षा के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली यूसुफजई के जीवन पर आधारित है जिनका पालन पोषण, पश्चिमोत्तर पाकिस्तान के स्वात घाटी में हुआ था जो उनकी कर्मभूमि थी. मलाला को वर्ष 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था.

निर्देशक ने कहा कि वर्ष 2009 में स्वात घाटी को तालिबान के लड़ाकों ने अपने कब्जे में ले लिया और वहां के लोगों पर शरिया कानून थोप दिया. ऐसे में मलाला का संघर्ष महिलाओं के पूर्ण शिक्षा के अधिकार को लेकर था जिसके लिए वह इस्लामी आतंकियों के आंख की किरकिरी बन गई और मलाला की जान को खतरा हो गया. इसी संघर्ष के दौर में वह बीबीसी की उर्दू वेबसाईट पर ‘गुल मकई’ के फर्जी नाम से अपना ब्लॉग लिखकर महिलाओं के अधिकार की वकालत करने में जुट गई.

फिल्म के निर्देशक संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के स्थायी अंतर-सरकारी पर्यवेक्षक भी हैं. उन्होंने बताया कि चार वर्षो के गहन शोध के बाद इस फिल्म की पटकथा तैयार की गई और फिल्म की शूटिंग गुजरात के भुज और मुंबई में की गई है. बाद में कश्मीर के गांदरबल जिले में भी इसकी शूटिंग की गई.

खान ने कहा कि लंबे समय तक खोज के बाद मलाला की मुख्य भूमिका के लिए टीवी बाल कलाकार रीम शेख को चुना गया. फिल्म के अन्य प्रमुख कलाकारों में दिव्या दत्ता, अतुल कुलकर्णी, ओमपुरी, पंकज त्रिपाठी, मुकेश रिषी आदि हैं. फिल्म में कैलाश खेर, पीयूष मिश्रा और अजमत ने गाने गाये हैं.
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First published: December 1, 2019, 3:58 PM IST
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