निर्देशक शशांक खेतान बोले- ‘अजीब दास्तान्स’ के खामी वाले किरदार लिखते समय रोमांचित था

डायरेक्टर शशांक खेतान ने कहा कि, कॉमर्शियल फिल्मों में हम ज्यादा खामी वाले पात्र को नहीं लिखना चाहते हैं, वहां हम सपाट या सामान्य पात्र चाहते हैं. (Photo: https://www.instagram.com/shashankkhaitan)

डायरेक्टर शशांक खेतान ने कहा कि, कॉमर्शियल फिल्मों में हम ज्यादा खामी वाले पात्र को नहीं लिखना चाहते हैं, वहां हम सपाट या सामान्य पात्र चाहते हैं. (Photo: https://www.instagram.com/shashankkhaitan)

‘अजीब दास्तान्स (Ajeeb Daastaans)’ के डायरेक्टर शशांक खेतान (Shashank Khaitan) ने कहा, खामियों वाले पात्रों को गढ़ना रोमांचित करता हैं, लेकिन कॉमर्शियल फिल्मों में यह संभव नहीं हो पाता. खेतान की फिल्म ‘अजीब दास्तान्स’ 16 अप्रैल को रिलीज होगी.

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मुंबई. ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ के राइटर और ‘अजीब दास्तान्स (Ajeeb Daastaans)’ के डायरेक्टर शशांक खेतान (Shashank Khaitan) ने कहा कि उन्हें ऐसे पात्रों को गढ़ना रोमांचित करता हैं, जिनमें खामियां होती हैं लेकिन कॉमर्शियल फिल्मों में हमेशा ऐसा करना संभव नहीं हो पाता. खेतान फिल्म ‘अजीब दास्तान्स’ के साथ ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर आ रहे हैं. यह फिल्म 16 अप्रैल को रिलीज होगी.

इस फिल्म में चार लघु फिल्में हैं और यह आधुनिक दौर के रिश्तों को लेकर ईर्ष्या, हक, पूर्वाग्रह और दमघोंटू माहौल पर आधारित है. इस फिल्म का प्रोडक्शन करण जौहर ने किया है. खेतान की लघु फिल्म में ‘पाताल लोक’ के एक्टर जयदीप अहलावत और ‘दंगल’ की एक्ट्रेस फातिमा सना शेख पति और पत्नी के रोल में हैं. अरमान रल्हन भी इस रिश्ते में तीसरे कोण के रूप में हैं.

‘अजीब दास्तान्स’ के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में खेतान ने कहा, ‘सबसे रोमांचित करने वाली बात यह रही कि मैं सामान्य कॉमर्शियल फिल्मों में जिन पात्रों को नहीं गढ़ पाता हूं, उन्हें मैं यहां लिख रहा था. कॉमर्शियल फिल्मों में हम ज्यादा खामी वाले पात्र को नहीं लिखना चाहते हैं, वहां हम सपाट या सामान्य पात्र चाहते हैं.’

डायरेक्टर ने कहा, ‘इसलिए जब मैं लघु फिल्म के लिए इन किरदारों को लिख रहा था तो काफी रोमांचित था. ये बहुआयामी किरदार हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि वे खामी से भरे किरदार हैं…यही उनकी खासियत है. आपको यहां पूर्णता में नहीं, बल्कि खामियों के पीछे जाना होता है.’
अहलावत ने कहा, ‘मैंने इससे पहले कभी ऐसा किरदार नहीं निभाया था. जब शशांक ने मुझे यह कहानी सुनाई तो थोड़ी देर के लिए मैंने यह सोचा कि मैं इसे करने में सक्षम नहीं हूं. लेकिन फिर मैंने सोचा कि एक लघु फिल्म में इस तरह की बड़ी बात कहने का बड़ा अवसर है. ….भले ही पर्दे पर इसे अदा करना कठिन हो, लेकिन मैं यह चुनौती स्वीकार करने के लिए तैयार हो गया.’

वहीं उनकी सह-कलाकार फातिमा सना शेख ने कहा कि पर्दे पर पहली बार इस तरह का पेचीदा किरदार करने के बारे में वह सोचकर रोमांचित थीं. उन्होंने कहा कि इसमें उनका किरदार एक ही समय में मजबूत भी है और कमजोर भी.
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