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दूरदर्शन
3.5/5
पर्दे पर : 28-02-2020
डायरेक्टर : गगन पुरी
संगीत :
कलाकार : मनु ऋषि चड्ढा, माही गिल, शार्दूल राणा, सुमित गुलाटी, सुप्रिया शुक्ला, राजेश शर्मा और डॉली अहलूवालिया
शैली : कॉमेडी ड्रामा
यूजर रेटिंग :
0/5
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Doordarshan मूवी रिव्‍यू : Smart Phone की दुनिया में 'दूरदर्शन' का दौर जिंदा करती मजेदार फिल्‍म

News18Hindi
Updated: February 28, 2020, 1:25 PM IST
Doordarshan मूवी रिव्‍यू : Smart Phone की दुनिया में 'दूरदर्शन' का दौर जिंदा करती मजेदार फिल्‍म
ये इस फ‍िल्‍म में दूरदर्शन के जामने के दौर को द‍िखाया गया है.

'दूरदर्शन' कहानी है दिल्‍ली के रहने वाले एक परिवार की जिसका मुखिया है सुनील ( मनु ऋषि चड्ढा) जो अपनी मां से बहुत प्‍यार करता है. लेकिन सुनील की बीजी (डॉली अहलूवालिया) लगभग 30 सालों से कोमा में हैं.

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  • Last Updated: February 28, 2020, 1:25 PM IST
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कभी-कभी कुछ फिल्‍में आपको काफी सरप्राइज कर देती हैं और ऐसी ही एक फिल्‍म है 'दूरदर्शन' जो आज सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है. इस फिल्‍म को सरप्राइज इसलिए कह सकते हैं कि बिना बहुत ज्‍यादा तामझाम और किसी बड़े स्‍टार के बिना बनी सामने आई ये फिल्‍म आपको काफी कुछ देगी. खासतौर पर अगर आप 80 या 90 के दशक वाले बच्‍चे हैं तो इस फिल्‍म में बहुत कुछ ऐसा है जो आपको देखते ही अपने पुराने दिनों की खूबसूरत यादों में ले जाएगा.

ये कहानी है दिल्‍ली के रहने वाले एक परिवार की जिसका मुखिया है सुनील ( मनु ऋषि चड्ढा) जो अपनी मां से बहुत प्‍यार करता है. लेकिन सुनील की बीजी (डॉली अहलूवालिया) लगभग 30 सालों से कोमा में हैं. वहीं सुनील की पत्‍नी प्रिया (माही गिल) भी उसे छोड़कर उससे अलग रह रही है. इनका एक बेटा है जो कॉलेज की पढ़ाई से परेशान और अडल्‍ट किताबें पढ़ने का शौकीन है. इनकी एक बेटी भी है जिसकी अलग ही परेशानी है. इस सबके बीच अचानक एक दिन बीजी को होश आ जाता है, लेकिन परेशानी तब शुरू होती है, जब उन्‍हें पता चलता है कि बीजी के लिए आज भी दुनिया 30 साल पुराने जमाने वाली ही है. ऐसे में सालों बाद होश में आई बीजी को अचानक झटका न लगे इसे ध्‍यान में रखते हुए ये पूरा परिवार फिर से दूरदर्शन वाला वो दौर जिंदा करने में लग जाता है और फिर शुरू होती है इस मजेदार कहानी में कॉमेडी भरी मशक्‍कत.

फिल्‍म की शुरुआत में से लेकर आखिर तक हर किरदार ने अपने सुर को काफी अच्‍छे से पकड़ा है. फिल्‍म के लीड एक्‍टर मनु ऋषि चढ्डा को हमने कई फिल्‍मों में इससे पहले भी देखा है और उनकी कॉमिक टाइमिंग का हर कोई मुरीद है, लेकिन इस फिलम में उन्‍हें अपने साथी कलाकारों से खूब सपोर्ट मिला है. फिल्‍म के निर्देशक गगन पुरी को इस बात का क्रेडिट जाता है कि उन्‍होंने कहीं भी इस कहानी को बिखरने नहीं दिया है. सारा ताना-बाना काफी सटीक तरीके से बुना गया है. क्‍योंकि जब आप इस तरह की फिल्‍म देखने जाते हैं तो आप बहुत ज्‍यादा उम्‍मीदों या हाइप के साथ नहीं जाते और शायद इसलिए आपको इस कॉमेडी ऑफ एरर वाले अंदाज में और भी मजा आता है.





फिल्‍म के वनलाइनर काफी अच्‍छे हैं इसलिए उन्‍हें मिस करने का जोखिम मत उठाइएगा. दरअसल, राजेश शर्मा, डॉली अहलूवालिया, शार्दुल राणा, सुमित गुलाटी, सुप्रिया शुक्‍ला... ये वो एक्‍टर्स हैं, जो अलग-अलग फिल्‍मों में अपने सधे हुए अभिनय से आपको इंप्रेस कर चुके हैं, लेकिन इस फिल्‍म में ये सारे इकट्ठे हो गए हैं. फिल्‍म के इमोशनल सीन काफी संजीदा हैं.



फिल्‍म की कुछ खामियों की बात करें तो कुछ-कुछ जगह पर इसकी स्‍पीड थोड़ी धीमी पड़ जाती है. वहीं माही गिल के कुछ सीन जरूरत से ज्‍यादा लाउड लगते हैं. साथ ही कुछ सीन्‍स में आपको ऐसा भी लग सकता है कि आखिर माही गिल और मनु ऋषि को इस उम्र में स्‍कूल का बच्‍चा कैसे दिखा सकते हैं. साथ ही कुछ सीन्‍स में ये थोड़ा ज्‍यादा लगता है. ये फिल्‍म एक मजेदार अनुभव है जो आपको सिनेमाघरों में जाकर जरूर लेना चाहिए. मेरी तरफ से इस फिल्‍म को 3.5 स्‍टार.

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डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
3.5/5
स्क्रिनप्ल :
3/5
डायरेक्शन :
3.5/5
संगीत :
2.5/5

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First published: February 28, 2020, 12:30 PM IST
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