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फ़िल्म रिव्यू : कुछ हट के है अभिमन्यु-बिंदु की ये लव स्टोरी

फ़िल्म रिव्यू : कुछ हट के है अभिमन्यु-बिंदु की ये लव स्टोरी

कुछ हट के है अभिमन्यु-बिंदू की ये लव स्टोरी

कुछ हट के है अभिमन्यु-बिंदू की ये लव स्टोरी

अगर आप भी अभिमन्यु और परिणीति की लव स्टोरी को देखने का मन बना रहे हैं तो पहले ये रिव्यू पढ़ लीजिए..

    फ़िल्म - मेरी प्यारी बिंदु
    अभिनेता - अयुष्मान खुराना, परिणीति चोपड़ा
    निर्देशक - अक्षय रॉय
    रेटिंग - **1/2 स्टार

    मेरी प्यारी बिंदु की बिंदु (परिणीति चोपड़ा) आपके दिल में घर कर लेगी. फ़िल्म में कॉमेडी है, रोमांस है, ड्रामा है लेकिन बस अगर नहीं है वो है एक परफेक्ट एंडिंग.

    अगर आप भी अभिमन्यु और परिणीति की लव स्टोरी को देखने का मन बना रहे हैं तो पहले ये रिव्यू पढ़ लीजिए..

    कहानी
    फ़िल्म की शुरुआत होती है मुंबई के एक लेखक अभिमन्यु रॉय से जिसे अपनी नई कहानी के लिए प्लॉट की तलाश है.

    अभिमन्यु की पिछली  नॉवेल 'चुड़ैल की चोली' हिट रही थी लेकिन इसके बावजूद क्रिटिक उसे अच्छा कहानीकार नहीं मानते तो इस बार वो ठान लेता है कि कोई लव स्टोरी लिखेगा.

    इसी बीच अभिमन्यु अपने माता पिता के पास अपने घर कोलकाता पहुंचता है और पड़ोस की खिड़की को देखकर खो जाता है पुरानी यादों में कि कैसे एक दिन एक प्यारी सी लड़की बिंदु शंकर नारायणन उसके पड़ोस में रहने आती है.

    बचपन के दौर में एक छोटी सी फ्रॉक पहने उस प्यारी सी लड़की से प्यार हो जाता है. समोसे और हरी चटनी से शुरु ये लव कम दोस्ती वाली स्टोरी स्कूल से कॉलेज तक का सफर तय करती है.

    अभिमन्यु के प्यार से अंजान बिंदु हमेशा से सिंगर बनना चाहती है. उससे 70-80 के दशक के गानों से बहुत प्यार है. दोस्ती-मस्ती में आगे बढ़ती इस कहानी में एक हदसा होता है और बिंदु घर छोड़ कर चली जाती है.

    अभिमन्यु भी आगे की पढ़ाई के लिए घर से दूर चला जाता है. कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब अचानक अभिमन्यु को एक दिन गोवा में घूमते हुए बिंदु मिल जाती है.

    फिर शुरु होती है एक रोमांटिक लव स्टोरी. फिर क्या होता है बिंदु और अभिमन्यु की इस लव स्टोरी में, इसका पता आपको फ़िल्म देख कर ही चलेगा.

    वैसे हम आपको सिर्फ इतना बता सकते है कि अगर आपको फ़िल्मों में हैप्पी एंडिंग की आदत है तो आप निराश हो सकते हैं.

    एक्टिंग
    अभिमन्यु के किरदार में आयुष्मान खुराना ने बहुत कोशिश की पर वो बस औसत ही लगे. 2012 में आई विक्की डोनर से मेरी प्यारी बिंदु तक के 5 साल के सफर में आयुष्मान की एक्टिंग में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है.

    परिणीति को इस फ़िल्म की जान कहे तो गलत नहीं होगा. पिक्चर में जान आ जाती है जब कहानी में एंट्री होती है बिंदू की. एक चुलबुली सी नटखट सी लड़की जिसे लाइफ़ से सिर्फ़ एक चीज चाहिए म्यूजिक. अपने रोल में परिणीति एक दम फ्रेश और परफेक्ट हैं.

    मां के मरने वाले सीन में, सालों बाद पिता से मिलने वाले सीन में परिणीति आपके आंखों में नमी छोड़ जाएगी. एक कलाकार के तौर पर परिणीति परिपक्व नजर आईं.

    डारेक्शन
    सुप्रोतिम सेनगुप्ता की कहानी को डायरेक्टर अक्षय रॉय ने निभाने की पूरी कोशिश की है. पर कहीं-कहीं फ़िल्म आपको कन्फ्यूज करेगी. कभी कहानी फ्लैश बैक में चली जाती है तो कभी प्रेजेंट में चलने लगती है. कुल मिलाकर अगर फ़िल्म के एंड को हटा दिया जाए तो अक्षय रॉय फ़िल्म के साथ न्याय करने में कामयाब रहे.

    कॉमेडी
    मेरी प्यारी बिंदु एक सिचुएशनल कॉमेडी फ़िल्म हैं. आयुष्मान के आलावा फ़िल्म में बाकी सारे एक्टर्स की कॉमिक टाइमिंग बढ़िया है. आयुष्मान के माता पिता का रोल ज्यादा बड़ा नहीं पर वो अपने डॉयलॉग और स्क्रीन प्रेजेंस से इम्प्रेस करते हैं.

    क्यों देखें.
    अगर आप कभी टाइम से परिणीति को बड़े पर्दे पर मिस कर रहे थे तो ये फ़िल्म आप को जरूर देखनी चाहिए और अगर आप वही घिसी पिटी लव स्टोरी से बोर हो गए हैं कुछ नया चाहते हैं तो भी जरूर जाइए पर फ़िल्म में कुछ एडल्ट जोक्स भी हैं जिनके लिए तैयार रहिएगा.

    क्यों ना देखें
    अगर आप फ़िल्म में हैप्पी एंडिंग ही देखना चाहते हैं और हर प्यार का अंजाम शादी ही हो ऐसा सोचते हैं तो ये फ़िल्म आपको निराश कर सकती है.

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