गीतकारों के लिए गुलजार सदाबहार, समकालीन और संवेदनशील

गीतकारों के लिए गुलजार सदाबहार, समकालीन और संवेदनशील
गुलजार

पाकिस्तान के डीना में पैदा हुए गुलजार ने 1963 में बिमल राय की ‘बंदिनी से गीतकार के रूप में अपना सफर प्रारंभ किया था.

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मुम्बई. गीतकार-लेखक-फिल्मकार गुलजार साधारण बातों को जादू में तब्दील कर देने की अपनी योग्यता से समकालीन और विभिन्न पीढ़ियों में प्रासंगिक बने हुए हैं. गीतकारों का ऐसा मानना है. गुलजार सात दशक के करियर के दौरान अपनी नज्मों, गजलों, गीतों और फिल्मों से देश की सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा बने हुए हैं.

पाकिस्तान के डीना में पैदा हुए गुलजार ने 1963 में बिमल राय की ‘बंदिनी से गीतकार के रूप में अपना सफर प्रारंभ किया था. उनका मूल नाम संपूर्ण सिंह कालरा है. गीतकारों-- स्वानंद किरकिरे और कौसर मुनीर के अनुसार, गुलजार में अपनी कविताओं, गानों या ‘आंधी’, ‘अंगूर, ‘मौसम’ और ‘इजाजत’ जैसी फिल्मों के माध्यम से समय के साथ चलने की क्षमता है.

गीतकार-गायक-अभिनेता किरकिरे ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘ वह नायक, प्रेरणा और शिक्षक हैं. व्यक्ति हमेशा गुलजार साहब की तरह बनना चाहता है. मेरा भी उनके गानों से ही हिंदी फिल्म संगीत से परिचय हुआ. जब भी मैं उनके गीत सुनता था मैं महसूस करता था कि उनकी बिल्कुल अलग आवाज है . वह बिना किसी भारी काव्यात्मकता के, चीजों को आधुनिक रोजमर्रा शैली में कह देते हैं.’’



गीतकार कौसर मुनीर ने कहा, ‘‘ सभी को पता है कि पानी गीला होता है . लेकिन जब आप ‘गीला गीला पानी’ जैसा कुछ कहते हैं तो मेरे जैसे व्यक्ति के लिए इसका मतलब कुछ खास होता है क्योंकि गद्य तब पद्य का रूप ले लेता है. इजाजत के गानों पर आज भी वे लोग खुशी मनाते हैं जो काव्य सोच वाले नहीं है क्योंकि यह फिल्म साधारण बात को कुछ जादुई रूप में पेश करती है.’’
मुनीर ने इस बात पर बल देने के लिए ‘बंटी और बबली’ फिल्म के गीत ‘कजरारे’ की पंक्तियां ‘आंखे भी कमाल करती हैं, पर्सनल से सवाल करती हैं’ का हवाला दिया कि कैसे गुलजार मुहावरों को बदलकर गाने में ‘किरदार, वर्ग और मर्यादा ’ ले आते हैं और ‘तथाकथित बॉलीवुड आइटम नंबर’ को सामाजिक बदलाव के रूप में सामने ला देते हैं.’

गुलजार की बेटी मेघना गुलजार, क्रिक्रेटर युवराज ने भी उन्हें बधाई देने के लिए उनकी पंक्तियों को याद किया.
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