Gunjan Saxena Review: पिता-बेटी के रिश्ते से समाज की सोच से लड़ने तक, बेहतरीन है असली 'हीरो' की कहानी

Gunjan Saxena Review: पिता-बेटी के रिश्ते से समाज की सोच से लड़ने तक, बेहतरीन है असली 'हीरो' की कहानी
गुंजन सक्सेना (Photo Credit- janhvikapoor/Instagram)

'गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल' रिव्यू (Gunjan Saxena The Kargil Girl Review) जाह्नवी कपूर (Janhavi Kapoor) और पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) ने रियल लाइफ वॉर हीरो की कहानी बेहद सादगी और असरदार तरीके से कही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 11, 2020, 2:40 PM IST
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मुंबई. पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi), जाह्नवी कपूर (Janhavi Kapoor), अंगद बेदी (Angad Bedi) जैसे सितारों से लैस 'गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल' (Gunjan Saxena: The Kargil Girl), एक महिला की जिंदगी से जुड़ी कई कहानियां कहती है. ये सिर्फ देशभक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि एक महिला के संघर्षों और सपनों को पूरा करने की जिद की दास्तान है. 'गुंजन सक्सेना' में डारेक्टर शरण शर्मा ने एक जांबाज महिला की कहानी के जरिए पिता-बेटी के रिश्ते से लेकर उस दौर में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली महिला को लेकर समाज की मानसिकता तक की कहानी कह डाली है.

फिल्म में एक ऐसी लड़की की कहानी दिखाई गई है, जिसके सपने बहुत बड़े हैं और उस वक्त की समाज की सोच से परे हैं. ये कहानी सिर्फ यहीं नहीं रुकती. इसमें पिता और बेटी के बीच गहरी समझ का रिश्ता. महिलाओं को लेकर समाज, यहां तक की उसके भाई की रूढ़ीवादी सोच, एयरफोर्स में अपनी जगह पाने के लिए लड़ती एक गुजंन सक्सेना की कहानी आपको एक महिला कीं जिदगी के कई पहलू दिखाएगी.

1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई कारगिल जंग में एक महिला फाइटर जेट पायलट की जाबांजी के पीछे की कहानी है 'गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल'. समाज और अपने ही डिपार्टमेंट से लड़ती हुई महिला को जब खुद को साबित करने का एक मौका मिलता है तो वो ऐसी जांबाजी दिखाती है कि सब हैरान रह जाते हैं. चीता हेलीकॉप्टर पर सवाल होकर रियल लाइफ हीरो गुंजन सक्सेना ने कारगिल वॉर जोन में अपनी जान की परवाह ना करते हुए न सिर्फ घायल सैनिकों को मेडिकल हेल्प तक पहुंचा, बल्कि सप्लाई ड्राप और दुश्मनों के ठिकानों का पता लगाने जैसे काम भी किए थे.



फिल्म में आर्मी अफसर के परिवार की एक लड़की गुंजन सक्सेना (जाह्नवी कपूर) की कहानी दिखाई गई है. जिसे उसके पिता (पंकज त्रिपाठी) ने भाई (अंगद बेदी) के जैसे ही पाला है. लखनऊ की गुंजन का सपना है प्लेन उडाने का. फिल्म में पिता और बेटी के बीच दिखाए गए संवात में गुंजन कहती है कि 'एयरफोर्ट को ऐसे कैडेट्स की जरूरत है, जिनमें देशभक्ति हो. मुझे तो बस प्लेन उड़ाना है'. बेटी की ये बात सुनकर उसके पिता कहते हैं- 'तुम बेहतर पायलट बन पाए देशभक्ति अपने आप आ जाएगी'... ये संवाद ही फिल्म की लगभग पूरी कहानी कह देता है.
गुंजन सक्सेना के रोल में जाह्नवी की परफॉर्मेंस काफी इंप्रेसिव है, वहीं पिता के रोल में पंकज त्रिपाठी इस फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं. हालांकि इस फिल्म में गुंजन सक्सेना की मां के किरदार को कुछ खास समय नहीं दिया गया है. फ्लाइट कमांडेंट दिलीप सिंह (विनीत कुमार सिंह) ने एक पुरूषवादी सोच वाले व्यक्ति के किरदार को बेहद शानदार तरीके से निभाया है. आर्मी अफसर के किरदार में अंगद बेदी गुंजन सक्सेना के पुरूषवादी सोच वाले भाई के रूप में ज्यादा याद रह जाते हैं. निखिल मल्होत्रा और शरण शर्मा ने फिल्म के हर किरदार को काफी अच्छे तरीके से लिखा है.

ये फिल्म शरण शर्मा की बतौर डायरेक्टर ये पहली फिल्म है. उन्होंने 'गुंजन सक्सेना' की इस कहानी के जरिए बिना ज्यादा महिमामंडन किए उन्हें हीरो तो बताया है लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए उसकी लड़ाई भी दिखाई है. उन्होंने बेहद सिंपल तरीके से अपनी बात कही है, ऐसे में पहली फिल्म में वो दर्शकों को इंप्रेस करने में कामयाब रहे. थिएटर के बनाई गई ये फिल्म मौजूदा हालातों के कारण नेटफ्लिक्स पर रिलीज की गई है.
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