बीवी की लिखी स्क्रिप्ट सुनने से बच रहे थे आमिर खान, इंटरव्यू में बताया किस बात का था डर...

आमिर खान
आमिर खान

ऐसा नहीं की 54 साल के इस अभिनेता की ज़िंदगी में सबकुछ फूलों से सजा हुआ है और वो एक सर्वगुण संपन्न व्यक्ति हैं. आमिर के हिस्से में भी कई विवाद हैं और इनमें से कुछ विवाद उनके दो दोस्तों शाहरुख और सलमान से भी जुड़े हुए हैं.

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  • Last Updated: March 14, 2019, 10:57 AM IST
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बॉलीवुड स्टार्स की अगर बात करें तो छोटे से छोटे स्टार के आस पास भी बाउंसर्स और सिक्योरिटी की भारी भीड़ रहती है और उतावली भीड़ को चीरता हुआ 'सितारा' निकल जाता है, प्रशंसक चिल्लाते रह जाते हैं - सर एक फ़ोटो ...एक सेल्फ़ी ...प्लीज़... कभी किस्मत अच्छी हुई तो दीदार-ए-स्टार हुआ, वर्ना अक्सर मिलता है किसी बाउंसर का धक्का या निराशा.

लेकिन नहीं, ये आमिर हैं साहब, वो हैरान करते हैं, बिना किसी शोर शराबे के आते हैं, उनके बाउंसर किसी को धक्का नहीं देते और वो भी इत्मिनान से सेल्फ़ी खिंचवाते हैं. ऐसा लगता है कि वो जल्दी में नहीं है. वो लोगों से मिलते हैं, लेट होते नहीं और हो जाते हैं तो सॉरी बोलते हैं (अमिताभ और शाहरुख भी बोलते हैं) और उन्हें स्टार वाला गुस्सा नहीं आता, सबके सामने तो बिल्कुल नहीं और उनकी यही अदा उन्हें औरों से बेहतर बना देती है.

दिल्ली के ली मेरिडियन होटल की लॉबी में हर कुर्सी, हर पिलर और कमर या कंधा टिका सकने वाली हर जगह पर कोई न कोई शख़्स खड़ा था. उनकी बॉडी लैंग्वेज देखकर कोई भी बता सकता था कि ये लोग यहां किसी की ताक में हैं और तभी मेरी नज़र पड़ी एक किनारे खाना खा रहे एक इंसान पर.
छोटा कद, गठीला शरीर, चेहरे पर कमाल की चमक, घुंघराले बाल जो एक हैडबैंड से पीछे खिंचे हुए थे और बढ़ी हुई दाढ़ी, पर चश्मा लगाए एक आदमी बेहद शांति से खाना खा रहा था और आसपास खड़े लोगों से हंसते हुए बात कर रहा था, वो आमिर ख़ान थे.

कोई सितारा ऐसे खुली लॉबी में इतनी भीड़ के बीच कैसे खाना खा सकता है? हाल ही में शाहरुख और अनुष्का को खाना खाने के लिए खूब सारे पर्दों की ज़रूरत पड़ी थी. खैर, आमिर फ़ारिग हुए, लॉबी में खड़ा जन सैलाब उनकी तरफ़ बढ़ा, मुझे पूरा यकीन था कि ऐसे मौके पर एकाध फैन को तो बाउंसर के हाथों मार लगेगी, लेकिन ये 'परफेक्शनिस्ट' की बात थी.



आमिर स्थिर हो गए और हर किसी के फोटो खींच लेने तक शांत खड़े रहे, मुस्कुराहट के साथ, वो जानते थे कि ये भीड़ छंट जाएगी और वो आराम से बिना अपने बाउंसर की मदद लिए हमारी ओर चले आए, "चलिए, किस तरफ़ है इंटरव्यू? माफ़ कीजिएगा, थोड़ी देर हो गई."

परफ़ेक्शनिस्ट

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आमिर ख़ान काफ़ी सिलेक्टिव हैं और ये सच है.


जब से आमिर ने इंडस्ट्री में अपना डेब्यू किया है, तभी से उनपर 'परफ़ेक्शनिस्ट' होने का एक टैग लग गया है जिसे आमिर हटाने की कोशिश भी नहीं करते. उनके इंटरव्यू शुरू होते ही एंकर कहते हैं कि "वी आर सिटिंग विद मिस्टर परफ़ेक्शनिस्ट..." लेकिन आमिर सिर्फ़ मुस्कुरा कर इसे स्वीकार कर लेते हैं.

"ये मेरे हाथ में नहीं है, शायद मैं शुरू से सीखने में बहुत विश्वास रखता हूं और इसके लिए (सीखने) सवाल पूछता हूं. मेरे सवालों को लोग मेरा परफ़ेक्शन मानते हैं तो इसमें कुछ ग़लत भी नहीं है."

52 साल की उम्र में भी अपने से छोटे निर्देशकों के आदेश का पालन और उनके नज़रिए को सीखने की एक कला है आमिर में जो बड़े बड़े सितारों में नहीं होती.

आमतौर पर बॉलीवुड में सुपरस्टार्स अपनी स्क्रिप्ट अपने हिसाब से बदल लेते हैं लेकिन आमिर इस पर बहुत मेहनत करते हैं, "मेरे लिए ये बेहद ज़रुरी है कि मैं अपने निर्देशक की बात सुनूं. हर आदमी का काम मैं नहीं कर सकता और ये मैं जानता हूं, इसलिए मेरे लिए उनका नज़रिया सुनना अहम है, लेकिन अगर उनका नज़रिया सही नहीं है तो मैं उसे नहीं मानता और यही मेरी दिक्कत है"

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आमिर खान का सेक्सी बलिए अवतार


आमिर बताते हैं कि उन्हें किसी फ़िल्म की स्क्रिप्ट पसंद नहीं आती तो फिर उस फ़िल्म को उनसे करवाना बड़ा मुश्किल काम है, इस बात से जुड़ा एक मज़ेदार किस्सा साझा करते हुए वो कहते हैं.
"किरण मेरे पास 'धोबी घाट' की स्क्रिप्ट लेकर आई, मुझे लगा ओह नहीं, अगर इसका आइडिया मुझे पसंद नहीं आया तो मुझे इसे मना करना पड़ेगा और इसका दिल टूट जाएगा. ऊपर से आप बीवी को कैसे कह सकते हो कि नहीं मुझे तुम्हारा ये आइडिया पसंद नहीं आया. उपरवाले का शुक्र है कि उस दिन वो स्क्रिप्ट मुझे पसंद आ गई."

ये बात सच है कि आमिर को किसी फ़िल्म की स्क्रिप्ट पसंद नहीं आती है तो वो उसे किसी भी कीमत पर नहीं करते, आमिर के अच्छे दोस्त आशुतोष गोवारिकर की फ़िल्म 'स्वदेस' को आमिर ने करने से मना कर दिया था क्योंकि उन्हें उसकी स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई थी. आशुतोष को बुरा लगा था, लेकिन 'परफेक्शनिस्ट' का टैग कुछ ऐसे ही कारणों से उनपर लगा है.

परवरिश

वो फ़िल्मी परिवार से ताल्लुक रखते हैं ऐसे में फ़िल्मों में आना उनके लिए आसान काम था और इसे आमिर भी मानते हैं. लेकिन फ़िल्मों में आना उनके लिए पहली पसंद नहीं था. वह बताते हैं, "फ़िल्मों से हमारा घर चल रहा था लेकिन अम्मी और अब्बू बिल्कुल नहीं चाहते थे कि मैं फ़िल्मों का रुख करूं क्योंकि ये जगह बिल्कुल भी सिक्योर नहीं है."

आमिर कहते हैं कि उनके पिता के अनुसार बॉलीवुड में ज़िंदगी रिस्क पर चलती है और अपने बच्चों को वो ये रिस्क नहीं देना चाहते. इस रिस्क का एक उदाहरण उनकी फ़िल्म 'तुम मेरे हो' (1990) को माना जा सकता है. पिता-पुत्र की जोड़ी की ये फ़िल्म न क्रिटिक्स को पसंद आई न दर्शकों को, शायद इसी रिस्क की बात आमिर के पिता ताहिर हुसैन करते थे. पिता-पुत्र ने साथ में दोबारा कोई फ़िल्म नहीं की, हो सकता है आमिर को ऐसी कोई स्क्रिप्ट न मिली हो, जो उनके पिता के साथ वो कर सकते हों.



आमिर अपनी मां को याद करते हुए कहते हैं कि वो बेहद स्ट्रिक्ट थीं और किसी भी ख़राब आदत को देखते ही डांटती थी,"कई लोग मुझे बहुत तमीज़दार मानते हैं, लेकिन मैं मानता हूं कि ये मेरी मां की परविरश का नतीजा है और आज भी उनकी सिखाई बातें मुझे ध्यान रहती हैं."

वो फ़िल्मी परिवार से आते हैं, उनके आसपास एक पूरा फ़िल्मी परिवार है भी जिसमें निर्माता निर्देशक भाई मंसूर खान, अभिनेता भाई फ़ैज़ल ख़ान, अभिनेता भांजा इमरान ख़ान और निर्माता निर्देशक पत्नी किरण राव शामिल हैं, लेकिन आमिर अपने आप में बेहद संतुलित रहते हैं वो 'ख़ानदान' या 'ख़ान' होने का रौब नहीं दिखाते.

ख़ान
इस बात पर विवाद हो सकता है कि बॉलीवुड के तीनों ख़ान और अगर आप सैफ़ को शामिल करें तो चारों ख़ान में से बेहतर कौन हैं?
शाहरुख़ बेहद अदब वाले आदमी हैं और अपनी बातों से किसी का भी दिल जीत सकते हैं, सलमान में वो ग्लैमर है कि उनके सामने पड़ने पर उनकी चकाचौंध में गुम हो जाते हैं, सैफ़ बेहद पढ़े लिखे और कमाल का सेंस ऑफ़ ह्युमर रखने वाले शख्स हैं लेकिन आमिर इन सबसे अलग हैं. वो थोड़ा शांत रहते हैं, उन्हें जानने वाले कहते हैं कि वो क्रिएटिव हैं.

चार सालों तक आमिर के मैनेजर रहे और फिर उनकी फ़िल्म 'सीक्रेट सुपरस्टार' के लेखक और निर्देशक अद्वैत कहते हैं,"वो कई घंटो काम करते हैं, आप उनसे सीख सकते हैं कि बहुत देर तक सोच कर बोलना किसे कहते हैं और उन्हें मालूम है कि उनकी बात का इंपैक्ट कितना रहता है."

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आमिर अपने असहिष्णुता वाले बयान के बाद ख़ासा परेशान रहे


हालांकि 'असहिष्णुता' वाली बात भी आमिर ने बहुत सोच कर बोली थी और इसके बाद से वो विवादों में घिरे रहे हैं लेकिन इसका ये बिल्कुल मतलब नहीं कि वो विचार नहीं करते.

शाहरुख एक कमाल के बिज़नेसमैन हैं और वो पैसा बनाना जानते हैं, सलमान मनोरंजन करना जानते हैं लेकिन आमिर क्रिएटिव हैं और वो ऐसी चीज़ रचना जानते हैं जो लोगों का मनोरंजन भी करेगी, उन्हें जागरुक भी करेगी और फिर किसी बिजनेसमैन को उसे खरीदना भी पड़ेगा.
"वो कमाल के हैं, मैं उनके साथ रहकर इतना जान चुका हूं कि वो सिर्फ़ अभिनय का नहीं, ज़िंदगी का स्कूल हैं." अद्वैत कहते हैं और आमिर तुरंत उन्हें काटते हैं.

"मैं अभी भी एक विद्यार्थी हूं, रोज़ सीख रहा हूं क्या हो रहा है, क्या कर रहा हूं."

स्टारडम खोने का डर
भारत में कितने अभिनेता या निर्माता हैं जिनकी फ़िल्म ने 1500 करोड़ का कारोबार किया हो, कमाई के मामले में वो किसी भी स्टार को पीछे छोड़ चुके हैं और आमिर का स्टारडम बॉलीवुड के किसी भी स्टार से बड़ा है और वो ये बात जानते हैं लेकिन इसका गुमान नहीं करते.
"स्टार होने में परेशानी है, इससे लोग आप से डरने लगते हैं, मुझसे लोग डरते नहीं है और यही खूबसूरती है."

आमिर चाहते हैं कि लोग उन्हें उनके बारे में सही राय दें, सुपरस्टार अचानक से लोगों से दूर हो जाते हैं और उनकों मिलने वाली प्रशंसा, आलोचना सीमित हो जाती है. आमिर मानते हैं कि एक अभिनेता के लिए ये बेहद खराब बात है.

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आमिर चीन में दौरे के दौरान


"एक अभिनेता के लिए ज़रूरी है कि वो कुछ नया करे, हर बार, मेरे लिए ये चुनौती है, जिससे मैं दंगल में निपटा."

आमिर ने दंगल में एक 55-60 साल के आदमी का किरदार निभाया था लेकिन वो इसके लिए तैयार नहीं थे.
"मैं झूठ नहीं बोलूंगा, मैं तैयार नहीं था, जब नितेश और यूटीवी वाले सिद्धार्थ मेरे पास आए तो मैं इस रोल के लिए राज़ी नहीं था. मैंने उनसे कहा कि इसे मैं 10 साल बाद करुंगा. मेरी बॉडी फ़िट थी, मैं धूम और पीके का स्टार था, मैं कैसे एक बूढ़े, थुलथुल आदमी का किरदार निभा सकता हूं?"

आमिर कहते हैं," हां, मेरे साथी कलाकार आज भी अपनी उम्र प्ले करने से डरते हैं. मुझे भी डर लगा था कि कहीं इस फ़िल्म के बाद मेरा स्टारडम चला गया तो? लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने वो किया जो बॉलीवुड में मेरे साथ के 'हीरो' नहीं कर पाए."

आमिर ने दो बेटियों के पिता का रोल उस समय किया जब उनके साथ के सुपरस्टार सलमान ट्यूबलाइट में और शाहरुख रईस में एक युवक रोल निभा रहे थे, शायद यही बात है जो उन्हें बेहतर बनाती है.

विवाद और आलोचना

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आमिर का विवादों से लंबा नाता है.


लेकिन ऐसा नहीं की 54 साल के इस अभिनेता की ज़िंदगी में सबकुछ फूलों से सजा हुआ है और वो एक सर्वगुण संपन्न व्यक्ति हैं. आमिर के हिस्से में भी कई विवाद हैं और इनमें से कुछ विवाद उनके दो दोस्तों शाहरुख और सलमान से भी जुड़े हुए हैं.

आमिर ख़ान ने एक अख़बार के कार्यक्रम में मंच से 'भारत में बढ़ती असहिष्णुता' पर बयान देकर मुसीबत मोल ली थी. आमिर ने अपनी पत्नी किरण का हवाला देते हुए भारत में बढ़ती असहिष्णुता के प्रति अपना डर जताया था जिसके बाद भारत भर में उनके खिलाफ विरोध के स्वर तेज़ हो गए थे. आमिर के द्वारा प्रचारित की जा रही ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट स्नैपडील को भी इस बयान का भारी खामियाज़ा भुगतना पड़ा था.

इस बयान के बाद से आमिर ऐसे किसी भी सवाल का जवाब देने से कतराते हैं, वो हंसते हुए कहते हैं कि वो अब डरने लगे हैं.
"मैं अब किसी कंट्रोवर्सी में नहीं आना चाहता, कब क्या हो जाए पता नहीं और फिर उसे संभालना मुश्किल हो जाता है. इस वजह से मैं अब 'मुद्दों' पर जवाब नहीं देता"

आमिर की फ़िल्म 'पीके' में भी सिर्फ़ हिंदू धर्म गुरुओं पर निशाना साधने की बात सामने आई थी और इस फ़िल्म के लिए आमिर को कई चैनल पर आकर सफाई पेश करनी पड़ी थी.

आमिर की आलोचना इस बात पर भी की जाती है कि वो अक्सर अपनी फ़िल्मों की रिलीज़ के आसपास ही सोशल कार्य करते नज़र आते हैं और इसके लिए राजनीतिक धरना प्रदर्शन और रैलियों में भी जाने से गुरेज़ नहीं करते. उनके आलोचकों की राय में, अगर आमिर दिखाई दे रहे हैं, तो इसका सीधा अर्थ है कि वो कुछ बेचने वाले हैं.

हालांकि आमिर इस आरोप पर टिप्पणी करने से बचते हैं लेकिन ये बात भी कई मायनों में सही है कि उन्हें सिर्फ़ उनकी फ़िल्म की रिलीज़ के इर्द गिर्द ही विभिन्न चीज़े करते हुए देखा जाता है.

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आमिर खान और फैजल खान: आमिर खान के भाई फैजल खान से रिश्ते भले ही अब खराब हो चुके हों लेकिन एक समय में दोनों साथ परदे पर नजर आए थे. फिल्म थी 'मेला' जो साल 2000 में आई थी.


परिवार के स्तर पर भी आमिर का अपने सगे भाई फ़ैज़ल ख़ान को लेकर अच्छा खासा विवाद रहा, मानसिक रोग से पीड़ित फ़ैज़ल ने आमिर पर उन्हें बंदी बनाने का आरोप लगाया था और फ़ैज़ल की कस्टडी को लेकर आमिर के पिता के साथ उनका कानूनी विवाद भी चला था.

तीन बच्चों के पिता आमिर को उनकी पिछली पत्नी रीना को तलाक देने पर भी कई लोग उनकी आलोचना करते आपको मिलेंगे लेकिन ये आमिर का निहायती निजी मामला है और इस पर टिप्पणी करने का अधिकार सिर्फ़ आमिर और उनकी पत्नी को है.

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आमिर और शाहरुख अच्छे दोस्त हैं, ऐसा वो कहते आए हैं.


सलमान ख़ान और शाहरुख़ ख़ान के प्रशंसक भी आमिर की आलोचना करते आपको नज़र आएंगे. जहां शाहरुख के प्रशंसक उन्हें शाहरुख के साथ फ़िल्म न करने का दोषी मानते हैं, वहीं सलमान के साथ काम न करने की वजह खुलेआम बता देने के बाद से सलमान के फ़ैन्स को भी उनसे दिक्कत है.

दरअसल करण जौहर के शो पर आमिर ने कहा था कि वो अंदाज़ अपना अपना के बाद से सलमान के साथ काम नहीं कर पाए क्योंकि उन्हें सलमान का लेट आना, शॉट के लिए तैयारी न करना पसंद नहीं था और यही वजह है कि उन्होनें दोबारा साथ काम नहीं किया.

वहीं शाहरुख के साथ उनका विवाद पुराना है, आमिर सोशल मीडिया पर साल 2008 में अपने केयरटेकर के कुत्ते 'शाहरुख' की चर्चा कर पहले ही शाहरुख के फ़ैन्स की बुराई झेल चुके हैं. आमिर ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि शाहरुख उनके तलवे चाट रहा है, दरअसल वो अपने केयरटेकर के कुत्ते की बात कर रहे थे लेकिन उनका इशारा समझ लेने के बाद शाहरुख के फ़ैन्स उनके पीछे पड़ गए थे.

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आमिर कई सम्मेलनों और बातचीतों का हिस्सा रहते हैं.
(Source: GettyImages)


इसके अलावा वो ऐसी किसी स्क्रिप्ट के ना मिलने का भी ज़िक्र कर चुके हैं जिसमें वो शाहरुख जैसे अभिनेता के साथ काम करना चाहेंगे.

निजी जीवन में आमिर के राजनीति से प्रेरित कई कार्य भी उनके लिए आलोचना लेकर आए हैं जिसमें मेधा पाटकर के साथ आंदोलन में जाना, अन्ना आंदोलन में बैठना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा बनना और फिर महाराष्ट्र सरकार की पानी आंदोलन  से जुड़ना उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं की तरफ भी इशारा करता है.

आमिर कहते हैं,"मैं अभी सिर्फ़ अभिनय और फ़िल्मों पर फ़ोकस कर रहा हूं और ये सब सवाल मुझे विचलित नहीं करते."

चलते चलते

आमिर सवालों का जवाब बेहद आराम से देते हैं, इंटोलेरेंस वाले मुद्दे के बाद वो बहुत सतर्क होकर किसी बात को बोलते हैं और पहले सवाल को समझते हैं.

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आमिर और इमरान भी एक फ़िल्मी परिवार बनाते हैं.


"मैं जानता हूं कि आजकल लोग आहत हो जाते, लेकिन मेरा बस इतना मानना है कि किसी भी कंट्रोवर्सी से प्यार से निपटो. अगर आप किसी विवाद में तीखी प्रतिक्रिया देंगे तो आपके आलोचकों को एक और प्वाइंट मिलेगा. आप अपने आलोचकों से प्यार से पेश आओ फिर देखो माहौल बदलेगा, और बदलाव कि हम सभी को ज़रुरत है."

इतनी देर में आमिर के आसपास फ़ोटो खींचने-खिंचाने वालों की लंबी चौड़ी भीड़ इक्ठ्ठी हो चुकी है. वो विचलित नहीं होते, वो अपनी आने वाली फ़िल्म सीक्रेट सुपरस्टार के प्रमोशन के लिए ज़रूरी बातें बोलते हैं और लोगों से इसे देखने का आग्रह करते हैं.

कुछ लोग उनसे उनकी कम सफल फ़िल्मों जैसे मेला, तुम मेरे हो जैसी फ़िल्मों के बारे में बात करना चाहते हैं लेकिन आमिर इन फ़िल्मों पर ऐसे ध्यान नहीं देते, जैसे उन्होनें कुछ सुना ही नहीं. वो इन फ़िल्मों पर बात करने से शुरु से ही कतराते रहे हैं.

भीड़ अपना आपा खोने लगती है, आमिर सेल्फी प्लीज़...वन फ़ोटो की चिर परिचित आवाज़ें!

हमें लगता है कि इस बार इनमें से एकाध को तो किसी बाउंसर का धक्का लगेगा ही लगेगा, लेकिन वो परफेक्ट हैं, वो सबके साथ फ़ोटो खिंचवा लेते हैं, भीड़ उल्लास की आवाज़ों के साथ अपने मोबाइल फ़ोन में सेल्फ़ी ट्रॉफ़ी लेकर जाने लगती है और वो चलते चलते अपने मैनेजर से पूछते हैं - तुम लोगों ने खाना खाया क्या? ... उन्हें ध्यान था... वो सुपरस्टार हैं ...इसके बाद भी.

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