Guru Dutt B'day Spl: मोहब्बत में नाकाम रहें गुरु दत्त, जीवन भर बेचैनी ने नहीं छोड़ा उनका पीछा

गुरु दत्त 9 जुलाई को पैदा हुए थे. (फोटो साभार: News 18)

Guru Dutt B'day Spl: गुरु दत्त (Guru Dutt) 9 जुलाई 1925 को बेंगलुरू में पैदा हुए और 10 अक्टूबर 1964 को दुनिया को अलविदा कह गए. गुरु दत्त अपने आम में कंपलीट पैकेज थे. एक्टर, कोरियोग्राफर, डायरेक्टर, राइटर, प्रोड्यूसर सब कुछ थे, अगर कुछ नहीं था तो चैन’.

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    मुंबई: बेंगलुरू में पैदा हुए गुरु दत्त (Guru Dutt) का असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था. इनकी पढ़ाई लिखाई कोलकाता में हुई. पढ़ाई पूरी कर एक कंपनी में टेलीफोन ऑपरेटर की नौकरी की लेकिन दिल नहीं लगा. कुछ अलग करने की चाह लिए वसंत कुमार पुणे चले आए. इनका मन शुरू से ही एक्टिंग में लगता था. 1945 में ‘प्रभात’ नामक फिल्म कंपनी में काम मिल गया. फिल्म ‘लाखारानी’ से काम करना शुरू किया. इसके ठीक एक साल बाद ‘हम एक हैं’ फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर और कोरियोग्राफर की जिम्मेदारी मिली. 1947 में कंपनी से कांट्रैक्ट खत्म हो गया.

    इसके बाद देव आनंद की कंपनी में काम मिला. फिल्म ‘बाजी’ का डायरेक्शन गुरुदत्त ने किया. फिल्म हिट रही. इसके बाद ‘जाल’ और ‘बाज’ बनाई जो फ्लॉप रही. ‘बाज’ में पहली बार बतौर हीरो स्क्रीन पर आए. इसी बीच देव आनंद से मनमुटाव हो गया और अपनी खुद की कंपनी बना ली. अपने प्रोडक्शन के बैनर तले पहली फिल्म बनाई ‘आर-पार’ जिसे पसंद किया गया. इसके बाद तो गुरु दत्त रुके नहीं. ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’, ‘प्यासा’, ‘कागज के फूल’, ‘चौदहवीं का चांद’ जैसी शानदार फिल्में बनाई. ‘साहब बीबी और गुलाम’ की सफलता के बाद तो गुरु दत्त ने इतिहास रच दिया. इन कालजयी फिल्मों से आज भी लोग सीखते हैं.

    फिल्म ‘बाजी’ समय गुरु दत्त की नजरें गीता दत्त से टकराईं, जहां गुरु नए-नए थे वहीं गीता शोहरत की बुलंदियों पर थीं. दोनों के बीच प्रेम हुआ और शादी कर ली. गुरु दत्त और गीता दत्त के तीन बच्चे हुए, लेकिन दोनों के बीच अहम के टकराव से प्रेम धीरे-धीरे कम होने लगा. फिल्म ‘प्यासा’ के दौरान गुरु दत्त को वहीदा रहमान की तरफ खिंचाव होने लगा. हमेशा कुछ नया करने और पाने की बेचैनी उन्हें गीता से दूर और वहीदा के करीब ले जाने लगी.

    (फोटो साभार: News 18)


    मीडिया की खबरों की माने तो गुरु दत्त और वहीदा रहमान के बीच अफेयर की खबरों ने घर में कलह मचा दिया. गीता दत्त से रिश्ते अच्छे नहीं रहे लेकिन वहीदा जानती थीं कि गुरु शादीशुदा हैं इसलिए कभी रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाया और गुरु से दूरी बना ली.  दूसरी तरफ गीता और गुरू के बीच दूरियां भी कम नहीं हुई और वो बच्चों को लेकर चली गईं. इस बीच और भी जिंदगी में उथल पुथल रहा. बेचैन, परेशान गुरु दत्त ने 10 अक्टूबर 1964  की काली रात में जो शराब पी फिर उठ न सके. हालांकि उनके मौत की वजह कभी साफ नहीं हुई. लोग कहते हैं कि डिप्रेशन के शिकार गुरु दत्त ने खुदकुशी कर ली थी.

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