Happy Birthday Lata Mangeshkar: ऐसा गाना जो लता मंगेशकर की पूरी जिंदगी बयां कर देता है

लता मंगेशकर.
लता मंगेशकर.

Happy Birthday Lata Didi: 28 सितंबर को सुर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का जन्मदिन है और इस दिन लता मंगेशकर के लाखों चाहने वाले उनके गाए अपने पसंदीदा गीतों को साझा भी करेंगे. लेकिन एक गीत ऐसा है जो ना सिर्फ़ लता मंगेशकर का पसंदीदा गीत है, ये उनके लिए ही लिखा भी गया है.

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  • Last Updated: September 28, 2020, 8:25 AM IST
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Happy Birthday Lata Tai: 28 सितंबर को सुर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का जन्मदिन है और इस दिन लता मंगेशकर के लाखों चाहने वाले उनके गाए अपने पसंदीदा गीतों को साझा भी करेंगे. लेकिन एक गीत ऐसा है जो ना सिर्फ़ लता मंगेशकर का पसंदीदा गीत है, ये उनके लिए ही लिखा भी गया है.

फ़िल्म किनारा (1977) में रिलीज़ हुई थी और इस फ़िल्म में हेमा मालिनी, जीतेंद्र और धर्मेंद्र पर फिल्माया गीत 'नाम गुम जाएगा' लता मंगेशकर के निजी पसंदीदा गानों में से है.

इस फिल्म के निर्माता गुलज़ार ही इस गीत के लेखक भी हैं और 'लता सुर-गाथा' के लेखक यतींद्र मिश्र से उन्होनें साझा भी किया था कि यह गीत दरअसल उन्होनें लता मंगेशकर के लिए ही लिखा था.



लता कहती हैं, "हां, वो कमाल का गीत था. वाकई जैसे उन्होनें मेरे मन की बातों को पन्ने पर उतार दिया और इसी वजह से यह मेरी व्यक्तिगत पसंद भी है और मैं हमेशा उनकी शुक्रगुज़ार रहूंगी कि उन्होनें इतना सुंदर गीत मेरे लिए लिखा."
"मैं अगर खुद इस गीत के लिए कुछ कहना चाहूं तो इतना ही कहूंगी कि यह मेरे लिए जितना सही है, उतना ही यह सहगल साहब, मुकेश भैया और किशोर दा के लिए भी सटीक होगा." - लता मंगेशकर

लता मंगेशकर पर इससे पहले उनको बिना बताए व्ही शांताराम ने 'तीन बत्ती चार रास्ता' नामक फिल्म बनाई थी लेकिन लता ना तो इस फिल्म से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करती हैं और ना ही इस फ़िल्म के किरदार से कोई समानता ही पाती हैं.

वो कहती हैं,"लोगों को उस फिल्म और मेरे जीवन में कई समानताएं लगीं लेकिन मैं ऐसा कुछ नहीं देखती. यहां तक की फ़िल्म सत्यम शिवम सुंदर के ज़रिए राज कपूर साहब मेरा चरित्र पर्दे पर दिखाना चाहते थे और मुझे उसमें कास्ट करना चाहते थे लेकिन वो मुझे मेरी कहानी लगी नहीं. बाद में नई पटकथा के साथ ज़ीनत अमान को लेकर वो फ़िल्म बनाई."

लेकिन गुलज़ार वाला गीत हमेशा दिल के करीब रहेगा और मैं मानती हूं कि इस गीत की तरह ही, हम लोगों की ज़िंदगी है, जिसमें आवाज़ ही पूरा वजूद बन जाया करती है.

(लता मंगेशकर ने ये किस्सा लेखक यतींद्र मिश्र की लिखी किताब लता - सुर गाथा में साझा किया है. लता के जीवन पर लिखी गई ये अभी तक की सबसे विस्तृत पुस्तक है.)
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