पढ़िए ‘दंगल’ से ‘मैरी कॉम’ तक दिल छू लेने वाले डायलॉग्स, अब है ‘साइना’ की बारी

महिला खिलाड़ियों की फिल्मों के दिल छू लेने वाले डायलॉग.
(फोटो साभार : film poster -Instagram)

महिला खिलाड़ियों की फिल्मों के दिल छू लेने वाले डायलॉग. (फोटो साभार : film poster -Instagram)

किसी भी फिल्म में दर्शकों को डायलॉग्स (Film Dialouges) और गाने यही दो चीजें होती, हैं जो याद रहती हैं. कुछ डायलॉग्स तो ऐसे हो जाते हैं कि जिन्हें हम अपनी रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल करने लगते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 10, 2021, 10:42 PM IST
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मुंबई: परिणीती चोपड़ा (Parineeti chopra) की अपकमिंग फिल्म 'साइना'  (Saina)  26 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है. बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल की लाइफ पर बनी इस फिल्म का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ था. ट्रेलर में अच्छे डायलॉग्स और दिल छू लेने वाले कई शानदार सीन देखने को मिले. इस फिल्म के साथ ही कई ऐसी फिल्मों के डायलॉग्स एक बार फिर दर्शकों को याद आने लगे हैं, जिसने कई फिल्मों को सफल बनाया है. कुछ तो ऐसे हैं, जिन्हें हम अक्सर इस्तेमाल करते रहते हैं.

फिल्म ‘साइना' के ट्रेलर में साइना नेहवाल का बचपन दिखाया गया है. उनकी मां उन्हें बचपन में कहती हैं ‘रास्ते पर चलना एक बात है साइना, रास्ता बनाना दूसरी बात, तो दूसरी बात करने की सोच’. इसके अलावा साइना के मां बाप आपस में बात करते हुए बोलते हैं कि ‘ फिर नंबर वन बनेगी, क्यों नहीं बनी तो बना ही दोगी’. एक जगह साइना के कोच कहते हैं कि ‘मुझे वो चैंम्पियन चाहिए जो जीत के अलावा कुछ और नहीं सोचता’. एक डायलॉग है ‘नंबर वन के सपने पालना खतरे से खाली नहीं होता’.  वहीं एक डायलॉग ‘मेरा ध्येय एकदम सरल,सामने वाले को मार देना’ साइना के जीत के लिए जुझारूपन को दर्शाता है. इस फिल्म के डायलॉग कितना दर्शकों की जुबान पर चढ़ पाएंगे ये तो फिल्म के रिलीज के बाद ही पता चलेगा. लेकिन महिला खिलाड़ियों पर बनी उन फिल्मों की बात करते हैं जिनके डायलॉग की वजह से दर्शक आज भी याद करते हैं.

आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ हरियाणा के पहलवान महावीर सिंह फोगट की बेटियों बबीता और गीता फोगट को कुश्ती चैंम्पियन बनाने की कहानी पर बनी है. ‘दंगल’ के डायलॉग्स से लोग इस कदर कनेक्ट हुए कि आज भी बोलते सुने जा सकते है. महावीर अपनी बेटियों पर गर्व करते हुए कहते हैं कि ‘म्हारी छोरियां, छोरों से कम  हे के’ यह इस फिल्म का सुपरहिट डायलॉग है. इसके अलावा अपनी बेटियों को जीत का मंत्र देते हुए महावीर कहते हैं ‘मेडलिस्ट पेड़ पर नहीं उगते, उन्हें बनाना पड़ता है, प्यार से..मेहनत से और लगन से.  ‘अगर सिल्वर जीती तो तन्ने लोग आज नहीं तो कल भूल जावेंगे ,गोल्ड जीती तो मिसाल बन जावेगी’, ‘मैं अपनी छोरियों को इतना काबिल बनाउंगा कि वो अपने लिए छोरा चुनेंगी’. ‘ये कुश्ती है तीन सॉरी में खेल खतम हो जाता है’, ‘बहुत हो गई पहलवानी अब दंगल होगा’. ‘दिल छोटा मत कर नेशनल चैंम्पियन से हारा है तू’ ने तो दर्शकों से खूब ताली बजवाई थी.



फिल्म ‘मैरी कॉम’  में प्रियंका चोपड़ा ने मशहूर भारतीय मुक्केबाज मैरी कॉम के किरदार को निभाया. मैरी कॉम की जिंदगी ,संघर्ष और दर्द की इस कहानी में एक ही डायलॉग कई पर भारी है. ‘किसी को इतना भी मत डराओ की डर ही खत्म हो जाए’ . यह डायलॉग आज भी  धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है.


अब बात फिल्म  ‘चक दे इंडिया’ की. यह  फिल्म किसी एक खिलाड़ी नहीं बल्कि पूरी महिला हॉकी टीम की जीत की कहानी है. इस फिल्म में  शाहरुख खान भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच की भूमिका में थे. इस फिल्म का सबसे फेमस डायलॉग ‘चक दे फट्टे’ के अलावा ‘पीछे से नहीं मर्दों की तरह आगे से लड़ो, वो क्या है हमारी हॉकी में चक्के नहीं होते’, ‘मुझे स्टेट के नाम ना सुनाई देते हैं न दिखाई देते हैं..सिर्फ एक मुल्क का नाम सुनाई देता है इंडिया’, ‘वार करना है तो सामने वाले के गोल पर नहीं ,सामने वाले के दिमाग पर करो,गोल खुद ब खुद हो जाएगा’ , ‘इस टीम में केवल एक ही गुंडा हो सकता है और इस टीम का गुंडा मैं हूं’  ‘मर के आएंगे लेकिन हार के नहीं आएंगे’  इसके अलावा पहली बार किसी ‘गोरे को इंडिया का तिरंगा लहराता देख रहा हूं ‘ डायलॉग ने दर्शकों को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया था.
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