जब जगदीप की कॉमेडी को कहा गया ‘भड़कीला और दिखावटी’

जब जगदीप की कॉमेडी को कहा गया ‘भड़कीला और दिखावटी’
बॉलीवुड के लेजेंडरी एक्टर और कॉमेडियन जगदीप जाफरी का 8 जुलाई को मुंबई में निधन हो गया. वह 81 साल के थे. वह फिल्म शोले में सूरमा भोपाली के किरदार से काफी चर्चा बटोरने में कामयाब रहे थे.

जगदीप का वास्तविक नाम सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी था और उन्होंने बाल अभिनेता से लेकर मुख्य किरदार तक के रूप में काम किया. जावेद ने जगदीप से जुड़ा एक वाकया भी याद किया.

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मुंबई. अभिनेता जावेद जाफरी (Javed Jaffrey) का कहना है कि उनके पिता जगदीप के पास यह क्षमता थी कि वह अपने हास्य अभिनय से समाज के किसी भी तबके से तुरंत जुड़ जाते थे. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पिता की यही खूबी काफी काफी पसंद है. 81 साल की उम्र में जगदीप (Jagdeep) का निधन इस महीने हुआ. भले ही औपचारिक तरीके से उन्होंने शिक्षा हासिल नहीं की थी लेकिन उन्हें कविता और इतिहास में काफी दिलचस्पी थी.

अपने पिता के शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए जावेद ने पीटीआई-भाषा को बताया कि जगदीप भले युवावस्था में ही आजीविका के लिए सिनेमा की दुनिया में आ गए थे लेकिन उन्होंने इसमें ‘अपना पूरा ध्यान भी केंद्रित किया.’

जगदीप का वास्तविक नाम सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी था और उन्होंने बाल अभिनेता से लेकर मुख्य किरदार तक के रूप में काम किया. जावेद ने जगदीप से जुड़ा एक वाकया भी याद किया. उन्होंने कहा कि एक बार एक फिल्म आलोचक ने उनके पिता के हास्य अभिनय को ‘भड़कीला और दिखावटी’ करार दिया जिससे उन्हें बुरा लगा लेकिन उनके पिता ने इस आलोचना को खारिज कर दिया.



जगदीप ने कहा था, ‘‘देश में मेरे 80 फीसदी दर्शक वैसे हैं जो गरीबी में जीते हैं, ये आम लोग हैं और सिर्फ हंसना चाहते हैं. वे पेचीदा चीजें नहीं चाहते हैं और मैं उस आम व्यक्ति के लिए काम करता हूं.’’
जावेद ने साक्षात्कार में कहा, ‘‘वे साधारण इंसान थे और उनका उद्देश्य दर्शकों को हंसाना था.’’ उन्होंने अपने पिता के जीवन के प्रति नजरिए को ‘आध्यात्मिक’ बताया. अभिनेता का कहना है कि उनके पिता कभी किसी के बारे में बुरा नहीं बोलते थे. ‘बुगी वुगी’ स्टार जावेद का कहना है कि उनके पिता को कविताओं और कहानियों में काफी दिलचस्पी थी और वह अपने बच्चों को बताया करते थे कि वह सआदत हसन मंटो, साहिर लुधियानवी और जावेद अख्तर के पिता एवं शायर जां निसार अख्तर जैसे लेखकों से मिल चुके हैं.

जावेद के अनुसार उनके पिता को मिर्जा गालिब, फैज अहमद फैज और अन्य शायरों और कवियों की लेखनी काफी पसंद थी. भले ही वह पढ़े नहीं थे लेकिन हमेशा ज्ञान हासिल करने में लगे रहते थे.
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