इरफान खान रखना चाहते थे श‍िवजी के द‍िन का व्रत, पत्‍नी ने बताया- सुनकर चौंक गए थे र‍िश्‍तेदार

स्‍वर्गीय एक्‍टर इरफान खान के साथ उनकी पत्‍नी सुतापा. (@SutapaSikdar/Facebook)

स्‍वर्गीय एक्‍टर इरफान खान के साथ उनकी पत्‍नी सुतापा. (@SutapaSikdar/Facebook)

इरफान खान (Irrfan Khan) की पत्‍नी सुतापा स‍िकदर (Sutapa Sikdar) ने एक ताजा इंटरव्‍यू में बताया कि कैसे इरफान का अपना ही एक धर्म था. इरफान ने ही उन्‍हें स‍िखाया था क‍ि अल्‍लाह से जुड़ने के लिए आपको मुस्लिम बनने की जरूरत नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 28, 2021, 6:32 PM IST
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29 अप्रैल, 2020... यही वो तारीख है ज‍िस द‍िन हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री के द‍िग्‍गज एक्‍टर इरफान खान (Irrfan Khan) ने अस्‍पताल में अपनी आखिरी सांस ली. इरफान को इस दुन‍िया से गए पूरा एक साल होने वाला है. ऐसे में उनकी पत्‍नी सुतापा स‍िकदर (Sutapa Sikdar) ने एक अखबार से बात करते हुए इरफान की धार्मिक इच्‍छाओं और उनके धार्मिक व‍िचारों के बारे में बात कीं. सुतापा ने बताया कि कैसे एक बार अपने परिवार के सामने इरफान ने सोमवार का व्रत करने की बात कही थी और ये सुनकर सब चौंक गए थे.

टाइम्‍स ऑफ इंडिया को द‍िए एक इंटरव्‍यू में सुतापा ने बताया कि वह मुस्लिम नहीं हैं फिर भी वह रोजे रखती हैं. उन्‍होंने यह महसूस क‍िया कि इरफान ने ही उन्‍हें ये स‍िखाया था कि रोजा रखने के ल‍िए या अल्‍लाह से जुड़ने के लिए आपको मुस्लिम बनने की जरूरत नहीं है.

सुतापा ने बातया कि वह व्रत नहीं रख पाते थे हालांकि वह बहुत द‍िल से चाहते थे कि वह व्रत रखें. एक बार उन्‍होंने अपने एक फैसले से घरवालों को चौंका द‍िया था. सुतापा ने बताया, 'इरफान व्रत नहीं रख पाते थे हालांकि अपने आखिरी दो सालों में वह पूरे द‍िल से चाहते थे कि वह व्रत रखें. वह अक्‍सर कहा करते थे क‍ि वह हफ्ते में एक दिन फास्टिंग करूंगा ही. उन्‍होंने अपने र‍िश्‍तेदारों को यह कहकर चौंका द‍िया था, 'मैंने सोच ल‍िया है कि मैं सोमवार का फास्‍ट करूंगा, श‍िवजी का द‍िन होता है.'

इरफान खान ने 29 अप्रैल, 2020 को इस दुन‍िया को अलव‍िदा कहा था. बेटे बा‍ब‍िल के साथ इरफान. (फोटो साभार : babil.i.k/Instagram)

सुतापा ने बताया कि कैसे इरफान के लिए धर्म के मायने बेहद अलग थे. उनके ल‍िए धर्म का मतलब था अध्‍यात्‍म. सुतापा ने इस इंटरव्‍यू में कहा, 'मुझे तो लगता है कि अगर उन्‍हें कैंसर नहीं होता, तो वो अपना ही एक अलग धर्म बना लेते. इरफान इस शोबिजनेस को छोड़कर अपने खुद की खोज में कहीं दूर जाना चाहते थे. दरअसल वह स्‍वयं को खोजने की यात्रा पर न‍िकले हुए थे, ज‍िसमें वह खुद को खोज रहे थे, इस दुनिया से परे की चीजें, समानांतर सत्‍य की खोज. वह लगातार इसके बारे में पढ़ते और अध्‍ययन करते थे.' उन्‍होंने कहा, 'उनके लिए धर्म, अध्‍यात्‍म था. इस दौरान उन्‍होंने उपन‍िषद पढ़े, रामकृष्‍ण परमहंस को पढ़ा, व‍िवेकानंद को पढ़ा... पर वह कभी भी एक धार्मिक इंसान नहीं थे. ओशो, महावीर.. उन्‍होंने सब कुछ पढ़ा था.'
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