इरफान खान को याद कर पत्नी सुतापा फिर हुईं भावुक, बताया- 'विधवा का दर्द'

इरफान खान के साथ सुतापा सिकदर (फोटो क्रेडिट- facebook.com/sutapa.sikdar)
इरफान खान के साथ सुतापा सिकदर (फोटो क्रेडिट- facebook.com/sutapa.sikdar)

सुतापा सिकदर (Sutapa Sikdar) ने नोबल प्राइज विनर राइटर लुइस ग्लक्स की कविता है, जिसमें एक विधवा के दर्द और उसके मन की हालत का जिक्र किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 8:06 AM IST
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मुंबई. बॉलीवुड (Bollywood) एक्टर इरफान खान (Irrfan Khan) को गुजरे 5 महीने से ज्यादा का वक्त बीच चुका है, लेकिन दिन जैसे-जैसे बीत रहे हैं, वैसे-वैसे उनकी पत्नी सुतापा सिकदर (Sutapa Sikdar) के लिए दिन अकेले गुजारना मुश्किल हो रहा है. सुतापा कई बार इरफान को याद कर भावुक हो चुकी हैं, उन्होंने कई इमोशनल पोस्ट किए, जिसने हर किसी का आंखों को मन कर दिया. हाल ही में उन्होंने इरफान की लाल गुलाब से सजी क्रब का फोटो शेयर करते हुए न सिर्फ उन्हें याद कर भावुक हुईं बल्कि एक विधवा के दर्द को बयां कर बताया कि विधवा होकर अकेले जिंदगी गुजारना कितना मुश्किल होता है.

सुतापा सिकदर (Sutapa Sikdar) ने इरफान खान (Irrfan Khan) को याद करते हुए इंस्टाग्राम पर बेहद भावुक पोस्ट की है. उन्होंने नोबल प्राइज विनर राइटर लुइस ग्लक्स की कविता है, जिसमें एक विधवा के दर्द और उसके मन की हालत का जिक्र किया गया है.

मैं आपको कुछ बताऊंगी: हर रोज
लोग मर रहे हैं और यह सिर्फ शुरुआत है
हर दिन, श्मशानों में, नई विधवाओं का जन्म होता है


नए अनाथ, वे हाथ जोड़कर बैठ हुए हैं
इस नए जीवन के बारे में फैसला करने की कोशिश करते हैं.

फिर वे कब्रिस्तान में होते हैं उनमें से कुछ पहली बार
वे रोने से डरते हैं, कभी रोने का नहीं.
कोई उन्हें सहारा देकर यह बताता है कि आगे क्या करना है,
जिसका मतलब हो सकता है कुछ शब्द कहना,
फिर खुली कब्र में मिट्टी फेंकना.
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I'll tell you something: every day people are dying. And that's just the beginning. Every day, in funeral homes, new widows are born, new orphans. They sit with their hands folded, trying to decide about this new life. Then they're in the cemetery, some of them for the first time. They're frightened of crying, sometimes of not crying. Someone leans over, tells them what to do next, which might mean saying a few words, sometimes throwing dirt in the open grave. And after that, everyone goes back to the house, which is suddenly full of visitors. The widow sits on the couch, very stately, so people line up to approach her, sometimes take her hand, sometimes embrace her. She finds something to say to everbody, thanks them, thanks them for coming. In her heart, she wants them to go away. She wants to be back in the cemetery, back in the sickroom, the hospital. She knows it isn't possible. But it's her only hope, the wish to move backward. And just a little, not so far as the marriage, the first kiss. by #Louise Gluck#Nobelprize#celebratinglifeand death

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और उसके बाद, सभी घर वापस चले जाते हैं,
जो अचानक आगंतुकों से भरा होता है.
विधवा सोफे पर बैठती है, लोग लाइन में लगे हैं,
कभी उसका हाथ थामते हैं, कभी गले लगाते हैं
वह हर एक से कहने के लिए कुछ खोजती है,
उन्हें धन्यवाद देती है, उनके आने के लिए धन्यवाद देती

उसके दिल में कुछ है, वह चाहती है कि वे चले जाएं,
वह कब्रिस्तान में वापस आना चाहती है,
वापस उसकी बीमारी में वाले कमरे में, अस्पताल में
वो जानती है यह संभव नहीं है,
लेकिन यह उसकी एकमात्र आशा है, पीछे जाने की इच्छा है
और बस थोड़ा सा नहीं, न शादी तक बल्कि पहले किस तक
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