जावेद जाफरी ने फिर किया पिता जगदीप को याद, टूटे दिल के साथ शेयर किया ये पोस्ट

जावेद जाफरी ने फिर किया पिता जगदीप को याद, टूटे दिल के साथ शेयर किया ये पोस्ट
Photo Credit-@jaavedjaaferi/ Twitter

जावेद जाफरी (Javed Jaffrey) ने अपने पापा जगदीप जाफरी (Jagdeep Jaffrey) और भाई नावेद की कुछ पुरानी तस्वीरों (throwback photos) को शेयर कर उन्हें फिर याद किया.

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मुंबई. बॉलीवुड (Bollywoood) को साल 2020 कई बुरी यादें अब तक दे गया. इरफान खान, ऋषि कपूर, सुशांत सिंह राजपूत के साथ कई हस्तियों ने दुनिया को अलविदा कहा. हाल ही में जाने-माने कलाकार जगदीप जाफरी (Jagdeep Jaffrey) ने दुनिया से रुखस्ती ली. जगदीप लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे. उनके जाने के बाद से परिवार गमगीन हैं और सबसे ज्यादा दुख उनके बेटे जावेद जाफरी (Javed Jaffrey) को हो रहा है. अब पिता के साथ गुजारे कुछ हसीन लम्हों को याद कर वह भावुक हो रहे हैं. हाल ही में जावेद ने अपने पापा और भाई की कुछ पुरानी तस्वीरों (Javed Jafri shared throwback photos) को शेयर कर उन्हें फिर याद किया.

बॉलीवुड (Bollywoood) के मशहूर कॉमेडियन  रहे एक्टर जगदीप (Jagdeep) के निधन को 1 हफ्ते से ज्यादा का समय हो गया है. लेकिन उनकी यादों में खोए उनके परिजन उन्हें रोज याद कर रहे हैं. एक्टर जावेद जाफरी ने हाल ही में ट्विटर पर अपने पिता और भाई नावेद के साथ अपनी फोटो शेयर की है. इस फोटो को शेयर करने के साथ उन्होंने लिखा, इन फोटोज को शेयर करते हुए दिल टूटा हुआ महसूस कर रहा हूं.
इससे पहले भी जावेद ने सोशल मीडिया अपने पिता के लिए इमोशनल नोट लिख चुके हैं- उन्होंने कहा था- लिखा- 'मेरे पिता के जाने पर हमारा दुख बांटने वालों को मेरा तहे दिल से शुक्रिया. इतना प्यार... इतनी इज्जत...इतनी दुआएं..यही तो है 70 सालों की असली कमाई.' जावेद जाफरी ने पिता की फिल्मी जर्नी के बारे में बात की. कैसे जगदीप ने बतौर चाइल्ड एक्टर अपने करियर की शुरुआत की थी और फिर उन्होंने गरीबी का सामना किया, फिर कैसे वे फिल्म इंडस्ट्री के सबसे आइकॉनिक एक्टर्स में से एक बने.उन्होंने लिखा- 10 साल की उम्र से 81 तक, उन्होंने जो जिया और जिसके लिए सांस ली वो फिल्में थीं. 7 साल की उम्र में अपने पिता को खोने और बंटवारे के बाद , उनका सीधा मुकाबला गरीबी से हुआ था. उन्हें मुंबई के फुटपाथ पर अपनी जिंदगी को बिताया है. महज 8 साल की उम्र में उन्हें और उनकी मां को मुंबई नाम के एक निर्दयी समंदर में फेंक दिया गया था. उनके पास दो ही ऑप्शन थे- या तो तेरो या फिर डूब जाओ. उन्होंने तैरने को चुना.

छोटी-छोटी फैक्ट्रियों से लेकर, पतंगें बनाने, साबुन बेचने, मालिशवालों के पीछे कनिस्टर लेकर चलने और चिल्लाने 'मालिश, तेल मालिश' तक उन्होंने बहुत कुछ किया है. 10 साल की उम्र में उनकी किस्मत ने उनके लिए जो चुना, वो था सिनेमा. उनके सफर की शुरुआत बी.आर चोपड़ा साहब की पहली फिल्म अफसाना से हुई थी. इसे 1949 में शूट किया गया और 1951 में रिलीज हुई. और जैसा कि बोला जाता है 'हजारों किलोमीटर का सफर एक कदम से ही शुरू होता है', उसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा. उनके लिए बिमल रॉय, गुरु दत्त, के आसिफ, महबूब खान पिता समान थे और उनके वे उन्हें अपना गाइड मानते थे.



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इसी नोट में जावेद ने पिता जगदीप की पसंदीदा बात कही, जो जगदीप की मां उन्हें कहा करती थीं. उन्होंने लिखा- 'वो मंजिल क्या, जो आसानी से तय हो, वो राही क्या, जो थक कर बैठ जाए. मगर जिंदगी कभी-कभी थक कर बैठने पर मजबूर कर देती है. हौसला बुलंद होता है पर जिस्म साथ नहीं देता.' अंत में उन्होंने पिता को अलविदा करते हुए लिखा था- उस आदमी के नाम जिसे मैं पापा कहता था और जिसे दुनिया कई नामों से जानती है, सलाम!!! आपका नाम सूरमा भोपाली ऐसे ही नहीं था!!
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