कादर खान न होते तो अमिताभ कभी न कह पाते 'मूंछें हों तो नत्थूलाल जैसी'

जब कादर खान ने अमिताभ को सर बोलने से मना किया

अमिताभ बच्चन के करियर और उनके शानदार डायलॉग्स का कादर खान से एक खास कनेक्शन है.

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    कादर खान ने अपनी एक्टिंग से दर्शकों पर जिस तरह की छाप छोड़ी. कुछ उसी तरह का प्रभाव उन्होंने अपनी कलम से भी छोड़ा. अगर आप उनके इस पहलू से अनजान हैं तो बता दें कि कादर खान बतौर डायलॉग राइटर भी काम किया करते थे.

    मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा के साथ मिलकर कादर खान ने कई फिल्मों के ऐतिहासिक डायलॉग लिखे. कादर खान के लिखे वन लाइनर्स और दमदार डायलॉग्स ने अमिताभ बच्चन की चमक बढ़ाने का काम किया.

    साल 1983 में आई 'कुली' को आप कैसे भूल सकते हैं. 'तेरे हाथ में मौत का सामान है तो...मेरे सीने पे खुदा का नाम है.' 'मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी मिल जानी चाहिए जनाब' टाइप के शानदार डायलॉग कादर खान ने ही बिग बी को दिए.

    अमिताभ बच्चन की 'अमर अकबर एंथनी' (साल 1977) के एक से बढ़कर एक डायलॉग्स भी कादर खान ने ही लिखे थे. इनमें से ये तो आपको याद ही होगा, 'ऐसा तो आदमी लाइफ में दो ही टाइम भागता है, ओलंपिक रेस हो या पुलिस का केस हो...तुम काहे में भागता है भाई?'



    साल 1984 में आई शराबी में अमिताभ बच्चन के दमदार डायलॉग कादर खान ने दिए थे. आप कह सकते हैं कि कादर खान ने अमिताभ बच्चन को उनके करियर के कुछ शानदार डायलॉग दिए जैसे कि ये - 'मूंछें हों तो नत्थू लाल जैसी हों...वर्ना ना हों'



    साल 1978 में आई 'मुकद्दर का सिकंदर' बिग बी की हिट फिल्मों में से एक है. उनकी 'मिस्टर नटवर लाल' और 'अग्निपथ' की शानदार लाइन्स भी कादर खान ने दीं.




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