'त्रिभंगा' की कास्ट के साथ खास बातचीत, काजोल ने कहा- 'महिलाओं के लिए मानवीय नजरिए की जरूरत!'

त्रिभंगा

काजोल (Kajol) ने ओटीटी प्लेटफॉर्म (OTT Platform) पर डेब्यू करने को लेकर कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए और सिनेमा हॉल में रिलीज होने वाली फिल्मों में काम करने में कोई खास फर्क नहीं है. उन्होंने कहा कि ओटीटी और सिनेमा हॉल में फिल्में रिलीज करने में अधिक स्वतंत्रता मिलती है.

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    बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल (Kajol) की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'त्रिभंगा' (Tribhanga Trailer) का ट्रेलर कुछ दिन पहले ही रिलीज हुआ है. फिल्म का ट्रेलर काफी इमोशन से भरा हुआ है, जिसमें एक मां और बेटी की कहानी को पर्दे पर दर्शाया गया. फिल्म 15 जनवरी को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है. फिल्म के ट्रेलर से पता चलता है कि फिल्म की कहानी एक मां-बेटी के बीच रिश्तों पर बेस्ड है, जहां काजोल को अपनी मां से नफरत करते हुए दिखाया गया है. खास बात यह है कि फिल्म का निर्माण काजोल के पति और बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन (Ajay Devgan) के प्रोडक्शन हाउस ने किया है. इस फिल्म में काजोल के अलावा तन्वी आजमी और मिथिला पाल्कर भी नजर आएंगी. आपको बता दें कि इस फिल्म की कहानी को एक्ट्रेस रेणुका शहाने (Renuka Shahane) ने लिखा है. रेणुका ने ही इस फिल्म का निर्देशन भी किया है.

    फिल्म की रिलीज डेट नजदीक है और इसका प्रमोशन भी जोरों से चल रहा है. हाल ही में त्रिभंगा की टीम न्यूज18 के यूट्यूब चैनल शोशा (SHOWSHA) से जुड़ी और उन्होंने फिल्म को लेकर कई मुद्दों पर वैशाली जैन से चर्चा की. फिल्म की निर्देशक रेणुका शहाने ने मातृत्व और महिलाओं के जीवन में किए गए चयन को लेकर बात की. रेणुका ने कहा- "मां होना अच्छी बात है मगर और स्त्री को खुद को पहचानना और खुद की पहचान बनाना भी आवश्यक है और खुद के लिए किए गए निर्णयों का सम्मान करना भी जरूरी है. मुझे खुशी है कि इस फिल्म से मातृत्व को इंसानियत की दृष्टि से देखा जाना शुरु किया जा रहा है."

    फिल्म की एक्ट्रेस तन्वी आजमी (Tanvi Azmi) ने कहा कि ये फिल्म लोगों को सोचने के लिए एक नया नजरिया देती है जैसा हम पहले नहीं सोच पाते थे. तन्वी ने इंटरव्यू में कहा- "ये बहुत खुशी की बात है कि रेणुका ने मां-बेटी के ऐसे रिश्ते पर एक कहानी लिखी है और उसका निर्देशन किया है. इससे पहले हमने मां-बेटी के रिश्ते को इस फिल्म की तरह नहीं दर्शाया है ना बात की है."

    तन्वी ने फिल्म की कहानी पर अपनी बात रखते हुए कहा- "जरूरी नहीं कि एक मां हमेशा देवी की ही तरह हो. उसमें भी कुछ कमियां हो सकती हैं, उनकी भी कुछ समस्याएं हो सकती हैं मगर उसके बावजूद वो बेहतरीन इंसान हो सकती हैं. ये जरूरी नहीं है कि किसी महिला को मातृत्व की परीक्षा में पूरे अंक मिले मगर इंसान होने की परीक्षा में उन्हें सौ में से सौ अंक मिल सकते हैं. हमें अपने माता-पिता को अपनाना पड़ेगा और ये समझना पड़ेगा कि उनके अंदर भी कुछ समस्याएं हो सकती हैं और उनमें भी कुछ कमियां हो सकती हैं और फिर भी हम उनसे संवेदना रखते हुए प्यार कर सकते हैं."

    अभिनेत्री काजोल ने भी अपनी सह-कलाकारों की बातों से सहमति जताते हुए कहा कि ये जरूरी है कि हम महिलाओं को और अधिक इंसानियत की दृष्टि से देखें. ऐसा कर के हम एक दूसरे की आलोचना कम करेंगे और उन्हें जज कम किया करेंगे. अभिनेत्री तन्वी आजमी ने अपने अलग-अलग तरह के किरदारों के चयन को लेकर कहा- "मैं कोई भी किरदार बहुत सोच समझकर चुनती हूं. मुझे अलग तरह के रोल करना पसंद है. मैं हमेशा देखती हूं कि कोई भी  किदार कितना यूनीक है."

    काजोल ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू करने को लेकर कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए और सिनेमा हॉल में रिलीज होने वाली फिल्मों में काम करने में कोई खास फर्क नहीं है. उन्होंने कहा कि ओटीटी और सिनेमा हॉल में फिल्में रिलीज करने में अधिक स्वतंत्रता मिलती है. त्रिभंगा में मेरा जो किरदार है उसे ओटीटी पर वैसे ही दर्शाया गया है जैसा वो है, शायद सिनेमा हॉल के लिए उसे अधिक कमर्शियल बनाना पड़ता जिसके लिए काट-छांट की जरूरत पड़ती.

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