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कमल हासन ने पीएम मोदी को लिखा ओपन लेटर: 'नोटबंदी से भी बड़ी भूल है ये बेतरतीब Lockdown'

News18Hindi
Updated: April 6, 2020, 9:56 PM IST
कमल हासन ने पीएम मोदी को लिखा ओपन लेटर: 'नोटबंदी से भी बड़ी भूल है ये बेतरतीब Lockdown'
कमल हासन और पीएम नरेंद्र मोदी.

अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन (Kamal Haasan) ने देश में 21 दिनों का लॉकडाउन (Lockdown) लगाने के तरीके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की आलोचना की है.

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अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन (Kamal Haasan) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को एक ओपन लेटर (Open Letter) लिखा है. इस ओपन लेटर में कमल हासन ने देश में 21 दिनों का लॉकडाउन (Lockdown) लगाने के तरीके की आलोचना की गई है. देशभर में ये लॉकडान 25 मार्च से 21 दिनों के लिए लगाया गया है. ये लॉकडाउन कोरोना वायरस (Coronvirus) को तेजी से फैलने से रोकने के लिए लगाया गया है. इसी लॉकडाउन के तहत रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद देशभर में लोगों ने अपने घरों की लाइटें बंद कर अपनी बालकॉनियों और छत से दीप जलाकर रोशनी की.

अपने इस लेटर में कमल हासन (Kamal Haasan's Open letter) ने इस लॉकडाउन को बिना प्‍लानिंग का और नोटबंदी से भी बड़ी गलती बताया है. कमल हासन ने अपने लेटर में लिखा, 'मेरा सबसे बड़ा डर है कि इस बार फिर नोटबंदी जैसी गलती और भी बड़े स्‍तर पर दोहराई जा रही है. जहां नोटबंदी की वजह से गरीबों ने अपनी जमापूंजी और आजीविका खो दी थी, ये बेतरतीब लॉकडाउन हमें जिंदगी और आ‍जीविका दोनों चीजें एक साथ खोने की तरफ ले जा रहा है. गरीबों के पास आपकी तरफ उम्‍मीद से देखने के सिवाए कोई चारा नहीं है. एक तरफ आप सुविधा-संपन्न लोगों से रोशनी करने को कह रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ गरीब आदमी की जो दुर्दशा है वह अपने आप में एक तमाशा बन गई है. जहां आपके शब्‍दों से उनकी बालकनी में तेल के द‍िए जल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गरीब अपना अगला भोजन बनाने के लिए तेल तलाश रहा है.'

वह आगे लिखते हैं, 'आपके आखिरी दो भाषणों में आपको लोगों को सांत्‍वना देनी चाहिए थे जो इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है, लेकिन शायद उससे भी कहीं ज्‍यादा जरूरी चीजें थीं. ये साइकोथेरेपी तकनीक उन 'समृद्ध' लोगों के लिए ठीक हैं, जिनके पास उत्‍साह बढ़ाने के लिए बालकनीहै. लेकिन उनके बारे में क्‍या जिनके पास सिर पर छत तक नहीं है. मुझे विश्‍वास है कि आप सिर्फ 'बालकनी सरकार' बनकर नहीं रहना चाहेंगे जो सिर्फ बालकनी लोगों के लिए काम करती है और गरीबों को पूरी तरह नजरअंदाज करती है, जो हमारे समाज के सबसे अहम अंग हैं, जो हमारे मिडिल क्‍लास, समृद्ध और अमीर वर्ग की जिंदगी को चलाने वाला सबसे हम हिस्‍सा है. गरीबी आदमी कभी भी अखबारों के पहले पन्ने की खबर नहीं बनता लेकिन उनका योगदान हमारे देश की आत्‍मा को बनाने में और हमारी जीडीपी में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.'



 






कमल हासन ने अपने इस लेटर में आगे लिखा है, 'जब भी हमें लगता है कि हमारे पास इस समस्‍या को रोकने का तरीका है, आप अपने कंफर्ट-जोन में जाते हुए कोई चुनावी-कैंपेन स्‍टाइल का आइडिया लेकर आ जाते हैं. ऐसा लगता है कि आप सिर्फ लोगों से जिम्‍मेदार रवैये की और पारदर्शिता की राज्‍य सरकारों से ही उम्‍मीद करते हैं. ऐसे 'बौद्धिक' लोग जो एक उज्‍जवल भविष्‍य और शानदार आज बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उनके बीच में आपकी ऐसी ही राय है. मुझे माफी कीजिए अगर मेरे बौद्धिक लोग शब्‍द के इस्‍तेमाल से आपको तकलीफ हुई हो, क्‍योंकि आपकी सरकार को इस शब्‍द से तकलीफ है.'

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First published: April 6, 2020, 7:43 PM IST
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