कंगना ने मुगल शासक से की उद्धव सरकार की तुलना, कहा- बाबर आया है, 'राम मंदिर' फिर टूटेगा

कंगना ने मुगल शासक से की उद्धव सरकार की तुलना, कहा- बाबर आया है, 'राम मंदिर' फिर टूटेगा
कंगना का मुंबई स्थित ऑफ‌िस.

कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार की तुलना 'बाबर' से की है. साथ ही अपने ऑफिस को राम मंदिर बताया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 9, 2020, 12:24 PM IST
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मुंबई. बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) और महाराष्ट्र सरकार के बीच की तल्‍खी लगातार बढ़ती जा रही है. कंगना रनौत ने बुधवार को अपने मुंबई स्थित ऑफ‌िस पर दोबारा महाराष्ट्र सरकार के लोगों के आने की खबर देते हुए जबर्दस्त नाराजगी जताई है. इतना नहीं कंगना रनौत ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार की तुलना मुगल शासक 'बाबर' से कर दी है. साथ ही उन्होंने चेतवनी देते हुए यह भी कहा कि अगर उनके ऑफ‌िस को गिराया जाता तो राम मंदिर की ही तरह उसी जगह पर फिर से उसका निर्माण किया जाएगा.

कंगना ने एक ट्वीट में कहा, "मणिकर्णिका फ़िल्म्ज़ में पहली फ़िल्म अयोध्या की घोषणा हुई, यह मेरे लिए एक इमारत नहीं राम मंदिर ही है, आज वहाँ बाबर आया है, आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा राम मंदिर फिर टूटेगा मगर याद रख बाबर यह मंदिर फिर बनेगा यह मंदिर फिर बनेगा, जय श्री राम , जय श्री राम , जय श्री राम."

इससे पहले कंगना रनौत ने एक ट्वीट जारी करते हुए लिखा कि महाराष्ट्र सरकार के लोग उनके ऑफ‌िस पर पहुंचे हुए हैं. वे उनके ऑफिस को गिरा सकते हैं. लेकिन महाराष्ट्र के गौरवमयी इतिहास का यह हिस्सा रहा है कि जरूरत पड़ने पर यहां खून भी बहते हैं.





बता दें कि कंगना रनौत के ऑफ‌िस का नाम मणिकर्ण‌िका फिल्म्स है. कंगना के मुताबिक इस प्रोडक्‍शन हाउस की पहली फिल्म 'अयोध्या' थी. अब एक्ट्रेस ने इसकी तुलना राम मंदिर से की है.

अवैध निर्माण को लेकर बीएमसी ने कंगना के बंगले पर नोटिस चिपकाया
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अधिकारियों ने बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के यहां स्थित बंगले के बाहर एक नोटिस चिपकाया है, जिसमें कहा गया है कि नगर निकाय की मंजूरी के बिना इसमें कई बदलाव किए गए हैं. एक ओर जहां बीएमसी ने 'काम-रोको' नोटिस जारी किया है, वहीं कंगना ने खुद पर लगे आरोपों को नकारते हुए आरोप लगाया है कि बीएमसी उन्हें 'डराने' का प्रयास कर रही है. नगर निकाय के एक अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि बीएमसी की टीम उपनगर बांद्रा में अभिनेत्री के पाली हिल बंगले गई थी. वहां नोटिस लेने वाला कोई नहीं था, जिस वजह से नोटिस को वहां चिपका दिया गया.

मुंबई नगर निगम अधिनियम के तहत जारी नोटिस में 'स्वीकृत योजना से परे' चल रहे नवीनीकरण और दूसरे कामों का जिक्र किया गया है. एच-पश्चिम वार्ड के अधिकारी विनायक सत्पुते ने कहा, 'हमने उन्हें इस अवैध निर्माण के संबंध में आवश्यक अनुमतियां जमा कराने के लिये कहा है. ' अधिकारी ने बताया कि नोटिस में बंगले में एक दर्जन से ज्यादा बदलावों को रेखांकित किया गया है, जैसे कि शौचालय को कार्यालय के केबिन में तब्दील किया गया है, जबकि सीढ़ियों के साथ नया शौचालय बनाया जा रहा है.

इसके अलावा नोटिस में बालकनी संलग्न करने और तीसरे तल के विस्तार का भी जिक्र किया गया है. उन्होंने बताया कि बीएमसी ने रनौत से 24 घंटे में इसका जवाब देने को कहा है. उनसे नगर निकाय को यह जानकारी देने को कहा गया है कि इस निर्माण को लेकर क्या उन्होंने कोई मंजूरी ली है ? साथ ही काम रोकने के लिये भी कहा गया है. नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर वह 24 घंटे में इस संबंध में ली गईं अनुमतियां पेश करने में नाकाम रहीं, तो आगे बिना कोई नोटिस दिये इन बदलावों को ढहा दिया जाएगा.

कंगना ने नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, 'सोशल मीडिया पर मेरे मित्रों द्वारा आलोचना किये जाने के बाद बीएमसी आज बुल्डोजर लेकर नहीं आई. इसके बजाय उन्होंने कार्यालय में लीकेज बंद करने के लिये चल रहे कार्य को रोकने के लिये नोटिस चिपका दिया. दोस्तों मैंने बहुत जोखिम लिये हैं, जिसमें आप सभी का बहुत प्यार और समर्थन मिला है.'

कंगना ने यह भी कहा कि वह अपने वकील रिजवान सिद्दीकी के जरिये नोटिस का जवाब दे रही हैं. अभिनेत्री के वकील ने एच/पश्चिम वार्ड के कार्यकारी इंजीनियर को लिखे पत्र में कहा, 'आपको (बीएमसी को) गलतफहमी हुई है. मेरी मुवक्किल (कंगना) के कार्यालय में कोई कार्य नहीं चल रहा. लिहाजा काम रोकने के नोटिस का कोई मतलब नहीं है. ऐसा प्रतीत होता है कि आपने अपनी 'मजबूत स्थिति' का गलत इस्तेमाल कर मेरी मुवक्किल को डराने के लिये यह नोटिस जारी किया है.'

पत्र में कहा गया है कि रनौत सात दिन में कानूनी रूप से नोटिस का जवाब देंगी. रनौत ने हाल में एक टिप्पणी में मुंबई की तुलना पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके)से की थी, जिसपर सत्तारूढ़ शिवसेना ने नाराज़गी जताई थी. बीएमसी में भी शिवेसना का शासन है.
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