रिटार्यड IAS अफसर से भिड़ीं अभिनेत्री कंगना रनौत, कहा- प्रधानमंत्री देश के लिए पिता समान

रिटायर्ड IAS ऑफिसर से कंगना रनौत की भिड़ंत. (फोटो साभार: kanganaranaut/Instagram/Surya Pratap Singh IAS Rtd/Tweet)

रिटायर्ड IAS ऑफिसर से कंगना रनौत की भिड़ंत. (फोटो साभार: kanganaranaut/Instagram/Surya Pratap Singh IAS Rtd/Tweet)

कंगना रनौत (Kangana Ranaut) देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के समर्थन में एक रिटायर्ड आईएएस से भिड़ गई हैं. इस समय कंगना सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 24, 2021, 10:15 PM IST
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मुंबई. कोरोना वायरस की सेकेंड वेव (Second Wave Of Coronavirus) ने देश को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है. हर दिन संक्रमितों के बढ़ते आंकड़ें दहशत फैलाने वाले हैं. देश की जनता बुरी तरह महामारी के संकट से जूझ रही है. लोग इलाज की कमी से कोरोना के शिकार होते जा रहे हैं. ऑक्सीजन और दवाओं की किल्लत के बाद पीएम मोदी (PM Modi) भी लोगों के निशाने पर आ गए हैं. जैसे ही पीएम मोदी निशाने पर आए उनके समर्थक सोशल मीडिया पर बचाव में उतर आए. बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने पीएम को फादर ऑफ नेशन  बता दिया.

जब ट्विटर पर हैशटैग #भारत_का_वीर_पुत्र_मोदी ट्रेंड करने लगा तो इस हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए कंगना ने लिखा ‘जब आपके पास दुनिया का सबसे काबिल नेता हो, तो खुद प्रधानमंत्री बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उनका समर्थन करो, यही हमारा धर्म और कर्म है.



कंगना रनौत के इस ट्वीट पर एक रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर सूर्य प्रताप सिंह ने आपत्ति जताई. रिटायर्ड आईएस अधिकारी ने कंगना के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए लिखा है कंगना जी, आप प्रधानमंत्री की समर्थक हैं या उनकी धुर विरोधी ? क्यूंकि इस वक्त पर उनकी छवि बिगाड़ने के लिए ऐसा ट्रेंड कोई दुश्मन ही करवा सकता है. जब चारों तरफ लाशें ही लाशें हैं, तब आपका ट्रेंड किसी की 'मैयत' में पटाखे फोड़ने जैसा कृत्य है. आयोडिन युक्त नमक का सेवन करो बेटा'.




कंगना रनौत के साथ-साथ कई लोगों ने पीएम को लेकर कमेंट करने पर आपत्ति जताई है. लेकिन ये भी सच है कि देश में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं. इन दिनों कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं. हर तरफ लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं. अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म होते जा रहे हैं. जिनके प्रियजनों के जीवन की डोर ऑक्सीजन सिलेंडर से बंधी है, वे रुपए की परवाह किए बिना मार्केट के चक्कर काट रहे हैं. हालात ये हो गए हैं कि आईसीयू में जितने मरीज अंदर उससे ज्यादा बाहर स्ट्रेचर पर पड़े हैं. मरीज सांस की आस में तड़प रहे हैं तो वहीं मरीजों के परिजन इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. ऐसे में लोग देश के हेल्थ सिस्टम को कोसते नजर आ रहे हैं.
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