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कार्तिकेय 2 हो या कांतारा, 'धर्म' के नाम पर हिट होने का मिल गया फॉर्मूला

ऋषभ शेट्टी की फिल्म कांतारा कन्नड़, तमिल और हिंदी पट्टी के सिनेमाघरों में शानदार बिजनेस कर रही है.

ऋषभ शेट्टी की फिल्म कांतारा कन्नड़, तमिल और हिंदी पट्टी के सिनेमाघरों में शानदार बिजनेस कर रही है.

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दिल्ली. धार्मिक मान्यताओं और मिथकों के पीछे कुछ सच्चाई छिपी होती है. जैसे गांव की रक्षा के लिए ग्रामीण देवता या जंगल की रखवाली सुनिश्चित करने के लिए जंगल देवता की अवधारणा. प्रकृति से इंसानों का जुड़ाव बनाए रखने के लिए इन मान्यताओं का बड़ा सहारा रहता है. कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ (Kantara) इन्हीं मिथकों और सामाजिक मान्यताओं को कहानी का रूप देकर फिल्मी पर्दे तक ले आई है. इसमें ग्राम-देवता हैं, जंगल पर निर्भर समाज की व्यथा है, सामाजिक द्वंद्व है. इस फिल्म के लेखक और हीरो ऋषभ शेट्टी ने इन विषयों को सिनेमा का रूप देकर पर्दे पर उतारने की सफल कोशिश की है. कन्नड़ के साथ-साथ हिंदी-पट्टी में भी इस फिल्म को दर्शकों ने खूब सराहा है.

ग्राम देवता या धार्मिक विषय पर या धर्म से जुड़ी मान्यताओं से जोड़कर बनी ‘कांतारा‘ पहली फिल्म नहीं है. हाल के दिनों में आई ‘कार्तिकेय’, ‘कार्तिकेय 2‘, ब्रह्मास्त्र या फिर जल्द ही रिलीज होने वाली ‘राम सेतु‘ और अगले साल पर्दे पर दिखने वाली प्रभाष की ‘आदिपुरुष‘ धार्मिक विषयों को केंद्र में रखकर ही बनाई गई हैं. गौर करने वाली बात काल्पनिक कहानी पर ‘बाहुबली’ बनाकर बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने वाला साउथ सिनेमा, इन दिनों धर्म आधारित विषयों को प्रमुखता दे रहा है. कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की ‘केजीएफ 2’ और पिछले साल की ‘पुष्पा‘ को छोड़कर दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की कई सुपरहिट फिल्में धार्मिक विषयों से ही जुड़ी हैं. ऐसा जैसे कि साउथ सिनेमा को सुपरहिट होने का फॉर्मूला ‘हिंदू धर्म’ में ही मिल गया हो.

बजट छोटा, कमाई बड़ी

‘कांतारा’ रिलीज होने के पहले ही दिन कन्नड़ हो या हिंदी या फिर तमिल, सभी भाषाओं में जबर्दस्त बिजनेस कर रही है. महज 15 करोड़ रुपए के बजट में बनी यह फिल्म करीब 20 दिनों में 150 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है. इससे पहले कार्तिकेय 2 भी 30 करोड़ के बजट से पर्दे पर आई थी. निखिल सिद्धार्थ की इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया. भारी-भरकम स्टार कास्ट और बड़े बजट से इतर, इन फिल्मों ने छोटे निर्माताओं को जरूर राहत पहुंचाई होगी. कोई शक नहीं कि आने वाले दिनों में छोटे बजट की बड़ी कमाई करने वाली ये फिल्में ट्रेंड-सेटर के तौर पर देखी जाएं.

कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की बल्ले-बल्ले

रोचक तथ्य यह है कि रणबीर कपूर की ‘ब्रह्मास्त्र’ मिथकों को समेटकर बनाई गई है. वहीं मणिरत्नम की PS-1 दमदार कहानी के साथ पर्दे पर आई थी. लेकिन हिंदी-पट्टी के दर्शकों ने ‘कांतारा’ के प्रति जो लगाव दिखाया, वह इन दोनों फिल्मों को न मिल सका. ‘कांतारा’ की कहानी, इसकी प्रस्तुति, सिनेमेटोग्राफी, बैकग्राउंड का संगीत और सबसे बढ़कर इसके लेखक और मुख्य कलाकार ऋषभ शेट्टी के प्रयास को सिनेमा दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है. कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की इस साल यह दूसरी पेशकश है. इससे पहले कोलार गोल्ड माइंस के इतिहास पर बनी केजीएफ-2 आई और सुपर-डुपर हिट साबित हुई. ‘कांतारा’ भी मूल रूप से कन्नड़ में बनी है और इसकी तुलना भी केजीएफ-2 से की जा रही है. फिल्म ने जिस तरह रिलीज होने के साथ ही पहले कन्नड़, फिर हिंदी और अन्य भाषाओं में धमाकेदार आगाज किया है, उससे यह तुलना बेमानी भी नहीं लग रही.

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कांतारा और केजीएफ

कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की दोनों सफल फिल्मों (KGF-2 & Kantara) की तुलना अगर ‘ब्रह्मास्त्र’ और ‘पीएस-1’ से करें, तो एक बात सरलता से सामने आती है. दोनों ही फिल्में समाज और इतिहास से जुड़ी है. केजीएफ (दोनों पार्ट) जहां सोने की खदानों से बनी आर्थिक दुनिया को ढहाने वाले समाज से उभरे नायक का तथ्यात्मक इतिहास है. वहीं ‘कांतारा’ जंगल में रहने वाले उस समाज की कहानी है, जो अपनी संस्कृति और प्रकृति से प्रेम करता है. ऋषभ शेट्टी ने मूल निवासियों की जंगल के प्रति संवेदनशीलता को खूबसूरती से उकेरा है. कहने का मतलब यह है कि इतिहास की परतें खंगालकर निकाली गई कहानी अगर तथ्यों के साथ पेश की जाए, तो उसे दर्शक पसंद करते हैं. दोनों कन्नड़ फिल्में इसका उदाहरण हैं.

Tags: Entertainment Special, South Film Industry

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