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जानिए बालीवुड में कैसे हमेशा धाक जमाए रखा लखनऊ, अब यहां बनेगा और ज्यादा सिनेमा

भाषा
Updated: January 26, 2020, 6:45 PM IST
जानिए बालीवुड में कैसे हमेशा धाक जमाए रखा लखनऊ, अब यहां बनेगा और ज्यादा सिनेमा
लखनऊ

सनी देओल (Sunny Deol) और अमीषा पटेल (Amisha Patel) की 'फिल्म गदर' की शूटिंग लखनऊ में ही हुई थी और उसके बाद 'जॉली एलएलबी 2 (Jolly LLB 2)', तिग्मांशू धूलिया की 'हासिल' और उमराव जान से लेकर शतरंज के खिलाड़ी तक में लखनऊ की अहम भूमिका है, जानिए कैसे-

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लखनऊ. बालीवुड में इन दिनों फिल्मों के कथानक से लेकर शूटिंग लोकेशन्स तक में नवाबी शहर लखनऊ (Lucknow) छाया हुआ है. हिंदी फिल्म जगत में लखनऊ का योगदान बरसों से रहा है लेकिन फिल्मों में इस शहर के प्रमुखता से उभर कर सामने आने में उत्तर प्रदेश सरकार की फिल्म नीति का भी उल्लेखनीय योगदान रहा है.

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पिछले दिनों नई ‘फिल्म नीति’ घोषित की गयी है. फिल्म निर्माण से सम्बन्धित समस्त सुविधाएं एक स्थान पर उपलब्ध कराने हेतु नोडल एजेंसी के रूप में प्रमुख सचिव सूचना की अध्यक्षता में ‘फिल्म बन्धु उप्र’ का गठन किया गया है. फिल्म बन्धु फिल्म-निर्माण के लिए उपयुक्त वातावरण सृजित कर, फिल्म संबधी गतिविधियों को बढ़ावा देकर प्रदेश को फिल्म निर्माण के हब के रूप में विकसित करने का कार्य करेगा.

इसी संबंध में युवा फिल्मकार दुर्गेश पाठक ने 'भाषा' से कहा, ' प्रदेश सरकार की फिल्म नीति ने बालीवुड निर्माता निर्देशकों को लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश की बेहतरीन लोकेशंस की ओर आकर्षित किया है और इस समय दर्जनों फिल्मों की शूटिंग यहां चल रही है. वैसे भी बॉलीवुड में लखनऊ शहर की धाक कभी कम नहीं रही.' उन्होंने कहा कि सनी देओल (Sunny Deol) और अमीषा पटेल (Amisha Patel) की 'फिल्म गदर' की शूटिंग लखनऊ में ही हुई थी और उसके बाद 'जॉली एलएलबी—2 (Jolly LLB 2)', निर्देशक तिग्मांशू धूलिया की 'हासिल' जैसी फिल्मों सहित फेहरिस्त लंबी है. और अब तो यह नजारा आम है कि लखनऊ की गलियों, चौराहों, पार्कों, होटलों या किसी बस्ती में महाराष्ट्र नंबर प्लेट की गाड़ियां और वैनिटी वैन दिख जाती हैं. और तो और अब तो दक्षिण भारत के निर्माता भी शूटिंग के लिए लखनऊ का रूख करने लगे हैं.

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वरिष्ठ रंगकर्मी आतमजीत सिंह का कहना है कि नौशाद, मजरूह सुलतानपुरी, कैफी आजमी, जावेद अख्तर, अली रजा, भगवती चरण वर्मा, कुमुद नागर, अचला नागर (निकाह, बागबान), वजाहत मिर्जा (मदर इंडिया व गंगा जमुना के लेखक), अमृतलाल नागर, अली सरदार जाफरी व व्यंग्यकार के.पी. सक्सेना (‘लगान’ के लेखक) ने भारतीय सिनेमा को अपनी प्रतिभा से धनी बनाया. लखनऊ की सरजमीं पर बहुत-सी मशहूर फिल्में बनी हैं. बहुत-सी हिंदी फिल्में या तो लखनऊ में बनी हैं या उनकी पृष्ठभूमि लखनऊ रही है और आगे भी यह सिलसिला चलता रहेगा.

नयी फिल्म नीति के साथ ही निर्देशक राजीव तिवारी शहर में बड़े स्टूडियो की स्थापना की जरूरत पर जोर देते हुए कहते हैं कि लखनऊ शहर में जिस दिन फिल्मकारों को बड़े स्टूडियो की सुविधा हासिल हो जाएगी, यह शहर बदल जाएगा, यहां का मिजाज बदल जाएगा और यहां के लोगों का अंदाजे बयां बदल जाएगा.

बालीवुड में दस्तक दे चुके संगीतकार राहुल श्रीवास्तव को लखनऊ शहर में फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएं नजर आती हैं. उनका मानना है कि लखनऊ के आसपास फिल्म सिटी बन जाए तो बहुत से फिल्म निर्माताओं का फोकस उत्तर प्रदेश की ओर हो जाएगा.
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युवा लेखक एवं गीतकार अमरेन्द्र सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश का लोक संगीत इतना धनी है कि अगर इन्हीं लोक धुनों को आधार बनायें तो बालीवुड में संगीत की नयी धारा बह निकलेगी.

फिल्म समीक्षक ए के भोला ने कहा कि लखनऊ में ‘शतरंज के खिलाडी’ और ‘उमराव जान’ जैसी फिल्में बनी हैं और यहां से उठकर बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने वाली हस्तियां आगे भी इस शहर के गली कूचों को रूपहले पर्दे पर उतारती रहेंगी.

राज्य सरकार की नयी फिल्म नीति के तहत राज्य की क्षेत्रीय भाषाओं में बनने वाली फिल्मों को जहां कुल लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान के रूप में दिया जाता है वहीं हिंदी, अंग्रेजी एवं देश की अन्य भाषाओं में निर्मित फिल्मों के लिए अनुदान की सीमा लागत का अधिकतम 25 प्रतिशत है.

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ऐसी फिल्में जिनके कुल शूटिंग दिनों में से कम से कम आधे दिवसों की शूटिंग उत्तर प्रदेश में की गई हो, के लिए अनुदान की अधिकतम सीमा एक करोड़ रुपए निर्धारित है, जबकि फिल्म का दो तिहाई हिस्सा उत्तर प्रदेश में शूट हुआ हो तो अनुदान की अधिकतम सीमा दो करोड रुपए तक होगी. एक से अधिक फिल्मों की शूटिंग उत्तर प्रदेश में करने वाले निर्माताओं के लिए अनुदान की राशि में बढ़ोतरी का प्रावधान है.

इसी तरह यहां शूट की जाने वाली जिस फिल्म के मुख्य पांच कलाकार उत्तर प्रदेश के होंगे, उसके कलाकारों को पारिश्रमिक के रूप में दी जाने वाली धनराशि या सम्मिलित रूप से 25 लाख रुपए, जो भी कम हो, का अतिरिक्त अनुदान दिया जाएगा.

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First published: January 26, 2020, 6:44 PM IST
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