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  • अपनी प्यारी सहेली पद्मा सचदेव के निधन पर नि:शब्द हुईं लता मंगेशकर, जताया शोक

अपनी प्यारी सहेली पद्मा सचदेव के निधन पर नि:शब्द हुईं लता मंगेशकर, जताया शोक

पद्मा सचदेव के निधन पर दुखी हैं लता मंगेशकर. (साभार: Lata Mangeshkar/Twitter)

पद्मा सचदेव के निधन पर दुखी हैं लता मंगेशकर. (साभार: Lata Mangeshkar/Twitter)

डोगरी लोक गीतों से प्रभावित होकर करीब 12 साल की उम्र से ही कविता लिखने वाली पद्मा सचदेव (Padma Sachdev) साहित्य जगत के साथ-साथ फिल्म इंडस्ट्री के लोगों में भी बेहद पॉपुलर थीं. अपने सहज स्वभाव की वजह से नेताओ, खिलाड़ियों और कलाकारों जिससे भी मिलती उससे आत्मीय रिश्ता जोड़ लेती थीं.

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    मुंबई: हिंदी और डोगरी की वरिष्ठ लेखिका पद्मा सचदेव (Padma Sachdev) के निधन की खबर से कला जगत शोकाकुल है. डोगरी लोक गीतों से प्रभावित होकर करीब 12 साल की उम्र से ही कविता लिखने वाली पद्मा साहित्य जगत के साथ-साथ फिल्म इंडस्ट्री के लोगों में भी बेहद पॉपुलर थीं. अपने सहज स्वभाव की वजह से नेताओ, खिलाड़ियों और कलाकारों जिससे भी मिलती उससे आत्मीय रिश्ता जोड़ लेती थीं. प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर (Lata mangeshkar ) के साथ उनका बहुत याराना था. अपनी सहेली पद्मा के निधन पर लता बेहद भावुक हैं.

    लता मंगेशकर ने ट्वीट कर पद्मा सचदेव के साथ पुराने दिनों को याद करते हुए फोटो शेयर कर लिखा ‘मेरी प्यारी सहेली और मशहूर लेखिका, कवयित्री और संगीतकार पद्मा सचदेव के स्वर्गवास की खबर सुनकर मैं नि:शब्द हूं, क्या कहूं ? हमारी बहुत पुरानी दोस्ती थी,पद्मा और उसके पति हमारे परिवार के सदस्य जैसे ही थे. मेरे अमेरिका के शोज का निवेदन उसने किया था.’

    (साभार: Lata Mangeshkar/Twitter)

    लता ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा ‘मैंने उसके डोगरी गाने गाए थे जो बहुत लोकप्रिय हुए थे. पद्मा के पति सुरेंद्र सिंह जी अच्छे शास्त्रीय गायक हैं जिन्होंने मेरा गुरुवाणी का रिकॉर्ड किया था. कई यादें हैं आज मैं बहुत दुखी हूं. ईश्वर पद्मा की आत्मा को शांति प्रदान करें’.

    (साभार: Lata Mangeshkar/Twitter)

    बता दें कि पद्मा सचदेव ने लता मंगेशकर पर एक किताब भी लिखी थी. पद्मा सचदेव बेहद मिलनसार शख्सियत थीं. लता के अलावा अमिताभ बच्चन , इंदिरा गांधी जैसे लोगों के साथ उनका मेलजोल था.साहित्य, कला, संस्कृति और समाज की बेहतर समझ रखने वाली पद्मा के निधन पर लोग दुखी हैं. 4 अगस्त को मुंबई में पद्मा सचदेव का निधन हुआ था.

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    डोगरी की आधुनिक कवयित्री पद्मा सचदेव का कविता संग्रह ‘मेरे गीत’ को 1971 को 1971 में पुरस्कार मिला था. उनकी किताब ‘चित चेते’ के लिए 2016 में 25वें सरस्वती पुरस्कार से सम्मानित की गई थीं. यह उनकी आत्मकथा थी. उनकी किताब ‘बूंद बावड़ी’, ‘अब न बनेगी देहरी’ और ‘जम्मू जो एक शहर था’ उनका एक लेखक के तौर पर दर्द समझ में आता है.

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