सुनिए लता मंगेशकर के पसंदीदा गाने!

यतींद्र मिश्रा की किताब लता सुर गाथा में लता मंगेशकर ने अपने पसंदीदा गीतों का चयन किया है

News18Hindi
Updated: September 28, 2017, 11:53 AM IST
सुनिए लता मंगेशकर के पसंदीदा गाने!
यतींद्र मिश्रा की किताब लता सुर गाथा में लता मंगेशकर ने अपने पसंदीदा गीतों का चयन किया है
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Updated: September 28, 2017, 11:53 AM IST
लता मंगेशकर के चाहने वाले अपनी पसंद के कई गीतों की लिस्ट बता सकते हैं लेकिन यतींद्र मिश्रा की किताब लता सुर गाथा में लता मंगेशकर ने अपने पसंदीदा गीतों का चयन किया है और वो गाने आप यहां सुन सकते हैं.

लता मंगेशकर ने अपने पसंदीदा भजन के अलावा अपने पसंदीदा रोमांस गीत, साथी गायकों के गीत भी चुने हैं और उनकी पसंद के गीतों में कई गीत ऐसे हैं जो ज्यादा लोकप्रिय नहीं रहे हैं.

आज उनके 89वें जन्मदिन पर हम आपको बता रहे हैं आपकी पसंदीदा गायिका की पसंद के गाने, जिन्हें उन्होनें खुद चुना है.



अजी रुठ कर अब (आरज़ू - 1965)

फ़िल्म आरज़ू के इस गीत में लता ने बेहद उँचे स्वर लगाए थे जो उनके लिए भी मुश्किल रहे थे. लेखक हसरत जयपुरी ने एक बेहद रोमांटिक गीत लिखा था लेकिन संगीतकार शंकर जयकिशन की जोड़ी ने इसमें ऊँचे पिच का सुझाव दिया और लता ने उसे बखूबी निभाया.



ढूंढो ढूंढो रे साजना (गंगा जमुना 1961)
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इस गीत में लोक संगीत की छवि थी और यही बात लता जी को प्रिय है. नौशाद के संगीत से सजे इस गीत के बोल लिखे हैं शकील बदांयूनी ने और इस गीत में वैजयंती माला नज़र आती हैं.



गुमनाम है कोई (गुमनाम 1965)
यह गाना आज भी सुनने वालों के अंदर सिरहन पैदा करने का माद्दा रखता है. फ़िल्म गुमनाम का ये बेहद सुरीला लेकिन डरावना गाना लता जी का पसंदीदा टाइटल ट्रैक है जिसके संगीतकार हैं शंकर जयकिशन.



प्यार किया तो डरना क्या (मुग़ल ए आज़म 1960)
हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित फ़िल्मों में से एक मुग़ल ए आज़म के इस गाने को लता मंगेशकर अपना पसंदीदा नृत्य गीत मानती है. इस गाने पर मधुबाला के नृत्य की वो आज भी कायल हैं और नौशाद के संगीत से सजे इस गाने को अक्सर गुनगुना लेती हैं.



रमैया वस्तावैया (श्री 420 1955)
राज कपूर के पसंदीदा गानों में से एक इस गीत को लता अपना पसंदीदा गीत मानती हैं क्योंकि वो इसे कोरस के साथ गाया एक बेहतरीन गीत मानती हैं. संगीतकार जोड़ी शंकर जयकिशन ने इस गाने में कोरस का सुंदर प्रयोग किया है और लता की आवाज़ के साथ कोरस का भी एक अपना सुर है जिसे आप यहां सुन सकते हैं.



ऐ दिले नादाँ (रजिया सुल्तान 1983)
कमाल अमरोही की इस फ़िल्म के इस गीत को लता अपना पसंदीदा दर्द भरा गीत मानती हैं. अपनी ही परछाई को देखती रजिया सुल्तान के दर्द से लता कहीं कहीं खुद को भी जुड़ा हुआ मानती हैं.



आएगा आनेवाला (महल 1949)
लता को बॉलीवुड में लाने वाले इस गीत में आप ये देख पाएंगे की उनकी गायिकी थोड़ी क्लासिकल की तरफ झुकी हुई है और कुछ नए प्रशंसक / श्रोता इसे शमशाद बेगम का गाना कहने की भी गुस्ताखी भी कर जाते हैं. लेकिन इस गाने को लता ने गाया है और क्या खूब गाया है.



आ जाने जां (इंतकाम 1969)
हेलेन पर फ़िल्माया ये कैबरे गीत, लता मंगेशकर का पसंदीदा कैबरे गीत है और इसकी कोई ख़ास वजह वो नहीं बताती. बस, ये सुनने में मुझे अच्छा लगता है और शायद हेलेन जी का नृत्य भी इसपर बहुत अच्छा बन पड़ा है!



तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी (मासूम 1983)
आर डी बर्मन के बहुत जल्दी चले जाने का दुख लता को हमेशा रहेगा. आर डी, लता को बहुत इज्जत देते थे और लता ने उन्हें अपने पिता सचिन देव की छाया से निकलकर एक सफल संगीतकार बनते देखा था. इस गाने को वो आर डी के साथ गाए अपने पसंदीदा गानों में मानती हैं



लग जा गले (वो कौन थी 1964)
मदन मोहन, लता के पसंदीदा संगीतकार थे और उनके साथ एक खास रिश्ता वो साझा करती थीं. इस गीत को लता अपनी यादगार या धरोहर की तरह भी मानती हैं और मदन मोहन के साथ गाया गया अपना पसंदीदा गाना भी. दो प्रेमियों के मिलन की आखिरी रात को जिस खूबसूरती से ये गीत पेश करता है, वो कहीं दिखाई नहीं देता.

ये वो चंद गीत हैं जिन्हें लता अपनी पसंदीदा लिस्ट में शुमार करती हैं लेकिन अगर आपके पसंदीदा गीत इसमें शामिल नहीं हैं तो हमें ज़रुर बताएं, हमारे फ़ेसबुक पेज पर.
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