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लता मंगेशकर के 92वें जन्मदिन पर 26 साल बाद रिलीज किया जाएगा उनका गाना 'ठीक नहीं लगता'

28 सितंबर को लता मंगेशकर 92वें साल की हो जाएंगी (फोटो साभारः Instagram @lata_mangeshkar)

28 सितंबर को लता मंगेशकर 92वें साल की हो जाएंगी (फोटो साभारः Instagram @lata_mangeshkar)

'ठीक नहीं लगता' के बोल वाले गीत की रिकॉर्डिंग एक फिल्म के लिए की गई थी, जिसे बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. इस गाने को अब विशाल भारद्वाज के लेबल 'वी बी म्यूजिक' और 'मोज' ऐप के सहयोग से मंगेशकर के 92वें जन्मदिन पर जारी किया जाएगा.

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    मुंबई. फिल्मकार विशाल भारद्वाज और गीतकार गुलजार ने कहा है कि 26 साल पहले इन दोनों ने लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के साथ एक गीत रिकॉर्ड किया था जिसे मंगलवार को जारी किया जाएगा. ‘ठीक नहीं लगता’ के बोल वाले गीत की रिकॉर्डिंग एक फिल्म के लिए की गई थी, जिसे बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.

    इस गाने को अब भारद्वाज के लेबल ‘वी बी म्यूजिक’ और ‘मोज’ ऐप के सहयोग से मंगेशकर के 92वें जन्मदिन पर जारी किया जाएगा. सोमवार को डिजिटल माध्यम से आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने ‘माचिस’ फिल्म के भी पहले मंगेशकर के साथ ‘ठीक नहीं लगता’ गाने की रिकॉर्डिंग की थी. यह गाना किसी और फिल्म के लिए लिखा गया था, जो नहीं बन पाई.

    फिल्मकार ने संवाददाताओं से कहा, ‘उस समय हमने इस गीत को भी रिकॉर्ड किया था. दुर्भाग्य से वह फिल्म, जिसके लिए यह गाना बना था, बन नहीं पाई. उसके साथ यह गाना भी खो गया था. लंबे समय तक, हम फिल्म को फिर से बनाने के बारे में सोचते रहे, लेकिन 10 साल बाद स्पष्ट हो गया कि यह फिल्म नहीं बन सकती.’ भारद्वाज ने कहा कि जिस टेप पर लता मंगेशकर का गाना रिकॉर्ड हुआ था वह खो गया और रिकॉर्डिंग स्टूडियो भी बंद हो गया. उन्होंने बताया कि दो साल पहले उन्हें एक अन्य रिकॉर्डिंग स्टूडियो से कॉल आई कि उन्हें एक टेप मिला है जिस पर भारद्वाज का नाम लिखा है.

    भारद्वाज ने कहा, ‘जब हमने जांच की तो पाया कि उसमें वही गीत था. लताजी की आवाज दूसरे ट्रैक पर थी. इसलिए हमने गीत को फिर से ओर्केस्ट्रेट किया क्योंकि वह सुनने में थोड़ा पुराना लग रहा था. उस गीत का खोने के बाद फिर से मिलना अहम था.’ मंगेशकर ने एक ऑडियो संदेश में गुलजार और भारद्वाज दोनों की प्रतिभा और गीत को वापस लाने की सराहना की. गुलजार ने भारद्वाज को ‘गीत खोजने वाला कोलंबस’ करार दिया और कहा कि यह गीत आज भी प्रासंगिक है.

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