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Oscar 2019 : एक औरत जो पूरी फिल्म यूनिट के बराबर है

Oscar 2019 : एक औरत जो पूरी फिल्म यूनिट के बराबर है

रीमा दास

रीमा दास

एक्टर बनना चाहती थीं रीमा दास, मगर टीचर बन गईं. सालों बाद पता चला फिल्ममेकिंग है असली सपना. अब 19 सितंबर को रिलीज होने वाली है विलेज रॉकस्टार

  • News18Hindi
  • Last Updated :
    ऑस्कर. किसी भी फिल्ममेकर के लिए ये एक ऐसा शब्द है, जिसे चाहकर भी कोई नजरअंदाज नहीं कर पाता है. फिर भी अब तक कोई भारतीय फिल्म ऑस्कर नहीं जीत पाई है. हर साल कई उम्मीदें बंधती हैं और एक ही झटके में टूट जाती हैं. फिर भी ऐसा लगता है कि ये साल अलग है. रीमा दास की 'विलेज रॉकस्टार' को ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया है. फिल्म पहले ही नेशनल अवॉर्ड समेत कई पुरस्कार जीत चुकी है.

    खुशी का मौका है. फिल्म अच्छी है. दुनियाभर में चर्चा है. ऐसे में चाहा कि रीमा दास का इंटरव्यू किया जाए. बहुत लंबी न सही, लेकिन थोड़ी-सी ही बात हो जाए. मगर बीते एक हफ्ते में की गई कोशिशों के बावजूद ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया है. ये सब यहां लिखने की वजह ये नहीं कि इस बात से निराशा या नाराजगी है. इसके उलट ये सब लिखते हुए एक खुशी है.

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    खुशी इसलिए क्योंकि रीमा दास से बात ना हो पाने की वजह ये नहीं कि वो हमें वक्त नहीं देना चाहतीं. वजह ये है कि रीमा दास अब भी इस फिल्म को अपने कंधे पर लेकर चल रही हैं. फिल्म की मेकिंग से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन तक हर चीज का जिम्मा खुद उनके सिर पर है.

    उनके साथ कोई लंबी-चौड़ी क्या, छोटी-मोटी टीम भी नहीं है. वो खुद एक टीम हैं. ये बातें उनके बारे में पहले भी सुनी गई हैं. लेकिन उनसे बात करने के लिए जब पीआर से संपर्क किया, तो मालूम चला कि रीमा अब भी किस तरह फिल्म से जुड़े हर एक छोटे-बड़े काम में खुद जुटी हुई हैं. बकौल पीआर मौली सिंह- ऐसा नहीं है कि रीमा वक्त नहीं देना चाहतीं, मगर वो अकेले सारे काम कर रही हैं, उन्हें एक पल का भी वक्त नहीं मिलता मीडिया से बात करने के लिए.'

    हमें कल या परसों शायद रीमा से वक्त मिल जाएगा. बात भी हो जाएगी. खबर भी लिख दी जाएगी. मगर खास बात ये है कि इंटरव्यूज देकर पॉपुलैरिटी बटोरने की बजाय रीमा दास अपने काम में चुपचाप जुटी हैं.

    यहां देखें फिल्म का ट्रेलर


    उनके बारे में काफी कुछ कहा जा चुका है, मगर जो पाठक ज्यादा नहीं जानते उन्हें बताने के लिए अब भी काफी कुछ है.

    तो आखिर कौन हैं रीमा दास और कहां से आई हैं
    मूल रूप से असम से जुड़ीं रीमा दास ने पुणे यूनिवर्सिटी से सोशियोलॉजी में मास्टर्स करने के बाद नेट का एग्जाम पास किया और टीचर बन गईं. मगर वह एक्ट्रेस बनना चाहती थीं, इसलिए स्कूल में होने वाले नाटकों में ही एक्टिंग करती रहीं. इसी दौरान साल 2003 में उनका मुंबई जाना हुआ. यहां उन्होंने पृथ्वी थियेटर में प्रेमचंद की कहानी गोदान की रंगमंचीय प्रस्तुति में अहम भूमिका अदा की. मुंबई आने के बाद बॉलीवुड को लेकर रीमा की दिलचस्पी पैदा हुई और उन्होंने एक सिरे से सिनेमा को पढ़ना-समझना शुरू किया.

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    बिना सीखे कैसे शुरू हुई फिल्ममेकिंग
    नतीजे में बनी रीमा की पहली शॉर्ट फिल्म प्रथा. ये बात है साल 2009 की. इसके बाद उन्हें समझ आया कि उनका असली सपना फिल्म बनाना है. इसके बाद रीमा ने दो और शॉर्ट फिल्में बनाईं. फिल्ममेकिंग सीखने के लिए वो लगातार सिनेमा से जुड़ा लिटरेचर पढ़ती रहीं. बारीकी से फिल्मों को स्टडी करती रहीं. देखते ही देखते रीमा वन वुमन क्रू बन गईं. राइटिंग, डायरेक्शन, प्रोडक्शन, एडिटिंग, शूटिंग से लेकर कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग तक सब कुछ रीमा के ही जिम्मे था.

    इसके बाद उनके दिमाग में आया विलेज रॉकस्टार का आइडिया. लोकेशन बना उनका अपना गांव. स्टार कास्ट में शामिल हुए उसी गांव के बच्चे. वक्त लगा तीन साल का. और अब नेशनल अवॉर्ड और तमाम दूसरे अवॉर्ड्स के बाद सामने है ऑस्कर की मंजिल.

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    Tags: Oscars 2018

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