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जब तक मर्द की नज़र औरत को लेकर बदलेगी नहीं, तब तक ये सब रुकेगा नहीं: महेश भट्ट

जब तक मर्द की नज़र औरत को लेकर बदलेगी नहीं, तब तक ये सब रुकेगा नहीं: महेश भट्ट

महेश भट्ट ने बताया कि आलोक नाथ और विनता नंदा, दोनों ही उनके परिचित हैं और उन दोनों के बीच इस तरह की बात का आना अपने 'घर' में आग लगने जैसा है.

    न्यूज़ 18 हिंदी के साथ खास बातचीत के दौरान महेश भट्ट ने वर्तमान में बॉलीवुड को हिला देने वाले #MeToo कैंपेन के बारे में अपने विचार रखे. पेश है हिमानी दीवान के साथ हुई इस खास बातचीत का अंश.




    ये एक ऐसी नाज़ुक घड़ी है जिसे हमें सावधानी से परखना होगा. ये जो औरतों ने अपनी चुप्पी जो सालों से ओढ़ रखीं थी वो कहीं पर आज उससे मुक्त होती नज़र आ रही हैं और अगर उनके साथ में ये हुआ है, ये शरीफ, नेक औरतें हैं, इनकी बात पर आप भरोसा कर सकते हैं, वो क्यों अचानक, चीख कर ऐसी बातें कहेंगी?

    अगर वो ऐसा कुछ कह रही हैं तो उसे ठहर कर सुनना ज़रूरी है, लेकिन जिसपर उंगली उठाई जा रही है, उसके पक्ष को भी सुनना बहुत ज़रूरी है. हम उस तहज़ीब के लोग है कि जब तक आप किसी इंसान के बारे में किए जा रहे दावों की पूरी जांच न कर लें और जब तक न्यायलय इस बात का फैसला न सुना दे, उस आदमी को 'निर्दोष' कहलाने का अधिकार है.

    एक और जो समस्या है, वो ये कि ये जुर्म बंद दरवाज़ों में होते हैं, इनका कोई सूबूत निकालना मुश्किल है. सीसीटीवी कैमरा के आने से पहले ये हादसे हुए हैं. अगर अदालत में भी ये मामला गया तो कैसे साबित होगा. यहां तो रेप के केस में भी निचली अदालत सज़ा देती है, तो हाईकोर्ट में उनको बरी किया जाता है क्योंकि इन अपराधों को सिद्ध नहीं किया जा सकता है.

    ये जब तक सज़ा के तौर पर लोगों को दिया नहीं जाएगा तब तक इस हालात का बदलना मुश्किल लगता है. ऐसे ही ट्विटर पर, सोशल मीडिया पर शोर मचता रहेगा.

    विनता नंदा की पोस्ट के बाद आलोक नाथ आलोचनाओं में फंस गए हैं


    मुझे तो ताज्जुब इस बात का है कि विनता नंदा हमारी साथी रही है. हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर ऐसे मुद्दों पर लड़ी हैं जहां हमने लोगों के अधिकारों की लड़ाई की है. तो ऐसी क्या मजबूरी थी कि वो अब तक क्यों नहीं बोली?

    इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि उसको अब नहीं बोलना चाहिए. अगर जख्म उसका हरा हो गया, तो हुआ. मगर हम भी चौंक गए क्योंकि आलोक नाथ पर उंगली उठी है. आलोक, हमारा काम  का साथी रहा है. इस तरह से तो यह हमारे घर की बात है, उंगली उठाने वाला हमारा अपना, जिसपर उंगली उठाई जा रही है वो हमारा अपना, तो घर में आग तो लगेगी ही.

    लेकिन अगर आप इसे सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री की समस्या बता कर छोड़ देंगे तो आप ग़लत कहेंगे. ये बात तो समाज के तमाम हिस्सों में है. जब तक आप इसका समाधान अपने आंतरिक समाज में नहीं ढूंढेगे, तब तक समस्या बनी रहेगी.

    जब तक मर्द की नज़र औरत को लेकर बदलेगी नहीं, तब तक ये सब रुकेगा नहीं. आप दुर्गा पूजा मनाते हैं, औरत को पूजते हैं और फिर उसी के साथ बदसलूकी करते हैं. तो जब तक आप अपना अंर्तमन ठीक नहीं करेंगे तब तक किसी सज़ा, किसी हैशटैग, किसी कैंपेन से कोई फायदा नहीं होगा.

    Anu malik
    सोना मोहापात्रा ने अपनी पोस्ट में लिया अनु मलिक का नाम.


    हां, ये मुबारक समय है. महिलाएं सामने आ रही हैं. इस तरह आवाज़ उठनी चाहिए क्योंकि इससे ग़लत करने वालों के मन में डर बैठता है और वो समझ जाते हैं कि अब ये चल नहीं पाएगा. अब औरत चुप नहीं बैठेगी!

    लेकिन हमें इस बात को भी तय करना होगा कि वर्कस्पेस में हैरेसमेंट और रिश्तों में कुछ ग़लत हो जाना अलग अलग बातें हैं. रिश्तों में कड़वाहट आने पर यौन शोषण होता है पर इसे आप वर्कप्लेस से न जोड़ें.

    मर्द अपनी पोज़ीशन का फायदा उठाते हैं, वो अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि हमेशा मर्द ही ऐसा करते हैं. हमने तो औरतों को भी ऐसा करते देखा है. बस दिक्कत ये है कि औरतें ऐसी ताकतवर जगहों पर कम हैं, इसलिए वो ऐसा करती कम दिखती हैं.

    लेकिन हमें इसे ध्यान से हैंडिल करना होगा क्योंकि कहीं ऐसा न हो कि ये बात इसी तरह से सोशल मीडिया पर ही शुरु होकर वहीं खत्म हो जाए.

     

    Tags: Aloknath, Mahesh bhatt, Me Too, Vinita Nanda, Vinta nanda

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