मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ़ झांसी
3/5
पर्दे पर : 25 जनवरी 2019
डायरेक्टर : कंगना रनौत
संगीत : शंकर-एहसान-लॉय
कलाकार : कंगना रनौत, अतुल कुलकर्णी, अंकिता लोखंडे
शैली : पीरियड ड्रामा
यूजर रेटिंग :
0/5
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Manikarnika Movie Review: सिंधिया परिवार को विवादित तरीके से दिखाती है फिल्म

इस फिल्म की रिलीज़ से पहले करणी सेना इस फिल्म को लेकर विरोध कर रही थी क्योंकि उनका आरोप था कि इस फिल्म में रानी लक्ष्मीबाई की इमेज को ठीक से नहीं पेश किया गया. लेकिन फिल्म में महारानी के किरदार को गरिमामई तरीके से दिखाया गया है.

Sushant Mohan | News18Hindi
Updated: January 25, 2019, 8:01 AM IST
Manikarnika Movie Review: सिंधिया परिवार को विवादित तरीके से दिखाती है फिल्म
कंगना रनौत
Sushant Mohan | News18Hindi
Updated: January 25, 2019, 8:01 AM IST
भारत में राजा-महाराजाओं पर बनी किसी फिल्म के साथ अगर ‘मणिकर्णिका’ की तुलना करें तो ये फिल्म अब तक की सबसे बेहतर फिल्माई गई फिल्म कही जा सकती है. पहले ही सीन से आप फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर की तारीफ करने लगेंगे.

इस फिल्म के निर्देशकों कंगना रनौत और कृष के बीच फिल्म से पहले मतभेद की खबरें आई थी और कई बार फिल्म पर दो अलग-अलग निर्देशकों की छाप दिखी भी है. फिल्म कई जगह पर कमज़ोर पड़ती है पर पर्दे पर सुंदर भी दिखती है. भव्य सेट 'बाहुबली' की याद दिलाते हैं, मराठा साम्राज्य 'बाजीराव मस्तानी' की याद दिलाता है, किले से लड़ती फौज 'पद्मावत' की याद दिलाती है और फिर जिस अंदाज़ में कंगना रनौत अकेले ही मार-काट मचाती हैं वो हॉलीवुड फिल्म 300 की याद दिला देता है.

कुल मिलाकर यह फिल्म एक मिक्सचर की तरह है जिसमें आपको सब दिखेगा. फिल्म में अमिताभ का वाइस ओवर आते ही लगान की याद आती है. फिर हाल ही में 'ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' में अंग्रेज़ो से लड़ते भारतीय लुटेरों के बाद यहां भी अंग्रेज़ो से लड़ते भारतीय सिपाही आपको 'डेजा वू' का एहसास करा देते हैं. लेकिन ये फिल्म ठग्स से काफी बेहतर है.



कहानी:

फिल्म की कहानी रानी लक्ष्मी बाई की कहानी है. उनके जन्म से लेकर उनके झांसी आने तक और फिर मराठा साम्राज्य को फिर से जगाने के उनके योगदान की कहानी को कहती ये फिल्म मणिकर्णिका को एक श्रद्धांजलि ही है. मणिकर्णिका (कंगना रनौत) के जन्म के समय ही भविष्यवाणी हो जाती है कि वो इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाएंगी. पेशवा बाजीराव द्वितीय (सुरेश ओबेरॉय) के सरंक्षण में तात्या टोपे (अतुल कुलकर्णी) के साथ बड़ी हुई मनु का विवाह अपने राज्य को अंग्रेज़ो से बचाने के लिए एक अदद वारिस का इंतज़ार करते झांसी के राजा गंगाधर राव (जिशू सेनगुप्ता) से होता है. बेटा होता है लेकिन एक षड़यंत्र के तहत उसे मार दिया जाता है, इससे पहले कि वो एक बालक को गोद लेते, राजा की भी मौत हो जाती है. ऐसे में राज्य का ज़िम्मा लक्ष्मीबाई अपने कंधो पर ले लेती है और शुरु होती है अंग्रेज़ी हुकूमत से जंग.

अभिनय:
अभिनय के लिहाज से यह पूरी तरह से कंगना रनौत की फिल्म है. इस फिल्म में कंगना के अलावा प्रभावित करने का काम लक्ष्मी बाई के सिपाहसालार और तोपची गौस खान के किरदार में सिर्फ डैनी कर पाते हैं. बायोस्कोप वाला के बाद उन्हें पर्दे पर देखना अच्छा लगता है, वो 'ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' में अगर अमिताभ के आज़ाद वाले किरदार को करते तो ज्यादा मज़ा आता. उन्हें देखकर खुदा गवाह का खुदा बख्श याद आ जाता है. डैनी के अलावा ब्रिटिश जनरल ह्यू रोज़ के किरदार में रिचर्ड कीप कुछ प्रभाव छोड़ते हैं वर्ना कुलभूषण खरबंदा, ज़ीशान अयूब, अंकिता लोखंडे फिल्म में कंगना के आगे दब से जाते हैं और वे दबे भी क्यों न, कंगना इस फिल्म की जान हैं. इंटरवल से पहले तक आप उनके अंदर त्रुटियां निकाल लेंगे लेकिन इंटरवल के बाद जैसे वो कुछ खा लेती है. ऐसे दो-तीन दृश्य हैं जिसमें कंगना पर फोकस है और उन्हें या तो कैमरा की ओर चलकर आना है या कैमरा के सामने पोज़ करना है और वो बेहतरीन तरीके से इसे करती हैं. लगता है कि वो किरदार में रम गई हैं.
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फिल्मांकन:
इस फिल्म के फिल्मांकन की अगर बात नहीं हुई तो ये इस फिल्म के साथ ज्यादती होगी. हाल फिलहाल में बाहुबली के बाद किसी फिल्म को फिल्माए जाने पर अगर मेहनत हुई है तो वो है मणिकर्णिका. सेट से लेकर कैमरा एंगल तक सबकुछ बेहतर है और किसी पीरियड ड्रामा में दिखाया गया बेस्ट एक्शन आपको इस फिल्म में मिलेगा. आप पूरी फिल्म में शायद उकताहट महसूस करें लेकिन एक बार एक्शन शुरू हुआ तो आप स्क्रीन से नज़रें हटा नहीं पाएंगे.

विवाद:
इस फिल्म की रिलीज़ से पहले करणी सेना इस फिल्म को लेकर विरोध कर रही थी क्योंकि उनका आरोप था कि इस फिल्म में रानी लक्ष्मीबाई की इमेज को ठीक से नहीं पेश किया गया. लेकिन फिल्म में महारानी के किरदार को कहीं ग़लत नहीं दिखाया गया. अगर बस्ती में नाचने के एक दृश्य को छोड़ भी दिया जाए तो लक्ष्मीबाई के किरदार को खूबसूरती और गरिमामई तरीके से दिखाया गया है और अंग्रेज़ी अफसर से प्रेम प्रसंग दिखाने जैसा कोई दृश्य फिल्म में नहीं है. अगर कोई विवाद हुआ तो बस सिंधिया परिवार को हो सकता है जिनके राजघराने को इस फिल्म में सीधे तौर पर डरपोक दिखाया गया है. मणिकर्णिका एक लंबी फिल्म है जिसे छोटा किया जा सकता था और कुछ और बड़े नाम (एक्टर) अगर इस फिल्म में होते तो फिल्म वाकई भारत की सबसे बेहतरीन पीरियड फिल्म बन सकती थी लेकिन कंगना को जिस हिट की तलाश है, ये वो फिल्म साबित हो सकती है, 3 स्टार!

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डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
3/5
स्क्रिनप्ल :
3/5
डायरेक्शन :
2.5/5
संगीत :
3.5/5
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