मनोज बाजपेयी बोले- किसी भी इंडस्ट्री या सोसाइटी के लिए बैन-बॉयकॉट की बात अच्छी नहीं होती

मनोज बाजपेयी ने कहा कि, OTT प्लेटफॉर्म उनके करियर को सकारात्मक तरीके से अफेक्ट कर रहा है.

मनोज बाजपेयी ने कहा कि, OTT प्लेटफॉर्म उनके करियर को सकारात्मक तरीके से अफेक्ट कर रहा है.

मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) ने कहा कि, किसी भी इंडस्ट्री या सोसाइटी के लिए बैन और बॉयकॉट की बात नहीं करनी चाहिए. मैं नहीं चाहता कि ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट हटा दिए जाएं जिनसे मैं असहतम हूं, क्योंकि मैं मानता हूं कि हेल्दी डिबेट और डिस्कोर्स स्वस्थ लोकतंत्र का संकेत है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 6:29 PM IST
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मुंबई. स्ट्रीमिंग प्लेटफार्मों पर कंटेंट कंज्म्पशन के बढ़ने के इस दौर में मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) न केवल वेब पर सफलता का आनंद ले रहे हैं, बल्कि यह भी बात सामने आई है कि उनकी पुरानी फिल्मों को दर्शक फिर से खोजकर देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि OTT उनके करियर को सकारात्मक तरीके से अफेक्ट कर रहा है.

बाजपेयी ने आगे कहा कि, ‘जो सम्मान मुझे वर्षों से मिला है वह बढ़ा है और ओटीटी के इमर्जेंस ने इसे और बढ़ाया है. आज, लोग मेरी फिल्मों को देख रहे हैं. मेरे हाल ही रिलीज कई फिल्मों पर ध्यान दिया जा रहा है लेकिन वे तब मेरी फिल्में देखने नहीं आए, जब उन्हें सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया.

थिएटर भी, इन फिल्मों को पर्याप्त शो या स्लॉट या सम्मान वापस नहीं देते हैं. पिंजर (2003), कौन (1999) को तो दर्शक पहले से पसंद कर ही रहे हैं, लेकिन अब दर्शकों सत्या (1998) और शूल (1999) भी पसंद कर रहे हैं. इतने वर्षों के बाद भी तारीफ हासिल करना, वास्तव में इंस्पायरिंग और इनकरेजिंग है.

अपने हिट वेब शो, ‘फैमिली मैन’ और ओटीटी बूम के साथ, पद्म श्री से सम्मानित एक्टर अभिनेता ने कहा कि आज अभिनेताओं के पास बहुत सारे विकल्प हैं, लेकिन सावधान करते हैं कि उन्हें बुद्धिमानी से फिल्मों को चुनना चाहिए. जल्दी न करें. मेरे सामने कई रोमांचक, दिलचस्प और आउट-ऑफ-द-बॉक्स कहानियां पेश की गई हैं, लेकिन मैं इनमें से किसी प्रोजेक्ट का चुनाव करने में जल्दबाजी नहीं करूंगा.
जब वे अपने शो के दूसरे सीज़न की रिलीज का इंतज़ार करता है, तो उनसे ‘तांडव’ के हालिया विवाद के बारे में पूछा गया कि निर्माताओं ने किस तरह से दृश्यों और बातों को हटा दिया. इस पर उन्होंने कहा कि, ‘मैंने यह शो नहीं देखा है और अगर निर्माताओं ने आपत्तिजनक सीन हटा दिया है तो यह उन पर निर्भर करता है. मुझे लगता है कि लोगों को ऐसे मामलों में थोड़ा धैर्य रखना चाहिए और क्रिएटिव कंटेंट के मामले में लोगों को क्षमा करना चाहिए. यदि वे किसी ऐसी चीज से सहमत नहीं होते हैं, तो वे अपनी राय दे सकते हैं. यहां तक ​​कि वे अपने जैसे विचार वाले लोगों को इसे न देखने के लिए प्रोत्साहित करें, लेकिन बैन या बॉयकॉट के लिए न कहें. किसी भी इंडस्ट्री या सोसाइटी के लिए बैन लगाना और बॉयकॉट करने की बात नहीं करनी चाहिए. मैं इसके पक्ष में नहीं हूं. दो बार के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता ने कहा कि कई सामाजिक मीडिया पोस्ट हैं जिनसे मैं सहमत नहीं हूं, लेकिन मैं नहीं चाहता कि ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट हटा दिए जाएं क्योंकि मैं मानता हूं कि हेल्दी डिबेट और डिस्कोर्स स्वस्थ लोकतंत्र का संकेत है.'
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