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50 Years Of Pakeezah: मीना कुमारी तवायफ का मार्मिक रोल निभा हो गईं अमर, सिर्फ 1 रुपए ली थी फीस

'पाकीजा' को रिलीज हुए 50 साल हो गए. (फोटो साभार: Movies N Memories/Twitter)

'पाकीजा' को रिलीज हुए 50 साल हो गए. (फोटो साभार: Movies N Memories/Twitter)

‘पाकीजा’ (Pakeezah) को जितना मीना कुमारी (Meena Kumari) के अभिनय के लिए याद किया जाता है उतना ही गानों के लिए भी याद कि ...अधिक पढ़ें

मीना कुमारी (Meena Kumari) ने तमाम फिल्मों में शानदार काम किया और हिंदी सिनेमा की ट्रेजेडी क्वीन बन गई थीं. मीना की सभी फिल्मों पर उनकी आखिरी फिल्म ‘पाकीजा’ (Pakeezah) भारी पड़ी. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस फिल्म को 50 बरस बाद भी वही प्यार मिल रहा जो 50 साल पहले रिलीज के वक्त मिला था. किसी भी कलाकार, फिल्मकार के लिए इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है कि फिल्म की स्वर्ण जयंती पर भी ‘मौसम आशिकाना’ बनाए हुए है. 4 फरवरी 1972 में रिलीज हुई कमाल अमरोही (Kamal Amrohi) की इस फिल्म में राजकुमार (Raajkumar) लीड एक्टर थे. इस फिल्म को बनाने में करीब 14 साल लग गए थे. ‘पाकीजा’ के 50 बरस पर बताते हैं फिल्म से जुड़े कुछ दिलस्प किस्से.

14 बरस में बनी थी ‘पाकीजा’
किसी फिल्म को बनाने में 14 साल लग गए ये सुनने में अजीब लगता है. लेकिन कमाल अमरोही अपनी फिल्म को लेकर कमाल करना चाहते थे इसलिए मेकिंग के दौरान इतने मोड़ आए कि फिल्म रिलीज होते-होते 14 बरस हो गए. हिंदी सिनेमा के इतिहास की कल्ट क्लासिक फिल्म ‘पाकीजा’ को  कमाल ने  1958 में बनाना शुरू किया था. कमाल अपनी वाइफ मीना कुमारी को बेहद प्यार करते थे. वह मीना को लेकर एक ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जिसे बरसों याद रखा जाए और ऐसा हुआ भी. अमरोहा में कमाल ने भव्य सेट बनाया. इस फिल्म को लेकर कमाल इतने संजीदा थे कि जरा सा भी कुछ गड़बड़ लगता तो शूटिंग रोक देते थे. कमाल जब फिल्म की शूटिंग कर रहे थे उसी दौर में रंगीन फिल्मों का आगमन हुआ तो कमाल ने फिर से रंगीन बनाने की कवायद शुरू कर दी.

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हिंदी सिनेमा के इतिहास की कल्ट क्लासिक फिल्म ‘पाकीजा’ .(फोटो साभार: Movies N Memories/Twitter)

कमाल अमरोही की भव्य बनाने की चाहत
कमाल अमरोही ने ताजमहल के सामने जिस तरह से फव्वारे लगे हैं ठीक वैसे ही फिल्म के सेट पर भी लगवाए थे. कमाल हर सीन को परफेक्ट और यादगार बनाना चाहते थे. इसके लिए कमाल ने कभी पैसों की परवाह नहीं की. कहते हैं फव्वारों में गुलाब जल का इस्तेमाल किया था. इन्ही फव्वारों के सामने मीना कुमारी का डांस फिल्माया गया था. फिल्म धीमी रफ्तार से बन रही थी लेकिन कमाल अमरोही इससे बेफिक्र भव्य बनाने में जुटे हुए थे.  मीडिया रिपोर्ट की माने तो इसी दौरान कमाल और मीना कुमारी के रिश्ते बिगड़ने लगे थे. इसी बीच 3-4 साल पाकीजा पर कोई काम नहीं हुआ. चूंकि फिल्म पर काफी पैसा लग चुका था तो कमाल ने 1968 में सोचा कि इसे पूरा करना चाहिए.

मीना कुमारी ने बीमारी में थी गजब की एक्टिंग
इस बीच मीना कुमारी ने खुद को शराब में डुबो दिया था. बीमार रहने लगी थीं, बीमारी की हालत में किसी तरह शूटिंग सेट पर पहुंचतीं लेकिन कैमरा ऑन होते ही मीना सारे दुख दर्द भुला अपने कैरेक्टर में डूब जातीं. शायद अंदर के दर्द ने पर्दे पर ऐसा कमाल दिखाया कि ‘पाकीजा’ कर मीना अमर हो गईं.

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पाकीजा के एक सीन में मीना कुमारी और राजकुमार. .(फोटो साभार: Movies N Memories/Twitter)

तवायफ की मार्मिक कहानी ‘पाकीजा’
एक तवायफ की मार्मिक कहानी को मीना कुमारी ने बेहद संजीदगी से निभा हिंदी सिनेमा के इतिहास में ‘पाकीजा’ को अमर कर दिया. कहते हैं कि इस फिल्म के लिए मीना कुमारी ने मात्र 1 रुपए फीस ली थी. अधिक शराब के सेवन ने मीना का लीवर खराब कर दिया था. मीना को लीवर सिरोसिस नामक बीमारी हो गई थी. फिल्म के रिलीज होने के चंद हफ्तों बाद ही मीना ने दुनिया को अलविदा कह दिया था.

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‘पाकीजा’ के शानदार गानें
‘पाकीजा’ को जितना मीना कुमारी के अभिनय के लिए याद किया जाता है उतना ही गानों के लिए भी याद किया जाता है. इस फिल्म के गाने ‘चलो दिलदार चलो चांद के पार के पार चलो’, ‘इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा’, ‘ठाढे रहियो ओ बांके यार रे’, ‘चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था’, ‘आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे’, ‘मौसम है आशिकाना’  सुनना भला किसे पसंद नहीं है. गुलाम मोहम्मद (Ghulam Mohammad) और नौशाद (Naushad) के संगीत ने ऐसे गाने बनाए जो 50 साल बाद भी संगीतप्रेमियों की पसंद बना हुआ है.

Tags: Pakeezah

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