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मीना कुमारी ट्रेजेडी क्वीन थीं तो निम्मी सैक्रिफाइजिंग क्वीन, बड़ी-बड़ी आंखों से करती थीं संवाद

निम्मी की दर्दभरी आवाज बना देती थी दीवाना. (फोटो साभार: News 18)

मीना कुमारी (Meena Kumari) को ट्रेजेडी क्वीन के रुप में जाना गया तो निम्मी (Nimmi) को सैक्रिफाइजिंग क्वीन के रुप में पहचान मिली. जब निम्मी अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से उदासी भरी आवाज से संवाद अदायगी करती तो सीधे दर्शकों के दिल में उतरती चली जाती थीं.

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    मुंबई. 1950 से 1960 के दशक की नवाब बानो (Nawab Bano) उर्फ निम्मी (Nimmi) बीते जमाने की एक सफल एक्ट्रेस थीं. शुरुआती फिल्मों में गांव की एक चुलबुली, नटखट, भोली-भाली लड़की का बेबाक अभिनय देखने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे. इसके बाद डायरेक्टर्स ने उनके भावों से भरे चेहरे  पर सीन के मुताबिक उभर आने वाले दर्द के एक्सप्रेशन पर ध्यान दिया. इसके बाद तो उन्हें त्याग करने वाली नायिका की भूमिका देने लगे. नम आंखों, दर्द भरी मुस्कान, उदास आवाज में संवाद बोलने पर दर्शक निम्मी पर फिदा हो गए. उनकी बड़ी-बड़ी खूबसूरत आंखे सबकी चहेती हो गई. निम्मी को फिल्म इंडस्ट्री में लाने वाले राज कपूर (Raj Kapoor) थे. ‘बरसात’ फिल्म से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने वाली निम्मी ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा.

    प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक महबूब खान ने 1954 में निम्मी को अपनी फिल्म ‘अमर’ के लिए साइन किया. इस फिल्म में मधुबाला, दिलीप कुमार की हीरोइन थीं. फिल्म ‘अमर’  की कहानी में दिलीप कुमार की लाइफ में निम्मी और मधुबाला दोनों ही महत्वपूर्ण थी. इस फिल्म में दिलीप कुमार वकील की भूमिका में थे. इस रोमांटिक म्यूजिकल फिल्म को कंटेपररी और मॉडर्न क्रिटिक्स की सराहना मिली थी. इस फिल्म में दिलीप कुमार के लिए जिस तरह से निम्मी समाज की परवाह किए बिना त्याग की मूर्ति बनी रहीं उसने उन्हें फिल्म समीक्षकों को सिल्वर स्क्रीन की सैक्रिफाइज क्वीन मानने पर मजबूर कर दिया. इस फिल्म के बाद जैसे मीना कुमारी को ट्रेजेडी क्वीन के रुप में पहचाना गया तो निम्मी को सैक्रिफाइजिंग क्वीन के रूप में जाना गया.

    निम्मी कमाल की अदाकारा होने के साथ-साथ सुरीली गायिका भी थी. 1951 में केदार शर्मा की फिल्म 'बेदर्दी' में न सिर्फ एक्टिंग की थी बल्कि गाना भी गाया था. कुंदन, उड़न खटोला, भाई-भाई और बसंत बहार जैसी फिल्में एक के बाद एक सुपर हिट होती गई. इस जबरदस्त सफलता ने निम्मी को सफलता के शिखर पर पहुंचा दिया था.

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    कहते हैं कि निम्मी अपनी मर्जी से फिल्में चुनती थीं, काफी सोच-समझ कर हां किया करती थी. उनकी हां के इंतजार में निर्देशक कई दिनों तक इंतजार किया करते थे. फिल्मी दुनिया के ग्लैमर के बावजूद अपनी निजी जिंदगी में काफी सरल और सिंपल थीं. उस जमाने की स्टार एक्ट्रेस सायरा बानो और वहीदा रहमान निम्मी की अच्छी दोस्त थीं.

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