मिलिंद सोमन को याद आए अपने RSS शाखा वाले दिन, लिखा- मैं इस बात से काफी दुखी था...

म‍िल‍िंद सोमन की किताब 'मेड इन इंडि‍या' हाल ही में र‍िलीज हुई है.
म‍िल‍िंद सोमन की किताब 'मेड इन इंडि‍या' हाल ही में र‍िलीज हुई है.

मॉडल और एक्‍टर मिलिंद सोमन (Milind Soman) ने अपनी किताब 'मेड इन इंडिया' में अपने राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े होने की बात का जिक्र किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 11, 2020, 3:26 PM IST
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मॉडल और एक्‍टर मिलिंद सोमन (Milind Soman) अपनी किताब 'मेड इन इंडिया' को लेकर इन दिनों सुर्खियों में आ गए हैं. अपनी इस किताब में मिलिंग सोमन ने अपने बचपन में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े होने की बात और उसकी यादों के बारे में लिखा है. द प्रिंट में आई एक रिपोर्ट के अनुसार मिलिंद ने अपनी इस किताब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जिक्र करते हुए लिखा है कि आज जब में आरएसएस शाखा से जोड़कर मीडिया सामुदाय‍िक मुद्दों को दिखाती हैं तो मैं इसे देखकर हैरान रह जाता हूं.

मिलिंद ने अपनी किताब में बताया कि दरअसल उनके पिता आरएसएस की शाखा से जुड़े थे और उन्‍होंने ही मिलिंद को इस शाखा में भेजा था. हालांकि शुरुआत में वह इस बात से नाराज थे कि उनके जैसे मस्‍त रहने वाले बच्‍चे को जबरदस्‍ती इस तरह की गतिविधि में भेजा जा रहा है. उन्होंने आगे लिखा कि उनके पिता को यह लगता था कि शाखा से युवाओं को अनुशासित जीवन, शारीरिक फिटनेस और अच्‍छी सोच का फायदा होगाा.

मिलिंद ने अपनी इस किताब में लिखा है, 'आज जब भी मैं सामुदायिक प्रोपोगेंडा के बारे में पढ़ता हूं, जिसे मीडिया आरएसएस से जोड़कर दिखाता है तो मैं हैरान रह जाता हूं. क्‍योंकि मेरी यादों में हफ्तों के दिनों में शाम को 6 से 7 बजे के बीच जो शाखा में होता था वह इससे बिलकुल अलग है. हम अपनी खाकी निक्‍करों में मार्च करते थे, थोड़ा योग करते थे, अपने पारंपरिक बाहर बने हुए जिम में थोड़ी वर्जिश करते थे, गाने गाते थे, संस्‍कृत के कुछ श्‍लोक बोलते थे जिसका हमें तब मतलब नहीं पता था, खेल खेलते थे और अपने दोस्‍तों के साथ मजे करते थे.'



 
 
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Book Review - Roopa!! I finished reading Made in India last night. I was sad the memoir lasted only some 230 pages. I didn't want it to end at all. It is unputdownable from the start, with all that edge-of-the-seat drama running(😉) parallel in the two stories. Such an inspiring story, written so, so beautifully, so deliciously, in your inimitable style. It's so quintessentially and wonderfully Roopa-esque! 😍😘 Your language is as savoury as the person you are writing about but then, isn't it always! I don't know why Milind Soman thinks he was always lucky because clearly, he has worked very hard and consistently, always upping the ante for others and for himself. This past week, all I thought about when I wasn't reading Made in India was that I should get back to yoga, running and swimming and maybe do the triathlon one day and be an inspiration to my son, as Aai was to Soman. It's his greatness and humility to say everything fell in place serendipitiously for him but we do know that creating great fortunes for ourselves is often in our own hands. Sure, he was born with good looks and great genes but that he made that his asset and didn't squander it away or take it for granted, is rare. I'm going to read this book again. For it's compelling style, it's beautiful language and the awe-inspiring Demi-God. Congratulations to both of you, once again!♥❤💜 . . Thank you for the review @sindhu.hande 🙂

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उन्‍होंने आगे इस किताब में लिखा, 'कई बार हमें बॉम्‍बे के पहाड़ों पर ट्रैकिंग या रात भर के कैंपिंग ट्रिप पर ले जाया जाता था, जिसका हम बेसब्री से इंतजार करते थे. ये सारी चीजें हमेशा व्‍यस्‍कों की एक टीम की देखरेख में होती थी, जिनका मानना था कि वह अच्‍छे 'सिविलियन सोल्‍जर' बनाने की कोशिश में लगे हैं, ऐसे लड़के जो प्रशासन का सम्‍मान करें, जो बड़े होने पर राष्‍ट्रनिर्माण में अपना सहयोग दें. जो लोग इन शाखाओं में अपने बच्‍चों को रजिस्‍टर कराते थे, वह बस यही मानते थे कि वह अपने बच्‍चों को अच्‍छा बनाने के लिए यहां भेज रहे हैं.'
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