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Miss India रनर अप मान्या सिंह अपने पिता के ऑटो से पहुंचीं इवेंट पर, स्टेज पर भावुक हुईं मां

(फोटो साभारः Video Grab Instagram @viralbhayani)
(फोटो साभारः Video Grab Instagram @viralbhayani)

इस प्रतियोगिता की फर्स्ट रनर अप रहीं उत्तर प्रदेश की मान्या सिंह (Manya Singh) का नाम इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है, ऐसा इसलिए क्योंकि मान्‍या दूसरे कंटेंस्‍टेंट से काफी अलग हैं और उनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 16, 2021, 9:14 PM IST
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नई दिल्ली. 'फेमिना मिस इंडिया 2020 (Femina Miss India 2020)' का खिताब हाल ही में तेलंगाना की सुंदरी मानसा वाराणसी (Manasa Varanasi) ने अपने नाम किया, लेकिन इस प्रतियोगिता की फर्स्ट रनर अप रहीं उत्तर प्रदेश की मान्या सिंह (Manya Singh) का नाम इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है, ऐसा इसलिए क्योंकि मान्‍या दूसरे कंटेंस्‍टेंट से काफी अलग हैं और उनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है. बता दें, मान्या एक ऑटो चालक की बेटी हैं और मंगलवार को वह एक कॉलेज इवेंट पर अपनी मां और पिता के साथ पहुंचीं, जहां मान्या को उनके पिता अपने ऑटो पर बैठाकर लाए थे.

सेलिब्रिटी फोटोग्राफर वीरल भियानी ने मंगलवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर मान्या के दो वीडियो पोस्ट किए, जिसमें मान्या एक कॉलेज इवेंट पर अपनी मां और पिता के साथ शामिल होने आई थीं. यह इवेंट खास तौर पर मान्या के सम्मान के लिए ही रखा गया था. पहले वीडियो में मान्या अपने परिवार के साथ ऑटो से आती नजर आती हैं, और उस ऑटो को उनके पिता चला रहे थे.
वहीं, दूसरे वीडियो में स्टेज पर मान्या और उनके मां को सम्मानित किया जा रहा था तो मान्या की मां काफी भावुक हो गई थीं. अब ये दोनों वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इन वीडियो को लोग बेहद पसंद कर रहे हैं और मान्या को बधाइयां भी दे रहे हैं. बता दें, मान्या सिंह ने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष किया है. मिस इंडिया के स्टेज तक पहुंचने के लिए उन्होंने अपने सपने को कभी मरने नहीं दिया.






हाल ही में उन्होंने बताया था, 'मैंने भोजन और नींद के बिना कई रातें बिताई हैं. मैंने रिक्‍शे का किराया बचाने के लिए कई मील की दूरी पैदल तय की है. मेरे खून, पसीने और आंसुओं ने मुझे वह साहस दिया, जिससे मैं अपने सपने को पूरा कर सकी.' मान्या ने आगे कहा था, 'रिक्शा चालक की बेटी होने के नाते, मुझे स्कूल जाने का अवसर नहीं मिला. क्योंकि मैंने अपनी टीनएज में ही काम करना शुरू कर दिया था. मैं किताबों के लिए तरसती रहती थी, फिर भी किस्मत मेरे पक्ष में नहीं थी. आखिरकार, मेरे माता-पिता ने मेरी मां की छोटी सी ज्वैलरी को गिरवी रख दिया. इस तरह से मैंने डिग्री हासिल के लिए एग्जामिनेशन फीस का पेमेंट किया था.' गौरतलब है कि मान्‍या ने 14 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था. इसके बाद वह दिन में पढ़ाई करती थीं, शाम को बर्तन धोती थीं और रात में कॉल सेंटर में काम करती थीं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और भाई को दिया.
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