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फिल्में जो और उलझा देती हैं आरुषि-हेमराज हत्याकांड की कहानी!

आरुषि और हेमराज हत्याकांड पर बॉलीवुड में 2 बड़ी फिल्में बनीं.

आरुषि और हेमराज हत्याकांड पर बॉलीवुड में 2 बड़ी फिल्में बनीं.

आरुषि और हेमराज हत्याकांड पर बॉलीवुड में 2 बड़ी फिल्में बनीं.

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    साल 2008 में एक ऐसी घटना हुई थी जिसने पूरे देश को हिला दिया था. नोएडा में रहने वाली 14 साल की आरुषि तलवार की उसके बेडरूम में गला काटकर हत्या कर दी गई. साथ ही उनके घर का नौकर हेमराज का शव भी घर की छत पर मिला था.

    इस केस में मुख्य रूप से इल्जाम लगा आरुषि के माता-पिता राजेश और नुपुर तलवार पर. आरुषि की मौत से जुड़ी गुत्थी इतनी उलझी हुई है कि बॉलीवुड भी इस विषय पर फिल्में बनाने के आकर्षण से बच नहीं पाया.

    आरुषि और हेमराज हत्याकांड पर बॉलीवुड में 2 बड़ी फिल्में बनीं. तीसरी को बनाने की पेशकश तो हुई, लेकिन वो बन नहीं पाई. इन फिल्मों के निर्देशकों ने इस घटना के तथ्यों को अपनी-अपनी तरह से दिखाया.

    रहस्य: (निर्देशक-मनीष गुप्ता)

    इस घटना पर बनी पहली फिल्म थी मनीष गुप्ता के निर्देशन में बनी फिल्म 'रहस्य'. जैसा कि फिल्म का नाम ही बता रहा है, यह कहानी उस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने की कोशिश थी जिसने पेरेंट्स और बच्चे के रिश्ते को कटघरे में खड़ा कर दिया था.

    फिल्म 'रहस्य' की कहानी 18 साल की आयशा महाजन की कहानी थी. अपने पापा की दुलारी आएशा एक दिन अचानक अपने बेडरूम में मृत हालत में मिलती है. CBI ऑफिसर की भूमिका में केके मेनन इस केस की तहकीकात करते हैं और एक के बाद एक कई रहस्यों से पर्दा उठाते जाते हैं.

    इस फिल्म में आयशा (आरुषि) की भूमिका में साक्षी सेम थीं और उनके पेरेंट्स का किरदार निभाया था बॉलीवुड के मंझे हुए कलाकारों आशीष विद्यार्थी और टिस्का चोपड़ा ने. 'तारे जमीं पर' में ईशान अवस्थी की मां की भूमिका निभा चुकीं टिस्का इस बार एक अलग किस्म की मां थीं.

    हालांकि फिल्म के निर्देशक मनीष गुप्ता ने शुरू से ही कहा था कि यह फिल्म आरुषि हत्याकांड पर आधारित नहीं है, लेकिन जब इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ, तलवार परिवार ने गुप्ता को धमकी दी कि वो इसके विरोध में कानूनी कदम उठाएंगे.


    मनीष ने अपनी सफाई में कहा कि इस फिल्म का उद्देश्य किसी नतीजे पर पहुंचना नहीं है. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से एक काल्पनिक फिल्म है जिसकी प्रेरणा उन्हें अगाथा क्रिस्टी के उपन्यासों से मिली है.

    सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को 'U/A' सर्टिफिकेट देते हुए पास कर दिया था. लेकिन तलवार परिवार ने इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग देखने के बाद फिल्म निर्माताओं पर यह कहते हुए केस दर्ज कर दिया था कि यह तथ्यों को तोड़-मरोड़ सकती है.

    तलवार: (निर्देशक- मेघना गुलजार)

    मेघना गुलजार की फिल्म 'तलवार' आरुषि-हेमराज डबल मर्डर केस पर आधारित दूसरी फिल्म है. इस फिल्म की कहानी लिखी विशाल भारद्वाज ने. एक इंटरव्यू में विशाल ने बताया कि उन्होंने आरुषि के पेरेंट्स राजेश और नुपुर तलवार से बातचीत करते हुए बहुत से तथ्यों की जानकारी ली थी.

    फिल्म की कहानी में कुछ नया नहीं था लेकिन मेघना का उसे कहने का अंदाज अलग था. इस कहानी में उन्होंने हर किसी का अपना-अपना सच दिखाया है. फिल्म किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचती और सभी सस्पेक्ट्स की नजर से उनकी कहानी सुनाती है.

    मेघना का कहना था कि उनकी यह फिल्म किसी का भी साथ नहीं देती लेकिन लोगों का मानना है कि यह फिल्म पेरेंट्स को बेगुनाह साबित करने में मदद करती हुई नजर आती है.

    इस फिल्म में श्रुति टंडन नाम की एक 14 साल की लड़की का खून हो जाता है. उसके पिता की भूमिका में नीरज कबी और मां की भूमिका में कोंकणा सेन शर्मा आरोपी ठहराए जाते हैं.

    इरफान खान एक इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर हैं जो इस घटना की छान-बीन करते हैं. जैसे-जैसे उनकी पड़ताल आगे बढ़ती है, कहानी और उलझती जाती है.


    यह फिल्म भी कोई फैसला नहीं सुनाती. दरअसल फैसला सुनाना तो फिल्मों का काम है भी नहीं, खासकर ऐसे मामले पर जो अभी भी कोर्ट में जिंदा हैं. कोई भी फिल्म किसी आरोपी को गुनाहगार साबित नहीं कर सकती.

    लेकिन फिल्में एंटरटेन करने के साथ ही हमें तथ्यों से रूबरू भी करवाती हैं. अब ऐसे में जब 12 अक्टूबर को आरुषि के माता पिता राजेश और नुपुर तलवार की इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई है, इन फिल्मों के जरिए हम अपनी याददाश्त को दुरुस्त कर सकते हैं.

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