मुंबई की बार डांसरों ने बदली मधुर भंडारकर की जिंदगी

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Updated: August 26, 2019, 5:48 PM IST
मुंबई की बार डांसरों ने बदली मधुर भंडारकर की जिंदगी
मुंबई की बार डांसरों ने बदली मधुर भंडारकर की जिंदगी

वो वक्त भी आया जब मधुर भंडारकर (Madhur bhandarkar) लोकल ट्रेन में अखबार से अपना चेहरा ढककर सफर किया करते थे. मधुर के पास खाने तक के पैसे नहीं होते थे. जिंदगी एक बार फिर वहीं लेकर आई जहां से वो शुरू हुई थी.

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बॉलीवुड (Bollywood) को 'फैशन', 'पेज 3' और 'हीरोइन' जैसी हिट फिल्में देने वाले मधुर भंडारकर (Madhur bhandarkar) 26 अगस्त को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं. मुंबई में पैदा हुए मधुर भंडारकर का संघर्ष और कामयाबी भी किसी हिंदी फिल्म की पटकथा जैसी ही है. मधुर के पिता बिजली कॉन्ट्रैक्टर थे. मां घरेलू महिला. परिवार की आर्थिक स्थिति बिल्कुल अच्छी नहीं थी. पिता का काम कभी चलता था, कभी नहीं. आज भी मधुर को बुरे वक्त में रोटी में नमक और प्याज को ‘रोल’ करके खाना याद है. फीस ना भर पाने की वजह से मधुर को स्कूल छोड़ना पड़ा. इन तमाम तंगहाली के बाद भी मधुर को बचपन से ही फिल्मों में काफी दिलचस्पी थी. फिल्मों की वजह से मधुर भंडारकर को बचपन में कई बार डांट और मार पड़ी थी, लेकिन वे कहा रुकने वाल थे.

असिस्टेंट बनकर शुरू किया काम
90 के दशक की बात है. बहुत हाथ पैर मारने के बाद मधुर को ‘असिस्टेंटगिरी’ का काम मिला. लेकिन इसका कोई पैसा वैसा नहीं मिलता था. लोकेशन पर आने जाने के खर्च के लिए सिर्फ 30 रुपए मिलते थे. मुंबई की फिल्म सिटी में शूटिंग होती थी. शूटिंग का सारा सामान लोड होने के बाद ट्रक पर लदकर मधुर मेन रोड तक आते थे. इन मुश्किल हालातों में बड़ा बदलाव लेकर आए रामगोपाल वर्मा.उस वक्त रामगोपाल वर्मा ‘रात’ बना रहे थे. इसके बाद मधुर उनके साथ हैदराबाद चले गए. मधुर उन्हें असिस्ट करने लगे. शिवा और फिर रंगीला तक.

रंगीला वो फिल्म थी जिसके हिट होने के बाद मधुर को लगा कि अब वो भी फिल्म बना सकते हैं. पहला झटका तब लगा जब एक प्रोड्यूसर ने उनकी फिल्म के प्लॉट को सुनकर कहा कि अगर उसे फिल्म से मैसेज ही देना होगा तो वो एसएमएस करके देगा, करोड़ों रुपए क्यों खर्च करेगा. मधुर ने हार नहीं मानी. उन्होंने बड़ी मुश्किल से त्रिशक्ति नाम की एक फिल्म बनाई. फिल्म ने बड़ी मुश्किल से चंद घंटों के लिए स्क्रीन देखी.

लोकल ट्रेन में अखबार से चेहरा ढककर किया करते थे सफर 
रामगोपाल वर्मा के असिस्टेंट के तौर पर मधुर ने जो इज्जत बटोरी थी वो इज्जत भी चली गई. लोगों ने उनके फोन उठाने बंद कर दिए. उन्हें अपशकुन मानकर उनसे कन्नी काटने लगे. वो वक्त भी आया जब मधुर लोकल ट्रेन में अखबार से अपना चेहरा ढककर सफर किया करते थे. मधुर के पास खाने तक के पैसे नहीं होते थे. जिंदगी एक बार फिर वहीं लेकर आई जहां से वो शुरू हुए थे.

बार डांसरों ने बदली जिंदगी
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पिछली फिल्म की नाकामी से टूट चुके मधुर के एक दोस्त स्टॉक मार्केट में काम करते थे. वो मधुर की कभी कभार मदद भी किया करते थे. एक रोज वो मधुर को लेकर डांस बार गए. मधुर उस रात को याद करके कहते हैं कि वो उस वक्त बहुत ‘इम्बैरेस फील’कर रहे थे. वहां लड़कियां शिफॉन की साड़ी पहनकर, घाघरा चोली पहनकर नाच रही थीं. मधुर ने अपने दोस्त से वहां से निकलने की बात कही. मधुर को इस बात का डर था कि कहीं किसी ने उन्हें पहचान लिया तो कहेगा कि फिल्म की नाकामी भुलाने के लिए वो शराबखाने आए हैं.

उस रात तो मधुर जल्दी आ गए लेकिन वो ‘विजुअल्स’ उनकी आंख में डूबते रहे. अगले दिन उन्होंने अपने दोस्त से खुद ही कहा कि डांस बार चलना है. दोस्त को लगा कि मधुर को कोई लड़की पसंद आ गई है. ऐसा करते-करते मधुर कई बार डांस बार गए. कुल मिलाकर मधुर करीब 60 डांस बार में गए. लोगों से मिले. कई बार वो मेकअप रूम में चले जाते थे, जब कोई उनसे पूछता था तो वो बताते थे कि वो एक लेखक हैं और किताब लिख रहे हैं.

धीरे धीरे कई लड़कियों की कहानियों का भंडार आ गया और फिर वो फिल्म बनी जिसने मधुर भंडारकर की जिंदगी को बदल दिया. वो फिल्म थी चांदनी बार. इसके बाद मधुर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. पेज थ्री, फैशन, कॉरपोरेट जैसी फिल्मों को लोगों ने बहुत सराहा. उन्हें नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया, पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया.

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First published: August 26, 2019, 4:53 AM IST
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