दिग्गज संगीतकार खय्याम की हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

वरिष्ठ संगीतकार, गीतकार और लेखक खय्याम ने अपने म्यूजिक करियर की शुरुआत लुधियाना में 1943 में 17 वर्ष की आयु में की थी.

News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 11:03 PM IST
दिग्गज संगीतकार खय्याम की हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
मोहम्मद जहूर खय्याम
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Updated: August 9, 2019, 11:03 PM IST
भारतीय सिनेमा के दिग्गज संगीतकार खय्याम ( Mohammed Zahur Khayyam) को फेफड़ों में संक्रमण के चलते मुंबई के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि खय्याम (92) को रविवार को सुजय अस्पताल में भर्ती कराया गया. संगीतकार के पारिवारिक मित्र गजल गायक तलत अजीज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह फिलहाल आईसीयू में हैं. उनकी हालत गंभीर, लेकिन स्थिर है. डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं. हमें नहीं पता कि उन्हें अस्पताल से कब छुट्टी दी जाएगी.

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वरिष्ठ संगीतकार, गीतकार और लेखक खय्याम ने अपने म्यूजिक करियर की शुरुआत लुधियाना में 1943 में 17 वर्ष की आयु में की थी. उन्होंने बाद में 'शर्माजी-वर्माजी' जैसी पद्मभूषण पुरस्कार विजेता संगीतकार जोड़ी के साथ जुड़ने से लेकर 'हीर रांझा' (1948) और अन्य फिल्मों के लिए म्यूजिक दिया.

हालांकि बंटवारे के बाद उनके सहयोगी रहमान वर्मा पाकिस्तान चले गए. इसके बाद खय्याम ने अकेले ही अपनी यात्रा जारी रखी और 'फुटपाथ' (1953) में उनके बेहतरीन काम के लिए उन्हें याद किया गया. इसमें उन्होंने तलत महमूद के गाने 'शाम-ए-गम की कसम, आज गमगीन हैं हम', और फिल्म 'बीवी' में मोहम्मद रफी के गाए गीत 'अकेले में वो घबराते तो होंगे' और 'फिर सुबह होगी' (1958) में मुकेश के 'वो सुबह कभी तो होगी' शानदार गीत थे.

1961 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'शोला और शबनम' ने उन्हें 'खय्याम' बनाया। इसके बाद वह 'मोहब्बत इसको कहते हैं' (1965), सुपरस्टार राजेश खन्ना की पहली फिल्म 'आखिरी खत' (1966) जैसी फिल्मों से अपना सफर तय करते गए. वहीं उन्होंने 'कभी कभी' (1976), 'त्रिशूल' (1978), नूरी (1979), 'थोड़ी सी बेवफाई' (1980), 'दर्द' और 'आहिस्ता आहिस्ता' (1981), 'दिल, आखिर दिल है', 'बाजार' (1982) और 'रजिया सुल्तान' (1983) जैसी फिल्मों में म्यूजिक दिया. उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है.

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First published: August 9, 2019, 11:03 PM IST
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