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आखिर क्यों कामयाब नहीं हो पाए नवीन निश्चल!

बहुत कम लोग नवीन निश्चल को याद करते होंगे, हांलाकि एक जमाने में वो सिनेमा के सबसे सुंदर अभिनेताओं में से एक थे

बहुत कम लोग नवीन निश्चल को याद करते होंगे, हांलाकि एक जमाने में वो सिनेमा के सबसे सुंदर अभिनेताओं में से एक थे

बहुत कम लोग नवीन निश्चल को याद करते होंगे, हांलाकि एक जमाने में वो सिनेमा के सबसे सुंदर अभिनेताओं में से एक थे

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नई दिल्ली। बहुत कम लोग नवीन निश्चल को याद करते होंगे, हांलाकि एक जमाने में वो सिनेमा के सबसे सुंदर अभिनेताओं में से एक थे। सिनेमा के सफर की शुरुआत तो उन्होंने बहुत शानदार की, लेकिन जल्द ही करियर लड़खड़ा गया। इक्का दुक्का फिल्मों के सहारे वो अपनी गाड़ी खींचते रहे और पांच साल पहले 19 मार्च को उन्होंने ये दुनिया छोड़ दी। नवीन निश्चल का जन्म आज ही यानी 18 मार्च को हुआ था।

लगभग 41 वर्ष पहले 1970 में फिल्म ‘सावन भादो’ के जरिये दो नए कलाकार परदे पर उतरे अभिनेत्री रेखा और नवीन निश्चल। फ़िल्म हिट हो गयी और गोरे-चिट्टे दमकती त्वचा के मालिक नवीन निश्चल ने बड़ी संख्या में अपने प्रशंसक बना लिए। नवीन के घर निर्माताओं की लाइन लग गई और उन्होंने ढेर सारी फिल्में साइन कर ली, लेकिन एक बार मौका देकर भाग्य ने मुंह मोड़ लिया।

1971 में नवीन की 6फिल्में रिलीज हुई, जिसमें से 'बुड्ढा मिल गया' को  औसत सफलता मिली। नवीन को समझ में आ गया कि उन्होंने आंख बंद कर फिल्में साइन कर बड़ी गलती की है, इस ग़लती का उनके करियर पर गंभीर असर पड़ा। फिल्म एंड टेलिविज़न इंस्टीट्यूट पुणे से गोल्ड मेडल प्राप्त करले वाले पहले छात्र नवीन निश्चल असफलता से मुक़ाबला करते रहे और कुछ समय बाद एक बार भाग्य ने उनका फिर साथ दिया। उन्हें सायरा बानो के साथ फ़िल्म विक्टोरिया नं. 203 (1972) करने का मौक़ा मिला। फ़िल्म हिट हो गयी, लेकिन फ़िल्म की कामयाबी का श्रेय प्राण और अशोक कुमार की जोड़ी को मिला। इसके बाद फिर एक सुपर हिट फ़िल्म धर्मा (1973) के हीरो नवीन निश्चल बने, लेकिन फ़िल्म की कामयाबी का सेहरा फ़िल्म के संगीत और प्राण के सिर बंध गया।

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फिल्म हंसते जख्म (1973) में भी नवीन ने अपनी अदाकारी का हुनर दिखाया। फिल्म हिट नहीं हुई, लेकिन अपने संगीत की वजह से आज भी याद की जाती है। यह फ़िल्म भी साबित नहीं कर पायी की नवीन निश्चल एकल नायक वाली फ़िल्में अपने दम पर हिट करा सकते हैं। और मल्टी स्टारर फ़िल्मों से नवीन निश्चल खुद को जोड़ नहीं सके।

जबकि अपने दम पर हिट फ़िल्में देने वाले उस दौर के अभिनेता जैसे राजेश खन्ना, शशि कपूर, जितेंद्र, संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, विनोद खन्ना और शत्रुध्न सिन्हा मल्टी स्टारर फिल्में भी कर रहे थे। नवीन ने जब करियर आरंभ किया था तब वह दौर रोमांटिक फिल्मों का था लेकिन सुंदर चेहरा मोहरा और सहज अभिनय की प्रतिभा के होते हुए नवीन निश्चल ए श्रेणी के अभिनेताओं की कतार में अपनी जगह नहीं बना सके।

बी ग्रेड की एक्शन फ़िल्मों जैसे ज़ोरो और मोंटो के ज़रिये वे एक ख़ास वर्ग के निर्माताओं और दर्शकों क आकर्षित कर ही पाए थे कि हिंसात्मक फिल्मों की बॉलीवुड में भरमार हो गई। जंजीर, दीवार और शोलेजैसी फिल्मों की कामयाबी से निर्मातानिर्देशकों का ध्यान एक्शन फिल्मों की ओर चला गया।

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पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना को भी अपनी रोमांटिक छवि बचाने के लिये नाकाम संघर्ष करना पड़ा ऐसे में नवीन निश्चल जैसे रोमांटिक अभिनेता जिनकी पहचान एक्शन फ़िल्मों में भी नहीं बन पायी थी हाशिये पर चले गए। कुछ समय तक गुमनामी के अंधेरे में रहने के बाद उन्हें फिर काम मिलना शुरू हुआ। 1980 में लेख टंडन की एक बार कहो,1982 में बी.आर इशारा की लोग क्या कहेंगे, जैसी फिल्में उन्हे मिलीं।

1980 में ही रवि चोपड़ा कीद बर्निंग ट्रेन ने उन्हे चरित्र भूमिका में प्रस्तुत किया।इस फिल्म में वे एक सहज स्वभाव वाले डाक्टर की भूमिका में थे और अगले कईसालों तक वे सह भूमिकायें निभाते रहे। उनके अभिनय की इसी रेंज को और ज्यादा विकास मिला 'राजू बन गया जैंटलमैन' (1992) जैसी फिल्मों से। एक रईस आदमी के चरित्र में वे ऐसे समा गये जैसे वे इसी तरह की भूमिकाओं के लिए बने थे।

इस दौरान नवीन का निजी जीवन भी अस्थिरता की लहरों पर डांवाडोल होता रहा। उन्होंने अभिनेता-निर्देशक शेखर कपूर की बहन नीलू कपूर से प्रेम विवाह किया, लेकिन कुछ समय बाद नवीन और अभिनेत्री पद्मिनी कपिला के बीच बढ़ती दोस्ती की वजह से ये नीलू उनसे अलग हो गईं। कुछ समय बाद पद्मिनी और प्रकाश मेहरा के नज़दीकी रिश्तों की वजह से नवीन निश्चल और पद्मिनी दूर-दूर हो गए।फिर नवीन ने गीतांजलि से शादी की।

गीतांजली ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। नवीन और उनके भाई प्रवीण पर उन्होंने प्रताड़ना का आरोप लगाया था। इससे नवीन को गहरा धक्का
पहुंचा था। हालांकि मुंबई की सेशन कोर्ट ने निश्चल को इस मामले में बरी कर दिया था। नब्बे के दशक में नवीन ने फ़िल्मों में चरित्र अभिनय के अलावा टीवी धारावाहिकों में भी काम किया।

धारावाहिक ‘देख भाई देख’ भी काफी लोकप्रिय हुआ। नवीन निश्चल की अंतिम फ़िल्मब्रेक के बाद (2010) थी। 18 मार्च 1946 को  मुंबई में जन्मे इन अभिनेता ने 19 मार्च 2011 को पुणे में दिल का दौरा पड़ने से यह दुनिया छोड़ दी।

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