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मुझे डार्क करेक्टर्स पसंद हैं: नवाजुद्दीन सिद्दीकी

नवाजुद्दीन सिद्दीकी

नवाजुद्दीन सिद्दीकी

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने एक इंटरव्यू में अपने संघर्ष के दिनों को याद किया और बताया कि वो क्यों डार्क करेक्टर्स करना पसंद करते हैं

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    नवाजुद्दीन सिद्दीकी को आप हिंदी फिल्मों की वन मैं आर्मी भी कह सकते हैं . वो एक ऐसे अभिनेता हैं जो बहुत सफल तो हैं ही लेकिन उन्हें स्टारडम वाले कॉन्सेप्ट को पूरी तरह से गायब कर दिया है. वो आम सी शक्ल और कद काठी वाले ऐसे अभिनेता हैं जिनके चाहने वाले आज लाखों करोड़ों में हैं. लेकिन फिल्मों में उनका ये सफर इतना आसान नहीं था.

    नवाजुद्दीन ने न्यूज 18 को दिए एक इंटरव्यू में अपने संघर्ष के दिनों, आने वाली फिल्मों और बदलते सिनेमा जैसे मुद्दों पर दिल खोल कर बात की और बताया कि जब 12 वर्ष तक वो संघर्ष कर रहे थे तो वो वक्त उनके लिए कैसा था ? नवाजुद्दीन कहते हैं कि "संघर्ष कभी खत्म नहीं होता और बिना संघर्ष के जिंदगी भी क्या जिंदगी होती है"

    नवाजुद्दीन कहते हैं कि उस वक्त के संघर्ष अलग हुआ करते थे, आज एक अभिनेता को तौर पर मैं अच्छे रोल्स के लिए संघर्ष करता हूं, अलग अलग किरदारों के लिए ऐसे रोल्स पाने के लिए जो मेरी क्षमताओं के साथ न्याय करें, मैं बड़े सितारों की बात नहीं कर रहा हूं, लेकिन कोई भी कलाकार जो अलग अलग किरदार निभाना चाहता है उसके लिए संघर्ष चलता रहता है

    नवाजुद्दीन की पहली ऑन स्क्रीन एपियरेंस आमिर खान की फिल्म 'सरफरोश' में दिखाई दी थी. इसके बाद वो 'शूल' में एक वेटर के रोल में दिखाई दिए थे.लेकिन तब शायद किसी को इस बात का इल्म नहीं था कि साधारण सा दिखने वाला ये अभिनेता सिनेमा के सबसे अच्छे और जानदार अभिनेताओं में शामिल हो जाएगा. पतंग, पीपली लाइव, गैंग्स ऑफ वासेपुर. तलाश, कहानी, बॉम्बे टॉकीज, बजरंगी भाईजान फ्रिकी अली और लंच बॉक्स जैसी फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़कर नवाज ने बता दिया कि वो किसी भी तरह के किरदार निभा सकते हैं.

    नवाज ने निभाए हैं अलग अलग किरदार नवाज ने निभाए हैं अलग अलग किरदार

    नवाज चुटकी लेते हुए बताते हैं कि जब तक वो भारत में थे उन्हें पता ही नहीं था कि वो खूबसूरत हैं, जब वो विदेश गए तभी उन्हें अपनी खूबसूरती का एहसास हुआ, इसके लिए वो अपनी मां और दोस्तों का शुक्रिया अदा करते हैं, नवाज कहते हैं कि अगर ऐसा नहीं होता तो वो यही सोच कर उदास में रहते कि देखो मैं काला हूं, हाइट भी कुछ नहीं है मेरी, तो कुछ लोग कुछ दोस्त ऐसे रहे हैं जो मुझे इस बात का भरोसा दिलाते रहे और मैं उनका शुक्रगुजार हूं

    नवाज से जब पूछा गया कि वो ऐसे विरोधाभासों के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं तो शर्मीले सिद्दीकी ने इलके लिए अपने संघर्ष के दिनों का शुक्रिया अदा किया. ऐसा इसलिए हो जाता है क्योंकि मेरे पास 12 वर्षों तक कोई काम नहीं था जबकि मैं एक प्रशिक्षित अभिनेता था, इसके अलावा मैंने अपने आसपास के लोगों से और उनकी जिंदगियों से बहुत कुछ सीखा है, मैंने हजारो लोगों को देखा है, अपने दोस्तों को देखा है और अब मैं अपने 12 साल के उसी खजाने का इस्तेमाल करता हूं और यही अनुभव यही खजाना मेरे किरदारों में दिखाई देता है

    हमने उनसे पूछा कि अगर उनके साथ फिल्म इंडस्ट्री के किसी परिवार का नाम जुड़ा होता तो क्या ये संघर्ष उनके लिए कुछ आसान होता ?

    मुझे अपने संघर्ष का कोई पछतावा नहीं है, ना ही इस बात का कि मेरे पीछे किसी परिवार का नाम नहीं था, या ये संघर्ष और आसान हो जाता अगर मैं किसी फिल्मी सितारे का बेटा होता, मैं अपने बाप का बेटा हूं और यही काफी है.

    नवाज कहते हैं कि अभी वो जिन भी निर्देशकों के साथ काम कर रहे हैं वो सभी कहीं ना कहीं उनके काम के समर्थक हैं, क्योंकि आखिरकार आप का काम ही बोलता है, जो आपने मेहनत की है हार्ड वर्क किया है उसे इज्जत देने वाले बहुत हैं इंडस्ट्री में.

    अगर आप ध्यान से नवाजुद्दीन की फिल्मोग्राफी देखेंगे तो आप पाएंगे कि उन्होंने ज्यादातर वैसे ही रोल किए हैं जो बॉलीवुड की गुड मैन वाली छवि से मेल नहीं खाते हैं.बल्कि अक्सर उनके किरदारों में आपको ग्रे शेड दिखाई देगा.जब उनसे पूछा गया कि क्या वो ऐसे रोल जानबूझकर चुनते हैं तो नवाज ने कहा हां
    मुझे सिर्फ ग्रे शेड वाले रोल करने में ही मजा आता है, मुझे पारंपरिक हीरो वाले किरदारों करने में कोई दिलचस्पी नहीं है, ऐसे पारंपरिक किरदारों में सबकुछ अच्छा होता है अच्छी शक्ल, सुंदर लड़कियां, लड़के ऐसे किरदारों के दीवाने हैं. जबकि मुझे ऐसे किरदार पसंद हैं जिनमें अच्छे और बुरे का एक संतुलन होता है, कुछ लोग नफरत करते हैं जबकि कुछ लोग प्यार करते हैं, ये उस मूछों वाले हीरो की तरह भी नहीं है जिसमें सब कुछ बुरा ही बुरा है और आप उससे नफरत करते हैं. मुझे लगता है कि किसी किरदार में अच्छी और बुरी दोनों तरह की विशेषताएं होनी चाहिए

    नवाजुद्दीन सिद्दीकी आने वाली फिल्मों जैसे 'मुन्ना माइकल', 'चंदा मामा दूर के' और 'मॉम' में दिखाई देंगे और उनके कंधों पर सआदत हसन मंटो का किरदार निभाने की भी जिम्मेदारी है. सआदत का किरदार एक ऐसे लेखक का किरदार है जिसे लेकर सबका अपना अपना परसेप्शन है, तो क्या नवाज को नंदिता दास की इस फिल्म को साइन करते वक्त एक अलग जिम्मेदारी का एहसास हुआ था

    सआदत हसन मोंटो का किरदार निभाएंगे नवाज सआदत हसन मोंटो का किरदार निभाएंगे नवाज

    नवाज कहते हैं कि इस रोल को करने में सिर्फ एक ही समस्या है और वो समस्या ये है कि हम सब असल जिंदगी में बहुत झूठ बोलते हैं.तो हम कैसे एक ऐसे व्यक्ति का किरदार निभा सकते हैं जो बहुत ही सच्चा था.

    मैं कभी ऐसे इंसान से नहीं मिला जो मंटो की तरह सच्चा हो, उन्होंने सिर्फ वही लिखा जो उन्होंने देखा, लेकिन हम उनके जैसे नहीं है, हम अपनी जिंदगी में अक्सर झूठ बोलते हैं, ये एक छोटी बात लगती है लेकिन दरअसल ये एक लंबी प्रक्रिया है, एक कम इमानदार व्यक्ति होते हुए एक इमानदार व्यक्ति का किरदार निभाना एक तरह का रुपांतरण है. और ये सिर्फ तभी हो सकता है जब आप उनकी तरह बन जाएं, और असल जिंदगी में भी उनकी तरह ही सोचने लग जाएं

    जिस तरह के किरदार नवाज करते हैं उसे देखकर लगता है कि वो समानांतर सिनेमा के लिए बने हैं, लेकिन नवाज तपाक से इस बात का जबाव देते हुए कहते हैं कि ये पैरलल सिनेमा, इंडी सिनेमा पता नहीं कौन कैटेगराइज करता है, एक फिल्म फिल्म होती है वो अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी ये कहना ठीक नहीं होगा कि पैरलल सिनेमा अच्छा है और कमर्शियल सिनेमा बुरा, मैं एक अभिनेता हूं, मैं पैरलल सिनेमा करता हूं और अगर मुझे कमर्शियल फिल्म में ढंग का रोल मिलता है तो वो भी करूंगा

    आने वाले बॉलीवुड प्रोजेक्ट्स के अलावा नवाज पीएंडजी शिक्षा के एक कैंपेन के सुपर हीरो भी हैं इस कैंपेन का मकसद देश के 1 लाख बच्चों की जिंदगी को शिक्षा से रौशन करना है.

    नवाज कहते हैं कि मेरे जैसा शख्स ऐसे प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना चाहेगा, क्योंकि मैंने ऐसी ही स्थितियों का सामना किया है और अगर किसी को किसी के हालात बदलने का मौका मिलता है तो उसे ऐसा जरूर करना चाहिए.

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