Home /News /entertainment /

neeraj pathak is going to make a biopic on shaurya chakra para commando madhusudan surve entpks

Madhusudan Surve Biopic: शौर्य चक्र पैरा कमांडो मधुसूदन सुर्वे पर नीरज पाठक बनाने जा रहे हैं बायोपिक

एक युद्ध के दौरान साथी सिपाही को बचाते हुए मधुसूदन सुर्वे को 11 गोलियां लगी थीं.

एक युद्ध के दौरान साथी सिपाही को बचाते हुए मधुसूदन सुर्वे को 11 गोलियां लगी थीं.

Madhusudan Surve Biopic: शौर्य चक्र पैरा कमांडो मधुसूदन सुर्वे रत्नागिरी के खेड़ तालुका के शिवतर गांव से हैं, जिसे सैनिकों के गांव के रूप में जाना जाता है. इस गांव के हर घर से भारतीय सेना में शामिल होने की परंपरा आज भी जारी है. प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों में 18 बहादुर सैनिक इस गांव के बेटे थे, और अधिकांश निवासी अभी भी सेना में सेवारत हैं. गांव के हाई स्कूल में महाराष्ट्र के वीर किलों के नाम पर कक्षाएं हैं. वास्तव में, कमांडो सुर्वे के परिवार की कई पीढियां सेना में रही हैं.

अधिक पढ़ें ...

Madhusudan Surve Biopic: मराठा शूरवीर योध्या, शौर्य चक्र से सम्मानित और देश के लिए अपनी जान तक न्योछावर कर देने वाले भारत के सपूत पैरा कमांडो श्री मधुसूदन सुर्वे (Madhusudan Surve) की जीवनी पर फिल्म बनने वाली हैं. बॉलीवुड के डायरेक्टर नीरज पाठक (Neeraj Pathak) ने मधुसूदन सुर्वे की बायोपिक बनाने के राइट खरीद लिए हैं और हाल ही में उनके गांव शिवतर (खेड़ डिस्ट्रिक्ट) में जाकर उनसे मिलकर फिल्म बनाने की घोषणा की.

जी हां, मराठा फ्रीडम फाइटर पर फिल्मी इतिहास में अद्भुत फिल्में बनी जिसमें उनकी शौर्य गाथा को बड़े पर्दे पर जीवंत किया और अब मराठा पैरा कमांडो जिन्होंने देश के लिए 11 गोलियां खाई और अपना एक पैर तक गंवा दिया, उनके बलिदान और मातृप्रेम को सलामी देने का इससे बेहतर तरीका नही हो सकता. लेखक-निर्माता-निर्देशक नीरज पाठक इस युद्ध नायक के जीवन की अमरगाथा को दिखाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और पैरा कमांडो सुर्वे के गांव शिवतर में मेगा बायोपिक लॉन्च करने की घोषणा की, जो देशभक्ति में डूबा हुआ एक गांव है.

Neeraj Pathak, Shaurya Chakra Para Commando Madhusudan Surve, Madhusudan Surve Biopic, शौर्य चक्र पैरा कमांडो मधुसूदन सुर्वे, मधुसूदन सुर्वे बायोपिक, नीरज पाठक

मधुसूदन सुर्वे को 2005 में मणिपुर में नक्सलियों के खिलाफ असाधारण लड़ाई के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था.

नीरज पाठक कहते हैं, ‘भारत तब तक आजाद रहेगा, जब तक यहां मधुसूदन सुर्वे जैसे वीरों का घर है.’ नीरज पाठक के रोंगटे खड़े हो गए जब उन्होंने सुना कि एक युद्ध के दौरान साथी सिपाही को बचाते हुए मधुसूदन सुर्वे को 11 गोलियां लगी. उनका पैर बुरी तरह से जख्मी हो गया था और उन्होंने अपने बाएं पैर के अवशेषों को घुटने तक काट दिया. अस्पताल से पूर्व-विच्छेदन सर्जरी के दौरान भी अपनी पत्नी को फोन करके कहा कि वह फुटबॉल खेलते समय घायल हो गए थे और उनके आसपास के लोगों के अलावा कोई भी भाप नहीं सकता था कि वो मौत के मुंह से बचकर आ गए.

डायरेक्टर नीरज पाठक ने इस बायोपिक के बारे में बताया, ‘मैंने पैरा कमांडो मधुसूदन सुर्वे की बायोपिक बनाने के राइट खरीद लिए हैं और रिसर्च वर्क शुरू करने वाले हैं. मधुसूदन सुर्वे हमारे बीच हैं, जिनके जरिए हमें उनके बारें में रिसर्च वर्क करने में आसानी होगी. फिल्म बहुत ही जल्द फ्लोर पर जाएगी और हम बॉलीवुड के किसी ‘ए’ लिस्टर से बात करेंगे, जिन्होंने आज तक कोई भी कमांडो ऑफिसर का रोल नही निभाया या बायोपिक नहीं की हैं. इसके अलावा अगले साथ तक हम फिल्म को रिलीज करेंगे.’

Neeraj Pathak, Shaurya Chakra Para Commando Madhusudan Surve, Madhusudan Surve Biopic, शौर्य चक्र पैरा कमांडो मधुसूदन सुर्वे, मधुसूदन सुर्वे बायोपिक, नीरज पाठक

मधुसूदन सुर्वे के परिवार की अगली पीढ़ी भी देश की सेवा के लिए काम कर रही है.

उन्होंने आगे कहा, ‘युद्ध में केवल विजेता होते हैं, कोई उपविजेता नहीं. एक सैनिक या तो तिरंगा फहराता है या उसमें लिपटा हुआ वापस आता है. मधुसूदन सुर्वे की बहादुरी विस्मयकारी है, यही कारण है कि मैंने उनकी बायोपिक के अधिकार लिए.’ मधुसूदन सुर्वे एक पूर्व पैराकमांडो हैं और एक घातक सैनिक हैं, जो रत्नागिरी के खेड़ तालुका के शिवतर गांव से हैं, जो सैनिकों का गांव भी कहा जाता है.

इस गांव के हर घर से भारतीय सेना में शामिल होने की परंपरा आज भी जारी है. प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों में 18 बहादुर सैनिक इस गांव के बेटे थे, और अधिकांश निवासी अभी भी सेना में सेवारत हैं. गांव के हाई स्कूल में महाराष्ट्र के वीर किलों के नाम पर कक्षाएं हैं. वास्तव में, कमांडो सुर्वे के परिवार की कई पीढियां सेना में रही हैं. वहां के ग्रामीण निवासी गर्व से कहते हैं कि उन्हें स्कूली दिनों से ही भारतीय सेना में शामिल होने का अवसर मिलता है.

वह असम में ऑपरेशन राइनो, जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक, कारगिल में ऑपरेशन विजय, नागालैंड में ऑपरेशन ऑर्किड और मणिपुर में ऑपरेशन हिफाजत पर ड्यूटी पर रहे हैं, जहां उन्होंने और उनकी टीम ने एक अंग खोने और लगभग घातक रूप से घायल होने के बावजूद 32 से अधिक आतंकवादियों का सफाया कर दिया. वह कांगो, दक्षिण अफ्रीका में संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा निगरानी मिशन पर भी थे. उनके परिवार की अगली पीढ़ी भी देश की सेवा के लिए काम कर रही है.

उनका बेटा एनडीए की तैयारी कर रहा है और बेटी मेडिकल क्षेत्र में काम कर रही है. मधुसूदन सुर्वे को 2005 में मणिपुर में नक्सलियों के खिलाफ असाधारण लड़ाई के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था, और इस घटना के बाद उन्होंने छह साल की सेवा की और 2011 में सक्रिय ड्यूटी से सेवानिवृत्त हुए.

Tags: Bollywood films

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर